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न्यूजीलैंड में नजर आया अंटार्कटिका का विरल पेंग्विन




तीन हजार किलोमीटर की दूरी तक आया है
कमजोर हो गया है सो उसका ईलाज जारी है
ठीक कर प्राकृतिक अवस्था में छोड़ा जाएगा
पत्नी के साथ चलते हैरी सिंह ने खिलौना समझा

क्राइस्टचर्चः न्यूजीलैंड में अंटार्कटिका का विरल पैंग्विन नजर आने को लेकर पर्यावरण वैज्ञानिक हैरान हैं। दरअसल अपने मूल निवास से यह पैंग्विन करीब तीन हजार किलोमीटर की दूरी तय कर यहां पहुंचा है।




इसकी सूचना पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने उसे सकुशल वहां से निकाला है और उसकी देखभाल की जा रही है। समझा जाता है कि अभी उसे संरक्षण की आवश्यकता है।

पूरी तरह स्वस्थ हो जाने के बाद उसे फिर से प्राकृतिक माहौल में छोड़ दिया जाएगा। न्यूजीलैंड में यह पैंग्विन क्राइस्टचर्च के दक्षिणी इलाके के समुद्री तट पर नजर आया था।

वहां के एक निवासी हैरी सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर इस बारे में जानकारी दी है। इस पैंग्विन को पहली बार उन्होंने ही देखा था। वह अपनी पत्नी क साथ समुद्री तट पर से गुजर रहे थे।

इसी दौरान उनकी नजर इस पर पड़ी। पहली नजर में वह किसी खिलौने की तरह नजर आया था। लेकिन अचानक उसमें हरकत देखकर वह समझ गये कि यह जीवित है।

इस समुद्री तट पर पैंग्विन नहीं होते हैं इसी वजह से वह वहां ठहर गये। उनके मुताबिक करीब एक घंटे तक पैंग्विन ने कोई हरकत नही की और ना ही पानी में वापस जाने की कोशिश की।

उसकी हालत देखकर ही हैरी सिंह ने पर्यावरण विशेषज्ञों को इसकी सूचना दी। इस सूचना पर वहां पहुंचे पर्यावरण विशेषज्ञ थॉमस स्ट्रार्के ने देखा तो वह हैरान हो गये।




यह दरअसल एडिली प्रजाति का पैंग्विन था। यह प्रजाति अंटार्कटिका में निवास करती है। अब वहां से तीन हजार किलोमीटर दूर यह कैसे पहुंचा है, इस बारे में कुछ पता नही चल पाया है।

लेकिन सभी उसकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे क्योंकि उस हालत मे कोई भी कुत्ता या बिल्ली भी उस पर हमला कर सकता था।

न्यूजीलैंड में तीसरी बार ऐसा पैंग्विन नजर आया है

इसलिए उसे सुरक्षित अवस्था में पशु अस्पताल ले आया गया है। प्रारंभिक जांच में उसका वजन कम और शरीर में पानी की कमी पाये जाने की वजह से उसका तत्काल ईलाज प्रारंभ किया गया है।

उसे कृत्रिम तरीके से भोजन भी दिया जा रहा है ताकि उसके शरीर की ताकत वापस लौटे। समझा जाता है कि समुद्र के अंदर किसी अन्य जानवर के हमले से बचने के लिए ही वह सतह पर चला आया था और पानी में वापस लौटने से डर रहा था।

न्यूजीलैंड में इस प्रजाति का पैंग्विन पाये जाने की यह तीसरी घटना है लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह प्रजाति इतनी दूर तक कैसे आ जाती है।

इस बारे में ओटागो विश्वविद्यालय के प्रोफसर फिलिप सेडन कहते हैं कि इस बात की गंभीरता को समझना होगा कि ऐसी प्रजातियां अपने मूल आवास को छोड़कर इतनी दूर क्यों आ रही हैं।

क्या समुद्री माहौल में भी कोई बदलाव हो रहा है, जिसे हम अभी सही तरीके से नहीं समझ पाये हैं।



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