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देश भर के सभी पत्रकारों के इलाज की उचित व्यवस्था के लिए प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

नईदिल्लीः देश भर के सभी पत्रकारों को इलाज की व्यवस्था करने के लिए एनयूजे ने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इसमें मीडियाकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा

देने की मांग की है। एनयूजे-आई के अध्यक्ष रास बिहारी ने इस बारे में प्रधानमंत्री श्री मोदी

को एक पत्र भेजा है। उनका कहना है कि देशभर में कोविड 19 से संक्रमित मीडियाकर्मियों

की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण बड़ी संख्या

में पत्रकार उचित इलाज नहीं करा पा रहे हैं। श्री रास बिहारी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र

लिखकर जानकारी दी है कि इटंरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से संबंद्ध नेशनल

यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) की राज्य इकाइयां अपने-अपने स्तर पर राज्यों में

मीडियाकर्मियों को कोरोना योद्धा का दर्जा दिलाने के लिए अनुरोध कर रही हैं। राजस्थान

सरकार ने पत्रकारों को कोरोना योद्धा का दर्जा देते हुए 50 लाख की सहायता देने की घोषणा

की है। कुछ अन्य सरकारों ने भी इस तरह की घोषणाएं की है। एनयूजे-आई की तरफ से

कहा गया है कि पिछले एक वर्ष से जारी कोरोना महामारी के प्रकोप के दौरान डॉक्टर,

पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस और प्रशासन और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों और

कर्मचारियों की तरह ही मीडियाकर्मी भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। अखबार और चैनल

जनता को महामारी से बचने के उपायों की जानकारी देने के साथ ही तमाम सूचनाएं

उपलब्ध करा रहे हैं। कोरोना महामारी से देशवासियों को बचाने और उपचार के तरीके

बताने में मीडिया एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मीडियाकर्मी अपने दायित्व का

निर्वाह करते हुए प्रशासनिक खामियों को सरकार और जनता के सामने लाते हैं ताकि

समय रहते हुए सुधार किया जा सके।

देश भर में पिछले दो सप्ताह में दो सौ पत्रकारों की जान गयी है

श्री रास बिहारी ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो सप्ताह में देश भर में

लगभग 200 पत्रकारों की जान जाने के समाचार मिले हैं। पिछले वर्ष बड़ी संख्या में

पत्रकार कोरोना का शिकार बने थे। कई वरिष्ठ पत्रकारों की कोरोना के कारण मृत्यु हुई है।

पत्रकारों के निधन के बाद उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई

परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कोरोना काल में तमाम

अखबारों और चैनलों से बड़ी संख्या में पत्रकारों को नौकरी से निकाला गया है। एक

जानकारी के अनुसार 50 हजार से ज्यादा मीडियाकर्मी इस दौरान बेरोजगार हुए हैं। बड़ी

संख्या में मध्यम और लघु समाचार पत्र बंद हो रहे हैं। आर्थिक तौर पर कमजोर अखबारों

और चैनलों के लिए भी केंद्र और राज्य सरकारों को आर्थिक सहयोग के लिए विचार करने

की आवश्यकता है।

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