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सुदूर अंतरिक्ष का तारा एक्स रे किरणें छोड़ रहा है

  • यूरोपियन फोटोन इमेजिंग कैमरे में कैद हुई तस्वीर

  • एक्सएमएम न्यूटन उपकरण से पता चला इसका

  • आकार में यह सूर्य का मात्र आठ प्रतिशत ही है

  • वैज्ञानिक इसके आगे की जानकारी चाहते हैं

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सुदूर अंतरिक्ष की एक और घटना पर वैज्ञानिकों की नजर

गयी है। एक्सएमएम न्यूटन नाम के उपकरण से यह तारा नजर आया

है जो लगातार एक्स रे किरणें छोड़ रहा है। लिहाजा यह माना जा

सकता है कि इस तारा के करीब होना किसी भी पृथ्वी के जीवन के लिए

अत्यंत खतरनाक है।

आम तौर  पर इस पृथ्वी पर भी एक्स रे किरणों का इस्तेमाल सिर्फ

एक्स रे करने के लिए ही सीमित अवस्था में किया जाता है। दरअसल

इन किरणें के विकिरण शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में समझा

जा सकता है कि जिस तारा से लगातार ऐसी किरणें निकल रही हों तो

उसका विकिरण कितना खतरनाक होगा।

आकार में यह तारा काफी छोटा है लेकिन इस एक्स रे किरणों की वजह

से वह पृथ्वी पर मौजूद जीवन के लिए बहुत खतरनाक है। लेकिन

अच्छी बात यह है कि यह पृथ्वी से काफी दूरी पर है। यूरोपियन फोटोन

इमेजिंग तकनीक वाले उपकरण एक्सएमएम न्यूटन ने इसका पता

लगाया है। इस तारा को पहले निर्जीव स्तर का तारा माना गया था।

इसे खगोल विज्ञान में जे 0331-27 का नाम दिया गया है। अब परीक्षण

से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह तारा दरअसल सूरज के मुकाबले

दस गुणा अधिक विकिरण पैदा कर रहा है।

वैज्ञानिक काफी शोध के बाद इस नतीजे पर पहुंचे है कि सूर्य की सबसे

खतरनाक लपटों के मुकाबले इस नन्हे से तारे का विकिरण का स्तर

काफी अधिक है। सूर्य के मुकाबले अधिक विकिरण एक छोटे से तारे से

निकलना वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है क्योंकि इसमें अत्यधिक ताप

होने के भी कोई प्रमाण नहीं मिल पाये हैं। लिहाजा इसके बारे में नये

सिरे से अनुसंधान किया जाने लगा है।

सुदूर अंतरिक्ष में घटना का कारण अब तक पता नहीं

काफी आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह माना गया है कि सुदूर अंतरिक्ष

का तारा आकार में सूर्य का मात्र आठ प्रतिशत ही है। इसके बाद भी यह

इतना एक्स रे किरण क्यों छोड़ रहा है, यह पहेली अब तक सुलझ नहीं

पायी है ।

प्रचलित और प्रमाणित विज्ञान के लिहाज से इतने छोटे और मृतप्राय

समझे गये तारा का ऐसा आचरण संभव नहीं है। लेकिन वैज्ञानिक

उपकरणों से इसकी पुष्टि हो जाने के बाद इस शोध से जुड़े वैज्ञानिक

नये सिरे से सभी तथ्यों की गणना कर रहे हैं।

इस तारा के बारे में पहली बार वैज्ञानिकों को वर्ष 2008 में जानकारी

मिली थी। उस वक्त के आंकड़ों पर ज्यादा विश्लेषण नहीं हो पाया था।

जैसे जैसे सुदूर अंतरिक्ष में झांकने की तकनीक विकसित होती चली

गयी वैसे वैसे पूर्व के आंकड़ों का नये सिरे से विश्लेषण भी किया गया।

यूरोपिय स्पेस एजेंसी के नियंत्रण कक्ष से इस तारा से एक्स रे किरणों

के विकिरण की पुष्टि होने के बाद सारी गणनाएं नये सिरे से की जा

रही हैं। इस विकिरण से इतना तो स्पष्ट हो गया है कि इसतारा के

अंदर भी चुंबकीय क्षेत्र मौजूद है लेकिन किन कारणों से यह एक्स रे

किरणें छोड़ रहा है, उसका कोई विज्ञान सम्मत तथ्य अब तक सामने

नहीं आ पाया है। जर्मनी के इंस्टिटियूट फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड

एस्ट्रोफिजिक्स एवं पालरेमा के आइएनएएफ खगोल केंद्र के लोग इस

शोध से जुड़े हुए हैं। वे खुद भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि

पहले तो इन आंकड़ों की उन्हें उम्मीद ही नहीं थी। दूसरे यह कि आंकड़ा

आने के बाद एक बार उन्हें सही स्वीकार कर पाना भी वर्तमान

वैज्ञानिक सिद्धांतों की वजह से संभव नहीं था।

इतने छोटे तारे में इतना विकिरण कैसे समझने की कोशिश जारी

इसलिए शोध दल को नये सिरे से सारे आंकड़ों की पुष्टि करनी पड़ी है।

दोबारा शोध होने के बाद यह देखा गया कि इस तारा का सतही

तापमान भी सूर्य के मुकाबले काफी कम है। इसके बाद भी इससे

विकिरण क्यों हो रहा है, यह बड़ी बात है। तारों से प्रकाश विकिरण एक

आम बात है। लेकिन यह अपने आप में अजीब तारा है जो एक्स रे

किरणें छोड़ रहा है।

इस तारा से निकले वाला किरण सुदूर अंतरिक्ष में दूर दूर तक फैल रहा

है। शोध दल को इस तारा से 3.5 मिलीसेकंड के विकिरण को लगातार

चालीस दिनों तक देखने का मौका मिला । इससे बड़े विकिरण के साथ

साथ छोटे विकिरण भी हो रहे हैं। इस भीषण विकिरण के लिए इस

तारा के अंदर में ऊर्जा कहां से पैदा हो रही है, यह भी अब तक स्पष्ट

नहीं हो पाया है।

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