अंतरिक्ष में तेजी से गायब हो रहा है एक ग्रह हब्बल टेलीस्कोप ने खोजा

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  • अब तक 35 प्रतिशत खत्म हुआ

  • आस-पास उड़ रहा धूल का बवंडर

  • पृथ्वी से 96 प्रकाश वर्ष की दूरी पर

प्रतिनिधि

नई दिल्ली: अंतरिक्ष में एक ग्रह को गायब होते दिखा जा रहा है।

अंतरिक्ष की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखने वाले हब्बल स्पेस टेलीस्कोप ने इसे खोजा है।

आकार में यह हमारे सौरमंडल के नेप्चुन ग्रह के बराबर है।

टेलिस्कोप के आंकड़े यह बता रहे हैं कि पहले इसके शरण की जो गति तय की गई थी

उससे यह 100 गुना अधिक गति से समाप्त होने की तरफ बढ़ रहा है।

नेप्चून हमारे सौरमंडल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है इसलिए समझा जा सकता है कि

इस आकार के किसी अन्य तारे के समाप्त होने की गतिविधियों में आस-पास क्या कुछ घट रहा होगा।

टेलीस्कोप के माध्यम से खगोल वैज्ञानिकों ने इन्हीं गतिविधियों को समझा है।

इसके आसपास धूल की आंधी उड़ रही है जिससे यह समझा जा रहा है कि

यह दरअसल अपने आकार को त्यागकर छोटे-छोटे कणों में तब्दील हो हो रहा है।

धूल की शक्ल में यह कण ग्रह के चारों तरफ बवंडर जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं।

धीरे-धीरे यह धूल कण अंतरिक्ष में विलीन हो जाएंगे।

जॉन हापकिंस विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेविड सिंग ने बताया कि

जिस गति से यह ग्रह समाप्त हो रहा है तो यह समझा जा सकता है कि

कुछ लाख वर्षों में यह ग्रह अपने वर्तमान आकार का आधा रह जाएगा।

अंतरिक्ष में बिखर जाएगा यह ग्रह धीरे धीरे

जैसे जैसे यहां गुरुत्वाकर्षण का बल कम हो रहा है वैसे वैसे इसकी सतह से कण अंतरिक्ष की तरफ चले जा रहे हैं

और धीरे-धीरे यह गति ग्रह के भीतरी सतह को भी प्रभावित करेगी।

जिसका नतीजा होगा कि यह अंततः छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटकर अंतरिक्ष में बिखर जाएगा।

जिस ग्रह के समाप्त होने की चर्चा हो रही है वह अंदाज में हमारी पृथ्वी से करीब 4 गुना बड़ा है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ग्रह हम से करीब 96 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है

और वह एक लाल रंग के बड़े तारे का चक्कर लगा रहा है।

इस तारे की उम्र अब तक 4 से 8 खरब वर्ष पुरानी आंकी गई है।

वैज्ञानिकों ने जब से इस पर नजर रखना प्रारंभ किया है तब से अब तक यह अपने कुल आकार का तकरीबन 35% कम हो चुका है

और अनुमान है कि धीरे-धीरे इसके पथरीली छोड़ के अलावा सारा कुछ अंतरिक्ष में गैस बन कर विलीन हो जाएगा।

इसमें से कुछ बड़े कण बाद में उल्कापिंड की भांति अंतरिक्ष में इधर-उधर भटकते रह जाएंगे

अथवा या किसी अन्य ग्रह अथवा तारे के गुरुत्वाकर्षण में आकर उनमें समाहित हो जाएंगे।

एक दूसरे सौरमंडल में घटित हो रही ऐसी घटना के बारे में वैज्ञानिकों को पहली बार ऐसी जानकारी मिली है।

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