fbpx Press "Enter" to skip to content

एक और ज्वालामुखी विस्फोट की पूर्व चेतावनी जारी, देखें वीडियो

  • सैटेलाइट चित्रों ने अंदर का हाल बताया है
  • खतरे के संकेत को पीला से नारंगी किया
  • राख उड़ने से भी हर तरफ परेशानी होती है
  • अलास्का इलाक में है पैसिफिक रिंग ऑफ फायर
राष्ट्रीय खबर

रांचीः एक और ज्वालामुखी विस्फोट की तरफ बढ़ रहा है। ऐसी गतिविधियों पर नजर

रखने वाले यूएसजीएस के वैज्ञानिकों ने अलास्का के इस ज्वालामुखी के बारे में चेतावनी

संकेत को अब नारंगी रंग का कर दिया है। इसके बाद लाल रंग को अंतिम चेतावनी के दौर

पर माना जाता है।

वीडियो में देखिये कैसे समुद्र के नीचे से ऊपर तक आता है ज्वालामुखी

अलास्का के सेमिसोपोचनोई ज्वालामुखी के बारे में यह संकेत दिये गये हैं। यूं तो वहां से

बहुत कम राख और गैस निकल रहा है। फिर भी सैटेलाइट के चित्र बताते हैं कि अंदर में

गतिविधियां तेज हो रही हैं। सैटेलाइट के चित्र से ज्वालामुखी के भीतर उबलते लावा को

वैज्ञानिको ने देखा है। चेतावनी संकेत नारंगी रंग का होने के बाद अब लगातार इसकी

गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि विस्फोट होने के पहले उसकी जानकारी मिले

और लोगों को सतर्क किया जा सके। कल इस इलाके में बहुत छोटे छोटे विस्फोट दर्ज किये

गये। 17 मई को वहां से राख भी बहुत कम मात्रा में निकली थी। सैटेलाइट से मिले आंकड़ों

से यह पता चल गया कि इस ज्वालामुखी से जो धुआं आसमान की तरफ गया था, उसमें

सल्फर डॉईऑक्साइड की मात्रा अधिक थी। वहां के माउंट सेरेबेरुस के उत्तरी छोर पर ऐसी

गतिविधियां देखी जा रही है। यह अमेरिका और उत्तरी अमेरिका का सुदूर पूर्व का इलाका

है। यहां ज्वालामुखी के पहाड़ एलुटियन द्वीप पर मौजूद है। वहां पर कुल 14 बड़े और 55

छोटो ज्वालामुखी हैं जिन्हें जीवित माना जाता है। इसी वजह से इस इलाके को पैसिफिर

रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है। यह सभी जीवित ज्वालामुखी वहां के अलग अलग

द्वीपों पर हैं। प्रशांत महासागर के छोर पर स्थित यह इलाका दो टेक्नोनिक प्लेटों के ऊपर

है। शायद इसी वजह से यहां की ऐसी स्थिति बनी हुई है। इसके नीचे टेक्नोनिक प्लेटों का

आपसी टकराव होता ही रहता है।

एक और ज्वालामुखी का संकेत लेकिन पूरा इलाका ही खतरनाक

अलास्का के वोल्कानो ऑबजरभेटरी से इनकी निगरानी की जाती है। यूएसजीएस और

यूनिवर्सिटी ऑफ अलास्का फेयरबैंकस के जिओफिजिकल इंस्टिट्यूट मिलकर इससे

मिलने वाले आंकड़ों की निरंतर निगरानी करते हैं। यह हवाई में स्थापित हवाई वोल्कानो

ऑबजरभेटरी के जैसा ही है लेकिन हवाई द्वीप में सिर्फ तीन ज्वालामुखियों की निगरानी

होती है। उस क्षेत्र में किलायुआ, माउना लोआ और हुआलालाई जीवित श्रेणी के 

ज्वालामुखी है। इधऱ सेमिसोपोचनोई के पास भी वेनियामिनोफ ज्वालामुखी का क्षेत्र है।

लेकिन यह क्षेत्र फिलहाल शांत पड़ा हुआ है। सेमिसोपोचनोई जीवित ज्वालामुखी पर

एडाक द्वीप पर स्थापित इंफ्रासाउंड उपकरण से भी नजरदारी होती है। यह उपकरण

विस्फोट होने के 13 मिनट के भीतर उसके संकेतों को पकड़कर चेतावनी जारी कर सकता

है। यह जान लें कि ज्वालामुखी के लिए सफेद, हरा, पीला, नारंगी और लाल संकेत होते हैं।

सफेद का अर्थ जिस ज्वालामुखी से कोई भी हलचल दर्ज नहीं किया जाए। हरे रंग का अर्थ

जमीन के नीचे सामान्य किस्म की उथल पुथल का होना है। पीला रंग जब दर्ज किया

जाता है जब ज्वालामुखी के नीचे से अधिक हलचल होने के आंकड़े दर्ज किये जाने लगे।

पीले रंग के बाद से निरंतर निगरानी में अगर हलचल और बढ़ता दिख जाए तो उसे नारंगी

रंग के चेतावनी संकेत में बदल दिया जाता है। अंत में लाल रंग का संकेत तब जारी किया

जाता है जब यह समझा जाए कि इस ज्वालामुखी में अब विस्फोट होने वाला है।

सेमिसोपोचनोई के लिए अब इसी वजह से नारंगी संकेत जारी कर दिया गया है। इन

चेतावनी संकेतों का विमान परिचालन में भी ध्यान रखा जाता है। अनेक बार ज्वालामुखी

विस्फोट के बाद आसमान पर राख के बादल होने की वजह से विमानों का आना जाना भी

बाधित हो जाता है।

राख आसमान पर जाने से हवाई उड़ानें भी बाधित होती हैं

दरअसल इस राख की वजह से हवाई जहाज के अलावा इंजनों के सहारे चलने वाले हर

यान का बंद होना तय है क्योंकि हवा खींचते वक्त इंजन इस राख को भी अपने अंदर खींच

लेता है जो अंदर जाकर इंजनों को बंद कर देता है। इसी वजह से विमान परिचालन में इन

आंकड़ों पर हमेशा ही गौर किया जाता है। एक और ज्वालामुखी विस्फोट कुछ वर्ष पहले

होने की वजह से यूरोप के अनेक हवाई अड्डों से विमान परिचालन कई दिनों तक बंद हो

गया था। अभी अलास्का के एक और ज्वालामुखी की सक्रियता बढ़ने की वजह से हर

परिस्थिति पर गौर किया जा रहा है। सैटेलाइट के चित्र ज्वालामुखी के अंदर की धधकती

आग को अपने कैमरे में कैद कर चुके हैं। पूर्व के घटनाक्रमों से सबक लेते हुए ही एक और

ज्वालामुखी की सक्रियता पर नजर रखी जा रही है क्योंकि यह फटने तक वहां जान का

नुकसान भले ही ना हो लेकिन आसमान पर उड़ने वाले राख बहुत दूर तक फैलकर कई

किस्म का नुकसान कर सकते हैं।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from HomeMore posts in Home »
More from अमेरिकाMore posts in अमेरिका »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from प्रोद्योगिकीMore posts in प्रोद्योगिकी »

Be First to Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: