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पृथ्वी पर भूकंप का प्रमुख कारण है टेक्टोनिक प्लेटों का सरकना







  • जमीन के भीतर आखिर क्यों हिलते हैं यह विशाल भूखंड
  • अंदरूनी भाग में टकराते हैं विशाल चट्टान
  • लावा वाले हिस्से के ऊपर हैं सारे के सारे
  • हिमालय के नीचे अब भी जारी है सक्रियता
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी पर भूकंप का अन्यतम प्रमुख कारण इसकी गहराई में दबे

पड़े विशाल भूखंडों का हिलना और आपस में टकराना है। इन विशाल भूखंडों

को विज्ञान की भाषा में टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है।

पृथ्वी के यह बड़े बड़े जमीन के टुकड़े जब आपस में हिलते हैं अथवा टकराते हैं

या फिर एक दूसरे से रगड़ खाकर अंदर धंसते हैं या ऊपर उठते हैं तो जमीन

के ऊपर हम भूकंप का अनुभव करते हैं। बीसवीं सदी के प्रारंभ में इस पर

वैज्ञानिक सोच विकसित हुई। इसके आधार पर इनकी जांच हुई।

यह पाया गया कि पहले पूरी पृथ्वी की जमीन एक ही थी जो क्रमवार तरीके से

अलग अलग टुकड़ों में टूटकर एक दूसरे से अलग होती चली गयी है। बाद में

कई ऐसे भूखंड या तो दूसरे भूखंड के नीचे धंस गये या फिर वे नये सिर से

जुड़कर एक नई संरचना का जन्म देने वाले बने।

जब 1960 के दशक में ऐसे नवीन साक्ष्यों की खोज हुई जिनसे महाद्वीपों के

स्थिर होने की बजाय गतिशील होने की अवधारणा को बल मिला। समुद्र की

गहराई के नीचे इनके अंदर गति होने की पुष्टि हो चुकी है।

जमीन की यह प्लेटें नीचे स्थित एस्थेनोस्फीयर की अर्धपिघलित परत पर

तैर रहीं हैं और सामान्यतया लगभग 10-40 मिमी/वर्ष की गति से गतिशील हैं

हालाँकि इनमें कुछ की गति 160 मिमी/वर्ष भी है।

इन्ही प्लेटों के गतिशील होने से पृथ्वी के वर्तमान धरातलीय स्वरूप की

उत्पत्ति और पर्वत निर्माण की व्याख्या प्रस्तुत की जाती है और यह

भी देखा गया है कि प्रायः भूकम्प इन प्लेटों की सीमाओं पर ही आते हैं

और ज्वालामुखी भी इन्हीं प्लेट सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं।

पृथ्वी पर भूकंप पर हुआ है काफी लंबा शोध

जब यह आपस में तेजी से टकराते हैं तो पृथ्वी के ऊपरी सतह पर भूकंप का

अनुभव होता है। जैसी टक्कर होती है, भूकंप का आकार भी वैसा ही होता है।

अधिकांश अवसरों पर यह टक्कर समुद्र की गहराई के नीचे होने की वजह से

अक्सर ही हम इन्हें महसूस नहीं करते। लेकिन असली सवाल यह है कि

जमीन के यह सारे टुकड़े आपस में टकराते क्यों हैं।

रोम विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस पर काफी लंबा शोध किया है। उसी

शोध के आधार पर इनके कारणों की वैज्ञानिक व्याख्या की गयी है। उनकी

शोध के बारे में पिछले 30 अक्टूबर को प्रकाशित साइंस एडवांसेज पत्रिका

में जानकारी दी गयी है। इसमें वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इन

टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने का एक प्रमुख कारण पृथ्वी की गहराई में

उबलते तरल का होना भी है। इस तरल अवस्था में अब अचानक कोई बदलाव

आता है तो जिस स्थान पर यह बदलाव आता है, उसका दबाव बाहर की तरफ

यानी टेक्नोनिक प्लेटों पर आता ही है। जब कभी दो ऐसे प्लेटों की जोड़ के

करीब यह स्थिति उत्पन्न होती है तो प्लेटों का आपसी संघर्ष तेज होता है।

वैसे इसी प्रक्रिया की वजह से कई इलाके ऐसे हैं जहां एक प्लेट दूसरे प्लेट

की नीचे धंसती चली जा रही है।

वैज्ञानिक शोध में यह भी पाया गया है कि इन टेक्टोनिक प्लेटों के किनारे

ठंढा होने के बाद नीचे की तरफ धंसते जा रहे हैं। जब यह ठंडा इलाका गर्म

उबलते लावा के अंदर पहुंचते हैं तो वहां तो गर्मी और ऊर्जा पैदा होती है

वह भी उथल पुथल चालू करने के लिए पर्याप्त कारक बनता है।

प्लेट्स आपसी रगड़ से दोनों तरफ ठेलती है तीब्र ऊर्जा

पृथ्वी के आंतरिक छोर का बाहरी हिस्से जिसे मैंटल कहा जाता है, इन प्लेटों

को सरकाता रहता है जबकि वे प्लेट्स अंदर धंसकर मैंटलों को गति प्रदान

करते रहते हैं। शोधकर्ताओं ने इसके बारे में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर

एक कंप्यूटर मॉडल भी विकसित किया है। यह काम कोई आसान काम नहीं

था। इसके लिए वैज्ञानिकों को एक सुपर कंप्यूटर की मदद से हर वैसे आंकड़े

को दर्ज करना पड़ा, जिनकी प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष भूमिका समझी गयी थी।

इस काम को करने में वैज्ञानिकों को करीब नौ माह का समय लगा था।

यह सारा काम पूरा होने के बाद पृथ्वी के करीब 1.5 बिलियन वर्षों का

क्रमिक घटनाक्रम को समझने और बदलाव को देखने में मदद मिली है।

इसी आधार पर वैज्ञानिक अब इस नतीज पर पहुंचे हैं कि पृथ्वी का दो तिहाई

हिस्सा तेजी से घूम रहा है। यानी इन हिस्सों की गति वहां से मैंटल से ज्यादा

है। जबकि शेष एक तिहाई में यह स्थिति पूरी तरह उल्टी हुई है, जहां मैंटल

की गति ऊपर के प्लेट्स के मुकाबले अधिक है। इसी वजह से एशिया

महाद्वीप के भारतीय भौगोलिक सीमा के आस-पास है। यह हिमालय का

इलाका है। इस इलाक के टेक्नोनिक प्लेट्स अंदर की तरफ धंसते जा रहे हैं।

किसी दिन अगर इसकी गति अचानक तेज हुई तो एक बहुत बड़ा भूकंप

इस क्षेत्र में आयेगा और पूरे इलाके का नक्शा ही बदल जाएगा।



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