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अंटार्कटिका की गहराई में खुदाई में निकला दुनिया का सबसे बड़ा अंडा

  • टेक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की खोज

  • निकाला गया तो लगा डायनासोर का अंडा है

  • जांच में रेंगने वाले प्राणी के होने का पता चला

  • अंडों की संरचना की जांच से अंतर की पुष्टि

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अंटार्कटिका की गहराई में एक ऐसा अंडे का फॉसिल मिला है जो नापने पर

आकार में 11 ईंच लंबा और सात ईंच चौड़ा है। यह इस पृथ्वी पर पाया जाने वाला सबसे

बड़ा अंडा है, जो उस काल के किसी जमीन पर रेंगने वाले प्राणी का है। अंडे के प्रारंभिक

परीक्षण के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह शायद 68 मिलियन वर्ष पुराना

है। उस काल में पृथ्वी पर सिर्फ विशाल विशाल प्राणी ही रहा करते थे। उस दौर की दुनिया

में इस पृथ्वी पर राज करने वाला प्राणी डायनासोर ही था जो सबसे अधिक आक्रामक,

शक्तिशाली और बुद्धिमान भी था। अंडे के आकार के आधार पर वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर

पहुंचे हैं कि जिस भी प्राणी का यह अंडा है वह आकार में किसी बड़े डायनासोर के जितना

ही था। वैसे इस अंडे के बारे में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह डायरासोर का अंडा

नहीं है। ऐसी राय टेक्सास विश्वविद्यालय के जिओ साइंटिंस्ट लुकास लीजेंद्रे ने जाहिर की

है। उनके मुताबिक जिस भी रेंगने वाले प्राणी का यह अंडा है वह आकार में कमसे कम 23

फीट लंबा रहा होगा। इस शोध के बारे में कल के नेचर पत्रिका में प्रबंध प्रकाशित किया

गया है। इस नई खोज की प्रजाति का अभी वैज्ञानिक नामकरण किया गया है। उसे

वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिकूलिथूस ब्राडी कहा है।

फॉसिल का वैज्ञानिकों ने गहन सर्वेक्षण किया

अंडे की संरचना के आधार पर ही वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि यह किसी सरीसृप

का अंडा है। यानी जमीन पर रेंगने वाले किसी विशाल प्राणी का यह अंडा है। साथ ही यह

संकेत भी मिले हैं कि जिस भी प्राणी का यह अंडा है वह पानी में भी आसानी से विचरण

कर सकता था। यानी यह रेंगने वाला प्राणी जमीन और पानी दोनों में चल सकता था। अंडे

का आकार देखकर सबसे पहले इसे आकार के लिहाज से डायनासोर का ही अंडा समझा

गया था। जैसे जैसे उसकी संरक्षित संरचना के बारे में जानकारी हासिल की गयी तो यह

स्पष्ट हुआ कि यह दरअसल डायनासोर प्रजाति के किसी जीव का अंडा नहीं है बल्कि यह

जमीन पर रेंगने वाले किसी अन्य विशालकाय प्राणी का अंडा है।

अंटार्कटिका की गहराई में पाये अंडे का संरचना अलग

दरअसल जब इसे प्रारंभिक तौर पर डायनासोर का अंडा समझा गया था तो विवाद को

समाप्त करने के लिए पहले से मौजूद डायनासोर के फॉसिल अंडों के साथ उनके आंकडों

का मिलान किया गया। आंकड़ों के मिलान से ही यह स्पष्ट हो गया कि इस अंडे और पहले

से पाये गये डायनासोर के अंडों की संरचना में फर्क है। शोधकर्ताओं ने पहले ही डायनासोर

के कम उम्र और पूर्ण विकसित प्रजाति में तैयार अंडों को खोज निकाला था। उनकी

सरंचना से इन्हें मिलाया गया। यह पहले ही पता चल चुका था कि डायनासोर के अंडों का

खोल अपेक्षाकृत नर्म हुआ करता था ताकि बच्चे आसानी से खोल को तोड़कर निकल

सके। खोल से बाहर निकलने के बाद अपने अभिभावकों के संरक्षण में तेजी से डायनासोर

के बच्चों का विकास होता था। लेकिन सरीसृप श्रेणी के अंडों का खोल काफी मजबूत होता

है। इसकी खास वजह अंदर विकसित हो रहे बच्चे के पूरी तरह शक्तिशाली होने के बाद ही

वह खोल को अपने से तोड़कर बाहर निकल पाता है। बाहर निकलने के बाद वह अपने दम

पर रेंगने लगता है। इस अंतर से भी यह स्पष्ट हो गया कि अंटार्कटिका की गहराई से जो

अंडे का फॉसिल खोदकर निकाला गया है वह दरअसल डायनासोर का अंडा नहीं है।

अर्जेंटीना और मंगोलिया से मिले नमूनों से मिलान किया

इस बारे में वैज्ञानिकों को अर्जेंटीना और मंगोलिया से मिले डायनासोर के अंडों से मिलान

करना आसान हो गया था। डायनासोर के अंडों की संरचना भी बिल्कुल वैसी ही होती है जो

वर्तमान प्रजाति के पक्षियो की होती है। इस लिहाज से वैज्ञानिक मानते हैं कि बदलाव की

प्रक्रिया के दौरान पृथ्वी के अनेक जानवरों का स्वरुप को बदला लेकिन जिस प्रजाति से

इन नई प्रजातियों का विकास हुआ, उनके प्राकृतिक गुणों में से एक वंश वृद्धि का मूल

आधार अब भी यथावत ही है। पहले पाये गये डायनासोर प्रजाति के अंडों की जो फॉसिल्स

मिली हैं, वे आकार में भी दस सेंटीमीटर से अधिक नहीं हैं। सिर्फ बीस फुट लंबे एक प्रजाति

के अंडे पूरी तरह गोलाकार हुआ करते थे।


 

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