Press "Enter" to skip to content

एक औसत आदमी का आधा शरीर तो सिर्फ इसके मुंह में ही समा जाएगा

  • ऑस्ट्रेलिया की नदियों में रहा करता था मगरमच्छ

  • नदियों में रहता था यह प्राणी यानी रिवस बॉस

  • फॉसिलों के आधार पर आकार की गणना हुई है

  • मगरमच्छ की प्रजाति ही सबसे कम बदली है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः एक औसत आदमी को अगर इसने अपने जबड़े में लिया तो आधा आदमी तो सिर्फ

उसके मुंह में ही चला जाता। गनीमत है कि अब इस प्रजाति के बहुत कम मगरमच्छ हैं वे

भी पर्यावरण विशेषज्ञों के संरक्षण में हैं। वैसे यह प्राचीन और विलुप्त प्रजाति का

मगरमच्छ ऑस्ट्रेलिया की नदियो में रहने वाले था। उसके फॉसिल से उसके आकार का

पता चला है। यह किसी बड़े बस के आकार का था।

उसके अवशेषों का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिको ने बताया है कि इस प्रजाति के

मगरमच्छ का मुंह इतना बड़ा था कि एक औसत आदमी का आधा हिस्सा सीधे उसके

अंदर समा जाएगा। इसका पता चलने के बाद वैज्ञानिकों ने इसका नाम रिवर बॉस यानी

नदियों का राजा बताया है। अवशेषों के आधार पर उसके जिस आकार की कल्पना की गयी

है वह किसी बड़े बस के जितना है। इस प्राणी के अवशेष दक्षिण पूर्व क्वींसलैंड के इलाके में

मिले हैं। फॉसिल के अध्ययन से पता चलता है कि यह जीव आज से करीब पांच मिलियन

वर्ष पूर्व पृथ्वी पर रहा करता था। नदियों में रहने वाले इस प्राणी के अवशेष तो पहले ही

मिल गये थे लेकिन वैज्ञानिकों को इन सारे अवशेषों को एक एक कर कड़ी में पिरोने और

उसकी संरचना को समझन मे काफी वक्त लगा है। इसके सर का हिस्सा तो वर्ष 1875 में

ही खोज लिया गया था। स्थानीय भाषा में इसे गूंगारामरांडू माउनाला कहा गया है।जिसका

शाब्दिक अनुवाद नदियों का श्रेष्ठ होता है।  इसी आधार पर उसी वक्त यह अनुमान

लगाया गया था कि एक औसत आदमी के शरीर का आधा हिस्सा उसके जबड़े में ही समा

सकता था।

एक औसत आदमी कद में भी जबड़े में जाने लायक था 

यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्राचीन पृथ्वी से अब तक मगरमच्छ ही ऐसा

प्राणी है, जो बहुत कम बदला है। अलबत्ता उनका आकार अब पहले के मुकाबले छोटा हो

गया है। अब जिस आकार के रिवर बॉस का पता चला है उस काल में मौजूद डायनासोर पर

भी वह हमला कर सकता था। शायद इसी वजह से प्राचीन काल से चली आ रही

दंतकथाओं के हिसाब से ही उसे स्थानीय बोली में रिवर बॉस का नाम दिया गया था। उस

वक्त के ऑस्ट्रेलिया महाद्वीप के इलाकों में यह प्राणी नदियों का सबसे बड़ा जानवर था।

इस बारे में शोध करने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के शोधकर्ताओं ने माना है कि यह

आकार में करीब सात मीटर यानी 23 फीट लंबा होता था। उसका सर ही करीब 80

सेंटीमीटर बड़ा होता था। इसका अर्थ है कि कोई सामान्य इंसान का आधा भाग सीधे उसके

मुंह में समा सकता था। वर्तमान में भी लंबे आकार के मगरमच्छ नजर आते हैं लेकिन

बेहिसाब शिकार और भय की वजह से उनकी कई प्रजातियों और खास कर बड़े आकार के

मगरमच्छों का शिकार हो चुका है। मगरमच्छ का शिकार तस्करों के लिए भी लाभ का

कारोबार है क्योंकि उसका चमड़ा काफी महंगा बिकता है। इसी लोभ में भी लोगों ने बिना

सोचे समझे लाखों मगरमच्छों को मार डाला है। इस विशाल आकार के मगरमच्छ को

टोमिस्टोमा प्रजाति का माना गया है, जो अब विलुप्त हो चुके हैं। उनके नजदीकी

रिश्तेदारों में सिर्फ एक ही इंडोनेशिया के कुछ भागों में पाये जाते हैं, जिनका कड़ाई से

संरक्षण किया जा रहा है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक उस क्षेत्र के उस काल में नदियों

में पाया जाने वाला यह सबसे विशाल आकार का प्राणी है।

उसकी खोपड़ी पर अभी अनुसंधान चल रहा है

यह प्रजाति कहीं और भी थी अथवा नहीं अब तक उसकी पुष्टि नहीं हो पायी है। इस प्राणी

को बेहतर तरीके से समझने के लिए उसके फॉसिल्स के आधार पर वैज्ञानिकों ने एक

कंप्यूटर मॉडल भी तैयार किया है। इसके आधार पर उसके दिमाग की संरचना को समझने

की कोशिश की गयी है। उसके दिमाग में भी अलग अलग खाने बने हुए थे। इसलिए अब

शोध कर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतना बड़ा प्राणी अपने दिमाग का कैसे

इस्तेमाल किया करता था। उसके भोजन के बारे में भी शोध किया गया है। यह समझा

गया है कि नदियों में रहने वाला यह प्राणी खास तौर पर उस काल के बड़े आकार के

कंगारुओं का ही शिकार किया करता था। इसी वजह से यह भी पता चल गया है कि उस

काल में मौजूद कंगारुओं का आकार भी वर्तमान प्रजाति से काफी बड़ा होता था। वैसे

नदियों का यह राजा पानी के पास आने वाले अन्य प्राणियों को भी अपना भोजन बना

लिया करता था। मीठे पानी में रहने वाले इस प्राणी के बारे में स्थानीय बोली में नामकरण

होने से यह समझा जा रहा है कि प्राचीन काल के इंसान जब बोलना सीख गये थे, तब भी

यह प्राणी यहां मौजूद था। इसी वजह से स्थानी भाषा में उसका नामकरण किया गया था।

रिवस बॉस उसी स्थानीय बोली का अनुवाद भर है। आज के दौर के मगरमच्छों का औसत

आकार 17 फीट और वजन एक हजार पाउंड तक होता है। इस लिहाजा से माना जा सकता

है कि बहुत कुछ नहीं बदलने के बाद भी मगरमच्छों का आकार छोटा हुआ है। वैसे निर्जन

इलाके में बड़े आकार के मगरमच्छ अब भी मौजूद हैं, जो कभी कभार छोटी नाव पर

मछली शिकार करने वाले मछुआरों को भी अपना शिकार बना लेते हैं।

Spread the love
More from HomeMore posts in Home »
More from आस्ट्रेलियाMore posts in आस्ट्रेलिया »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from पर्यावरणMore posts in पर्यावरण »

Be First to Comment

... ... ...
error: Content is protected !!
Exit mobile version