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परमाणु युद्ध कोई बच्चों का खेल तो नहीं है

परमाणु युद्ध के बारे में किसी न किसी मंच से पाकिस्तान के हुक्मरान बार बार दोहराते रहते हैं।

यही तर्क परोक्ष तौर पर इस बात को साबित करता है कि पाकिस्तान भी अंदर से इस बात को

मानता है कि सामने की लड़ाई में वह भारत से कभी जीत नहीं पायेगा।

लेकिन विश्व की अन्य शक्तियां उसकी अपनी मजबूरियों का फायदा उठाकर उसे भारत के

सामने तने रहने पर विवश करती हैं।

अब नये सिरे से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फिर से इसी परमाणु युद्ध की बात कही है।

यह अच्छी बात है कि पाकिस्तान में भी इस किस्म की बेतूकी बातों की अब आलोचना होने लगी है।

फिर भी यह पूरी दुनिया के लिए विचार का विषय है कि परमाणु हथियार की शक्ति से लैश

देश के नेता अगर बार बार इस किस्म का बयान देते हैं, तो उसकी गंभीरता कितनी है।

इस बात को वैज्ञानिक और समझदार लोग अच्छी तरह समझते हैं कि भारत और पाकिस्तान

के बीच परमाणु युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान पूरी तरह और भारत भी काफी हद तक तबाह हो जाएगा।

लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं होगी।

परमाणु बम का असर सिर्फ दो देशों तक तो सीमित नहीं रहेगा

इस किस्म के परमाणु बम एक तरफ से तो नहीं फोड़े जाएंगे। उसके बाद पूरी दुनिया पर

क्या कुछ प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में अब खास तौर पर पाकिस्तान के हुक्मरानों को

दुनिया की तरफ से समझाने की जरूरत आ पड़ी है।

एक आकलन है कि अगर वाकई ऐसा हा तो इस युद्ध में करीब साढ़े बारह करोड़ लोग

यूं ही एक झटके में मारे जाएंगे।

लेकिन पूरी दुनिया पर इसका जो प्रभाव होगा, वह पृथ्वी पर तबाही ला सकता है,

इस बात को समझने और समझाने की जरूरत है।

भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध छिड़ने पर कम से कम 12.5 करोड़ लोग मारे जाएंगे।

लेकिन परमाणु बम को खराब इसलिए माना जाता है कि सिर्फ विस्फोट होने तक इसका असर

समाप्त नहीं होता है।

वहीं इससे निकले विकिरण से एक दशक तक वैश्विक वायुमंडलीय तबाही जारी रहेगी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से लेकर सेनाध्यक्ष और कई मंत्री तक भारत को परमाणु युद्ध की

धमकी दे चुके हैं।

इमरान खान ने तो हाल में ही हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत को परमाणु युद्ध की

गीदड़ भभकी दी थी।

प्रकाशित साइंस एडवांस के एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इससे सूर्य के प्रकाश में

20 से 35 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।

जिससे धरती का तापमान दो से पांच डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है।

इससे धरती पर हिमयुग आ सकता है।

पृथ्वी पर हिमयुग तक पैदा कर सकता है यह युद्ध

हालांकि भारतीय विशेषज्ञों ने इस तरह के संघर्ष की संभावना से इनकार किया है इस रिपोर्ट में

कहा गया है कि परमाणु युद्ध के हालात में अगर भारत और पाकिस्तान अपने पूरे परमाणु जखीरे

का प्रयोग करते हैं तो इनके विस्फोटों से पैदा हुई आग और धुआं 16 से 36 मिलियन टन

कालिख छोड़ सकता है।

यह कालिख पूरे वातावरण में फैल सकती है जिसके गंभीर परिणाम होंगे। यह कालिख ऊपरी वायुमंडल में फैलकर सोलर रेडिएशन को रोक सकती है।

यह सौर विकिरण को अवशोषित कर पृथ्वी की हवा को गर्म कर देगी जिससे धुआं घुटन पैदा करेगा।

ऐसा माना जाता है कि भारत के पास कुल 110 और पाकिस्तान के पास 130 परमाणु हथियार हैं।

हालांकि, पाकिस्तान तेजी से अपनी परमाणु हथियारों की क्षमता को बढ़ा रहा है।

वैज्ञानिक पहले ही इस संभावित खतरे का पूरा विश्लेषण कर यह बता चुके हैं कि

जिन देशों को भारत और पाकिस्तान के युद्ध से कुछ लेना देना नहीं है,

वे भी इससे अप्रभावित नहीं रह पायेंगे।

हम सभी हिरोशिमा और नगासाकी के अणु बम विस्फोट की तस्वीरों और वीडियो को देख चुके हैं।

परमाणु बम उस जमाने के बम से अधिक शक्ति संपन्न हैं।

लिहाजा इनके विस्फोट से आसमान पर उठने वाला धुआं पूरी दुनिया में फैलेगा।

इस बात को गंभीरता से समझने की जरूरत है।

पाकिस्तान को यह बात अब पूरी दुनिया समझाये

जब एक नहीं कई बम फटेंगे तो भारत और पाकिस्तान की तबाही के अलावा इसकी चपेट में पड़ोसी देशों का आना तो तय है।

लेकिन समझने की जरूरत है कि इस विस्फोट की विभीषिका से अगर हिमालय का क्षेत्र

प्रभावित हुआ तो वहां से निकलने वाली नदियों में जो प्रदूषण और विकिरण शामिल होगा

वह कई सौ वर्षों तक अपनी चपेट में आने वाले इलाकों को बंजर बना देगा।

पूरी दुनिया की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह पाकिस्तान के हुक्मरानों को यह समझाये कि

फिलहाल उसकी जिम्मेदारी अपने देश की जनता को दो वक्त की रोटी और अच्छी जिंदगी देने की है।

आर्थिक बदहाली के दौर से गुजरते पाकिस्तान को परमाणु बम के बदले अपनी जनता की

भलाई के बारे में गंभीरता पूर्वक सोचना चाहिए

क्योंकि परमाणु बम फोड़ देने भर से पाकिस्तान की असली समस्याओं का अंत नहीं होने वाला है।

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