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त्रिपुरा में घुसकर गौ तस्करी कर रहे थे तीन संदिग्ध बांग्लादेशी




  • ग्रामीणों ने पीट पीटकर एक को मार डाला

  • गाय मालिकों पर किया गया हमला

  • दो तस्कर भाग निकलने में सफल

  • सीमा पार तस्करी का कारोबार बढ़ा

  • हर साल बीस हजार करोड़ की तस्करी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : त्रिपुरा में घुसकर गौ तस्करी करने का एक मामला फिर से प्रकाश में आया है। त्रिपुरा में कल देर रात तीन संदिग्ध पशु तस्कर देर रात बांग्लादेश से कथित तौर पर राज्य में दाखिल हुए थे।




इन तीनों पर आरोप है कि जब वो गोवंश की चोरी करने के लिए एक घर में घुसे, तो मालिक ने उन्हें पड़ोसी की मदद से पकड़ लिया।

तीन आरोपियों में से दो भागने में सफल रहे, लेकिन एक नहीं भाग सका। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इसके बाद स्थानीय लोगों ने गुस्से में उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी।

पुलिस ने बताया कि तीन संदिग्ध चोरों में से 2 भागने में सफल हो गये। लेकिन एक युवक को इलाके के लोगों ने पकड़ लिया और फिर उसकी जमकर पिटाई कर दी।

पुलिस ने घटनास्थल के पास से मोबाइल फोन और बांग्लादेशी करेंसी बरामद किये हैं। अभी पीड़ित की पहचान नहीं हो पाई है।

बताया जा रहा है कि यह घटना त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले के कमल नगर गांव में हुई है।
सीमा पार पशु धन तस्करी का धंधा 20 हजार करोड़ का बताया जाता है।

और इस रैकेट में नेता, अफसर, पुलिस, सुरक्षा बल आदि सब मिले हुये हैं। क्योंकि ये तस्करी पुलिस, सीमा सुरक्षा और कस्टम के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर मुमकिन ही नहीं है। गायों की तस्करी सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल से सटी सीमा से होती है।

त्रिपुरा में घुसकर होने वाली तस्करी में सभी का संरक्षण

इसके बाद असम, बिहार, त्रिपुरा आदि राज्य हैं। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी ने इस बारे में कहा कि पूर्वोत्तर राज्य सहित पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्र के रास्ते से रोजाना हजारों गायें बांग्लादेश पहुंचती हैं।

सीबीआई का मानना है कि जिस संख्या में गायों की तस्करी होती है, उसमें सिर्फ पांच फीसदी ही बीएसएफ रोक पाती है।




कल देर रात त्रिपुरा में हुई गाय की तस्करी की घटना को लेकर सारे देश में सनसनी फैल गई है। जानकारी के मुताबिक त्रिपुरा में बांग्लादेशियों के द्वारा गौ तस्करी के मामले बढ़ते जा रहे है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन्होंने गाय के मालिक पॉल के ऊपर हमला भी किया था। हमले में पॉल के कानों पर चोट लगी है, जिसका इलाज राजधानी अगरतला के जीबी अस्पताल में चल रहा है।

पशु तस्करों के सीमा पार कुमिला जिले का निवासी होने की संभावना जताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, उनके पास से मिली बांग्लादेशी मुद्रा टका उनके बांग्लादेशी होने की तरफ इशारा कर रही है।

इससे पहले जून 2021 में खोवाई जिले की 2 अलग-अलग घटनाओं में 3 संदिग्धों को पशु तस्करी के आरोप में पीट कर मार दिया गया था।

वहीं, सप्ताह भर पहले असम पुलिस ने 10 बांग्लादेशियों को असम-त्रिपुरा की सीमा पर बाज़ारीचेर्रा पुलिस चेकपोस्ट से गिरफ्तार किया था।

आपको बता दें पुलिस ने बताया कि बांग्लादेश में इन पशुधन को काट कर पैकेज्ड मीट के रूप में एक्सपोर्ट किया जाता है।

इसके अलावा इस मीट को लोकल बाजार में भी बड़े पैमाने पर बेचा जाता है। जानकार बताते हैं कि बांग्लादेश में प्रोटीन का सबसे बड़ा स्रोत यही मांस है।

भारत से पशु तस्करी इतने बड़े पैमाने पर होती है कि बांग्लादेश में डेयरी उद्योग ध्वस्त हो गया है।



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