शार्क की नई प्रजाति का पता चला तो सिर्फ मांसाहारी नहीं है

शार्क की नई प्रजाति
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  • समुद्र के अंदर हर किस्म का भोजन करता है

  • दो वि.वि के वैज्ञानिकों ने एक साथ किया प्रयोग

  • पहले प्रयोगशाला में समुद्री घास उगाये गये

  • शार्क पकड़कर उन्हें यह भोजन दिया गया

प्रतिनिधि



नईदिल्लीः शार्क की एक नई प्रजाति का पता चला है। इस प्रजाति के शार्क सिर्फ मांसाहार पर निर्भर नहीं हैं।

यह अपने भोजन का साठ प्रतिशत हिस्सा समुद्र के अंदर के घास-पौधों को खाकर मिटाते हैं। बोनेटहेड प्रजाति के यह शार्क समुद्री जीवों के अलावा अंदर के घास-फूस को भी बड़ी चाव से खाते हैं।

दो विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओ ने शार्क के इस व्यवहार का पता लगाया है। इस शोध में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और फ्लोरिया विश्वविद्यालय के शोध कर्ता एक साथ काम कर रहे थे।

शोध पूरा होने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि यह प्रजाति सिर्फ मांसाहारी है,

यह सोच गलत है क्योंकि शाकाकार में भी शार्क की इस प्रजाति की अच्छी खासी दिलचस्पी देखी गयी है।

इस कारण इस प्रजाति के शार्कों को अब उभय आहारी (ओमनीवोरस) की संज्ञा दी गयी है।

इसके पहले समुद्र में सिर्फ दो प्रजाति का पता चला था।

सिर्फ मांसाहार पर जिंदा रहने वालं को कार्निवोरा और शाकाहार करने वालों को हार्वीवोरा कहा जाता है।

दोनों किस्म का भोजन करने वालों को ही ओमनीवोरा कहा जाता है।

शार्क की यह प्रजाति ओमनीवोरा है

जिस शार्क पर यह शोध किया गया है, उसकी प्रजाति आम तौर पर सामान्य समुद्री इलाके में पायी जाती है और यह आम तौर पर गहरे समुद्र में नहीं जाती है।

मेक्सिको की खाड़ी और पश्चिमी अटलांटिक महासागर में इस प्रजाति के शार्क अधिक पाये जाते हैं।

आम तौर पर इस प्रजाति के शार्क ज्यादा बड़े नहीं होते।

लेकिन वयस्क महिला शार्क की लंबाई अधिक होती है जबकि पुरुष शार्क औसतन पांच फीट लंबे होते हैं।

शोध दल को जब इस प्रजाति के शार्क की इस आदत का पता चला तो उनलोगों ने फ्लोरिया वे से समुद्री घास के नमूने लिये और उन्हें प्रयोगशाला में विकसित किया।

इस समुद्री घास में सोडियर बाईकार्वोनेट पाउडर भी मिलाये गये। इस प्रयोग में समुद्री घास ने इस नये किस्म के जल को भी स्वीकार किया और वह तेजी से बढ़ा।

घास उगाने के बाद शोध दल ने पांच बोनहेड शार्क पकड़े और उन्हें जीवित अवस्था में प्रयोगशाला में लाया गया।

प्रयोगशाला में इन शार्कों को समुद्री घास और स्क्विड (एक किस्म का समुद्री प्राणी) बतौर भोजन दिया गया।

शार्कों के भोजन के पूरे घटनाक्रम के सारे आंकडे निकाले गये।

यह पाया गया कि प्रयोगशाला में तैयार समुद्री घास को भी शार्कों ने अच्छी तरह हजम कर लिया है।

इस क्रम में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस प्रजाति के शार्कों के दांत भी इस किस्म के पौधों को खाने के लायक ही बने हुए हैं।

इन तमाम प्रयोगों के सफल होने के बाद ही इनके बारे में इस नये वैज्ञानिक खोज की जानकारी सार्वजनिक की गयी है।

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