पृथ्वी से वर्ष 2023 में टकरा सकता है बड़ा उल्कापिंड

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  • नासा के वैज्ञानिकों ने दी पूर्व चेतावनी

  • वैसे टकराने की आशंका न्यूनतम भी है

  • बड़े आकार का उल्कापिंड पहुंचाता है नुकसान

  • लगातार नजर बनाये हुए हैं अंतरिक्ष वैज्ञानिक

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पृथ्वी पर एक बड़े उल्कापिंड के टकराने की आशंका वर्ष 2023 में बन रही है।

नासा के वैज्ञानिकों ने इस बारे में पूर्व चेतावनी जारी कर दी है।

इसका आकार में यह उल्कापिंड करीब सात सौ फीट लंबा है।

इसलिए इसके टकराने से यहां असर हो सकता है।

वीडिये में देखिये पृथ्वी पर उल्कापिंड टकराने से क्या होता है

लेकिन यह चेतावनी देने के साथ साथ वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि

इसके यहां आ टकराने की संभावना बहुत कम है।

उनके अनुमान के मुताबिक तीन करोड़ में एक संभावना जैसी यह स्थिति है।

अगर वास्तव में यह उल्कापिंड पृथ्वी की तरफ आया तो यह आठ अगस्त 2023 को धरती से टकरा सकता है।

इस उल्कापिंड का नाम 2018एलएफ16 है। अंतरिक्ष में इस किस्म के अनेक उल्कापिंड मंडरा रहे हैं।

इनमें से कुछ छोटे आकार के उल्कापिंड समय समय पर पृथ्वी पर गिरते भी रहते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक इस उल्कापिंड के बाद 3 अगस्त 2024 और 1 अगस्त 2025 में भी उल्कापिंड पृथ्वी पर गिर सकते हैं।

हालांकि इन दोनों उल्कापिंडों से पृथ्वी को कोई नुकसान होने की संभावना नहीं है।

इसके बाद भी वैज्ञानिक इन तमाम उल्कापिंडों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए हैं

ताकि कोई बदलाव होने की स्थिति में उनकी धुरी का पहले से पता चल सके।

पृथ्वी पर बड़ा उल्कापिंड गिरने से होता है नुकसान

वैज्ञानिक पहले से ही इस बात की आशंका व्यक्त करते आ रहे हैं कि किसी बड़े आकार के उल्कापिंड के पृथ्वी से आ टकराने का नुकसान बड़ा हो सकता है।

पृथ्वी पर पहले भी ऐसा हो चुका है और शीत युग की समाप्ति का कारण भी

बड़े आकार के उल्कापिंड का टकराना ही था।

जिसकी वजह से पृथ्वी पर से डायनासोरस रातों रात खत्म हो गये थे।

सामान्य से थोड़े बड़े आकार का उल्कापिंड भी जब धरती पर गिरता है तो उसकी गति की वजह से धरती पर करीब 50 मेगाटन बम के जितना असर होता है।

वर्ष 2013 में एक छोटा उल्कापिंड रुस के चेल्याविंस्क में गिरा था।

जिससे करीब एक हजार लोग आस-पास के शीशों के टूटने की वजह से घायल हो गये थे।

नासा के वैज्ञानिकों ने एक खास अंतरिक्ष यान की मदद से इन उल्कापिंडों की नियमित जानकारी देने की भी एक योजना बनायी है।

इसके तहत वर्ष 2016 में छोड़े गये एक अंतरिक्ष यान के उल्कापिंड की धुरी पर आने के बाद ऐसा कर पाना संभव होगा।

इस अंतरिक्ष यान के उल्कापिंड की धुरी पर आगामी 3 दिसंबर को पहुंचने की उम्मीद है।

उसके बाद से यह लगातार एक साल तक उल्कापिंड का पीछा करता रहेगा।

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