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ऑन लाइन पढ़ाई का जोर पर भी सरकार के भी अपने फायदे हैं

ऑन लाइन पढ़ाई का जोर है। स्कूल से लेकर कॉलेज और अनेक प्रवेश एवं अंतिम

परीक्षाओं में भी इसे लागू कर दिया गया है। इसलिए मानना पड़ेगा कि कोरोना ने वाकई

हमारी जिंदगी बदल दी है। कोरोना के वैश्विक संकट के बीच इससे होने वाले फायदों पर

शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा। देश के लिए इन मुद्दों पर ध्यान देने का अभी पर्याप्त

और अनुकूल समय भी है। ऑन लाइन सरकार चलाने का सबसे बड़ा फायदा अफसरों के

हवाई खर्च की कटौती है। हर राज्य को इस मद में कमसे कम लाखों रुपयों की बचत हो

रही है। वरना गाहे बगाहे दिल्ली में बैठक के नाम पर दौरा करने के बहाने किसी रिश्तेदार

अथवा दोस्त के घर के समारोह में शामिल होने की अफसरों ने अपना संवैधानिक

अधिकार समझ लिया था। गनीमत है कि विमान सेवा देने वाली कंपनियों ने अपनी

टिकटों पर से बोनस अंक देना बंद कर दिया। वरना कमसे कम झारखंड के एक दर्जन

अफसर ऐसे हैं जो महंगी टिकटों पर बार बार दिल्ली की यात्रा कर अपने नाम पर बोनस

अंक बटोरते थे और बाद में उन्हीं अंकों के आधार पर मुफ्त या सस्ती टिकट का फायदा

उठाकर सपरिवार घूमने चले जाते थे। कोरोना ने सरकार की इस रफ्तार को थामने का

काम किया है। ऐसा नहीं है कि इसका विकल्प नहीं है। जिस तरीके से ऑन लाइन बढ़ाई हो

रही है, उसकी तरह अब ऑन लाइन बैठकें भी होने लगी हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे

देश से वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए बात चीत कर रहे हैं। जाहिर है कि यह खर्च किसी स्थान

के दौरे के खर्च और वहां होने वाले इंतजाम के खर्च के मुकाबले बहुत कम है।

ऑन लाइन सरकार के हवाई खर्च को कम हुआ है

हर राज्य के पास विमान यात्रा पर होने वाले खर्च का अगर कोई विवरण हो तो पता चल

जाएगा कि ऑन लाइन सरकार चलाने के दौर में इस खर्च में अब तक कितनी बचत हो

चुकी है। इसलिए हम कोरोना संकट को कितना भी कोस लें इस वैश्विक महामारी ने हमें

सरकारी स्तर पर बचत करने या यूं कहें कि फिजूलखर्ची रोकने का नया रास्ता को दिखा

ही दिया है। यह साबित हो चुका है कि दिल्ली मे सारे देश के अफसरों के एकत्रित होने के

बाद सभी अपने अपने कार्यालय से ऑन लाइन रहकर भी सरकार का काम काज चला

सकते हैं। यह अपने आप में समय और खर्च की बचत की स्थिति है। ऊपर से गाहे बगाहे

होने वाले विदेश दौरों पर होने वाला खर्च भी फिलहाल शून्य है। जो कुछ विदेश दौरे हो रहे

हैं, वे शुद्ध तौर पर कूटनीतिक और रक्षा संबंधित हैं, जिन्हें रोका भी नहीं जाना चाहिए।

लेकिन हवाई सेवा के सरकारी इस्तेमाल पर ऑन लाइन सरकार अभी हावी है और यह

रास्ता दिखा रही है कि इसी रास्ते से हम भविष्य में भी सरकारी धन की फिजूलखर्ची रोक

सकते हैं। कमसे कम दिल्ली की बैठक के नाम पर वहां अपने रिश्तेदारों की पार्टियों में

शामिल होने के गोरखधंधे पर भी रोक लगी हुई है। वरना जनता के पैसे पर इस किस्म की

फूटानी की तो अनेक लोगों को आदत ही पड़ गयी थी। ऐसा नहीं है कि ऑन लाइन सरकार

से सिर्फ अफसरों की फिजूलखर्ची रुकी है बल्कि इसके जरिए हर राज्य के दिल्ली स्थिति

अतिथिशाला में होने वाली गड़बड़ी अथवा राज्य के कोष पर महंगे होटलों में अफसरों के

ठहरने का खर्च भी समाप्त हो गया है।

अफसरों के होटल का खर्च भी जनता की बचत है

कुल मिलाकर अगर हम कोरोना काल और उसके पहले के विमान यात्रा और होटल खर्च

को जोड़कर उसकी तुलना करें तो हम पायेंगे कि इस माध्यम से भी हम गैर योजना खर्च में

एक बड़ी रकम बचा सकते हैं। कोरोना ने कमसे कम भय से ही सही लेकिन हमें यह रास्ता

तो दिखा ही दिया है। इसे अगर स्थायी तौर पर लागू किया गया तब भी हर राज्य सरकार

पर निरंतर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा, जिसकी वर्तमान आर्थिक परिस्थिति में

बहुत अधिक आवश्यकता भी है। कोरोना संकट से सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया को

आर्थिक तौर पर जिस तरीके से तबाह कर दिया है, उसके हरेक पैसे की बचत की

अहमियत है। इस परिस्थिति से सबक लेते हुए राज्य सरकारों को इस बारे में अब एक

नीतिगत फैसला ले लेना चाहिए। दूसरी तरफ केंद्र सरकार भी अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को

छोड़कर शेष की बैठक ऑन लाइन कर अपने कोष पर भी पड़ने वाले बोझ को कम कर

सकती है। ऑन लाइन सरकार के संचालन में निश्चित तौर पर स्थापना व्यय कम आता

है। साथ ही बैठक के नाम पर दिल्ली जाकर गायब होने वाले अफसरों को अपने कार्यालय

में हाजिर भी रहना पड़ता है। इससे सरकारी काम धाम कुछ तो हो ही जाता होगा।


 

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