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एक विशाल तारा नजरों से अचानक ही ओझल हो गया वैज्ञानिक हैरान

  • महाकाश की इस घटना की व्याख्या नहीं आयी

  •  घटना का कोई वैज्ञानिक विश्लेषण नहीं

  •  तारा टूटता है तो निशान छोड़ जाता है

  •  पिछले साल ही काफी चमक रहा था

संवाददाता

नईदिल्लीः एक विशाल तारा अचानक ही गायब हो गया है। अब तक इस तारे के गायब

होने के कारणों की व्याख्या वैज्ञानिक नहीं कर पा रहे हैं। किसी ब्लैक होल में खींचे चले

जाने अथवा खुद ही टूटकर बिखर जाने जैसी कोई घटना भी वैज्ञानिकों को नजर नहीं

आयी है। इसलिए महाकाश की इस अजीब घटना को लेकर खगोल वैज्ञानिक हैरान हैं।

जहां पर यह घटना घटी है, वह करीब 75 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इलाका है। आम

तौर पर किसी एक विशाल तारा के विखंडित होने की स्थिति में भी आस पास इसके कण

और गैस नजर आते हैं। इस मामले में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। यह तारा नजर आते आते

अचानक ही नजरों से ओझल हो गया है।

एक विशाल तारा पर पहले ही खगोलविदों की नजर थी

जिसके ओझल होने की चर्चा हो रही है वह आधिकारिक तौर पर पीएचएल 293 बी के नाम

से जाना जाता है। इसका दूसरा नाम किनमैन ड्वार्फ भी है। दरअसल अपनी रोशनी की

वजह से ही इस तारा ने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। खगोल दूरबीन में इस

तारा की चमक सूर्य से भी करीब सौ गुणा अधिक नजर आ रही है। यह पिछले वर्ष की

घटना है। इसकी चमक की वजह से वहां का पूरा सौरमंडल की प्रकाशित हो उठा था। अब

यह नजरों से ओझल हो चुका है। इसके गायब हो जाने के बारे में एक शोध रिपोर्ट रॉयल

एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी की पत्रिका में प्रकाशित की गयी है।

दूसरे तारों से काफी भिन्न और चमकदार था यह तारा

ट्रिनिटी कॉलेज डबलीन के शोध छात्र एंड्र्यू एलन ने इस बारे में कहा कि यह यह एक

विशाल तारा था। इसकी चमक की वजह से भी यह दूसरों से अलग ही दिखता था। लेकिन

अब अचानक यह नजर आना बंद हो चुका है। जिसकी वजह की जानकारी अब तक नहीं

मिल पायी है। अगस्त 2019 में चिली में स्थापित खगोल दूरबीन में इसे जब देखा गया था

तो उसकी चमक देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो गये थे।

यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला से भी यह घटना देखी गयी है। एक्स शूटर नामक एक

आधुनिक उपकरण की मदद से इस इलाके की नये सिरे से खोज बीन प्रारंभ हुई है।

दरअसल दिसंबर महीने में नजर आने के बाद यह अचानक कैसे गायब हो गया, यह अपने

आप में वैज्ञानिकों के लिए बड़ा सवाल है। आम तौर पर अंतरिक्ष में तारों का टूटना कोई

नई बात नहीं है। सुपरनोवा जैसी परिस्थितियों में एक साथ अनेक तारे टूटते चले जाते हैं।

या फिर ब्लैक होल में सोख लिये जाने के कारण भी ऐसा होता है। लेकिन इन दोनों ही

परिस्थितियों टूटते हुए तारे अपनी निशानी छोड़ते हैं। यहां तक कि ब्लैक होल के प्रचंड

गुरुत्वाकर्षण में समा जाने के पहले भी इसके गैस की गुबार साफ साफ नजर आती है।

अपने पूर्व स्थान पर इस तारा के नजर नहीं आने के बाद वैज्ञानिक यह मानते हैं कि

महाकाश की अनजानी गतिविधि की वजह से या तो यह तारा कहीं और चला गया है

अथवा सौरमंडल में यह टूटकर समाप्त हो चुका है और उसके टूटने की गति इतनी तेज थी

कि उसके निशान भी नजर नहीं आ रहे हैं। लेकिन उस इलाके में अब भी वैज्ञानिकों की

नजर है और वे किसी ऐसे सबूत की तलाश कर रहे हैं, जो पहले किसी वजह से नजर में

नहीं आया हो।

तारे टूटते वक्त अपना निशान छोड़ जाते हैं

खोजबीन के क्रम में एक अन्य तारे को भी टूटते हुए देखा गया है। यह 22 लाख प्रकाश वर्ष

की दूर की घटना है और टूटने वाला तारा आकार में सूर्य के करीब 25 गुणा बड़ा है। लेकिन

इसके टूटने का नजर साफ नजर आ रहा है। लेकिन इस तारे को धीरे धीरे टूटकर बिखरते

हुए देखा जा रहा है। इस अनुसंधान के क्रम में यह बात भी सामने आयी है कि आकार में

विशाल तारे ही जल्द टूट जाया करते हैं क्योंकि अंतरिक्ष में सभी पर समान रुप से पड़ने

वाले अन्य गुरुत्वाकर्षण बल को बड़े तारे ही ज्यादा देर तक झेल नहीं पाते हैं।


 

 

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