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सरकारी पैनल का दावा अब धीरे धीरे कम होगा कोरोना का प्रकोप

  • तीस प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी विकसित हो गयी

  •  फरवरी तक स्थिति नियंत्रण में होगी

  •  मरीज होंगे पर उनका ईलाज संभव

  •  मजदूरों के जाने से कोई असर नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सरकारी पैनल के स्तर पर पहली बार यह दावा किया गया है कि अब देश में

कोरोना का प्रकोप घट रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले फरवरी माह तक स्थिति

नियंत्रण में आ जाएगी। इसी क्रम में देश की जनता के भीतर एंटीबॉडी विकसित होने का

भी दावा किया गया है। कोरोना वायरस संक्रमण संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए

माना गया है कि देश में इसका कहर सितंबर माह में शीर्ष पर था। इसलिए फरवरी माह के

अंत तक स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में आ जाएगी। उसके बाद भी कोरोना के मरीज

तो पाये जाएंगे लेकिन सरकारी आंकड़ा बहुत कम होने की वजह से उसे नियंत्रित करने में

कोई खास परेशानी नहीं होगी। दूसरी तरफ अन्य चिकित्सा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस

बीच वैक्सिन बाजार में आने की भी पूरी उम्मीद है। लिहाजा वैक्सिन आने के बाद पूरे

विश्व पर मंडरा रहा कोरोना का खतरा बहुत हद तक कम हो जाएगा। लेकिन आज पहली

बार भारतीयों के शरीर में एंटीबॉडी विकसित होने की जानकारी दी गयी है। इस क्रम में

विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस आकलन को सच साबित करने के लिए

कोरोना के गाइड लाइन में उल्लेखित प्रावधानों का सख्ती से पालन जारी रखना होगा।

नियमों का कड़ाई से पालन करते रहना होगा

विशेषज्ञों ने इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते रहने की खास हिदायत दी है। सरकारी

आंकड़ों के आधार पर तैयार वैज्ञानिक मॉडल के आधार पर ही यह निष्कर्ष निकाला गया

है। वैसे इन आंकड़ों पर आधारित निष्कर्ष को औपचारिक तौर पर अगले सप्ताह जारी

किये जाने की उम्मीद है। जिस पैनल ने इसे तैयार किया है, उसने वास्तविक आंकड़ों के

आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है। जिनलोगों के अंदर एंटीबॉडी विकसित होने का दावा

किया गया है, उनमें से काफी लोग अस्पताल में दाखिल हुए थे लेकिन अच्छी बात यह है

कि अनेक लोगों में विकसित एंटीबॉडी की वजह से लोगों को अपने कोरोना पीड़ित होने का

पता भी नहीं चल पाया है। जिस मॉडल पर यह नतीजा निकाला गया है, उसके मुताबिक

अगस्त के अंत तक देश में 14 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी विकसित होने की पुष्टि हुई थी।

सरकारी पैनल के अलावा आईसीएमआर ने भी माना

इसके लिए इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च के आंकड़ों का भी हवाला दिया गया है।

इन विशेषज्ञों ने कहा है कि देश में 106 लाख कोरोना मरीजों के बारे आंकड़े मिले हैं।

इनलोगों का आकलन है कि अगर लॉक डाउन नहीं लगाया गया होता तो भारत में कोरोना

का असर 14 गुणा अधिक हो सकता था। साथ ही विशेषज्ञों ने पहली बार इस तथ्य को भी

स्वीकार किया है कि देश भर से मजदूरों के अपने गांव लौटने की प्रक्रिया से भी कोरोना

संक्रमण के फैलने का कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है।

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