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नोटबंदी जैसी है एनआरसी सिर्फ गरीब भुगतेंगे नुकसान : प्रशांत किशोर

पटनाः नोटबंदी की तरह एनआरसी से भी सिर्फ गरीबों को ही इसका

खामियजा भुगताना होगा। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के समर्थन

देने से पार्टी के नेता प्रशांत किशोर की नाराजगी से मचे घमासान के

बावजूद उनका विरोध कमजोर नहीं पड़ा और आज उन्होंने राष्ट्रीय

नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा

कि इसका सबसे बड़ा खामियाजा गरीबों को भुगतना पड़ेगा।

श्री किशोर ने ट्विटर पर ट्वीट कर कहा, ‘‘पूरे देश में एनआरसी लागू

करने का विचार नागरिकों के लिए नोटबंदी की तरह है। एनआरसी

लागू होने से सबसे अधिक प्रभावित गरीब और समाज के अंतिम

पंक्ति के लोग ही होंगे।’’

जदयू नेता श्री किशोर सीएबी को लोकसभा और राज्यसभा से पारित

कराने के लिए पार्टी के समर्थन देने का लगातार विरोध कर रहे हैं।

इसको लेकर वह जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह, सांसद

आरसीपी सिंह, बिहार के सूचना एंव जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार और

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के निशाने पर भी रहे।

इससे आहत होकर श्री किशोर कल मुख्यमंत्री एवं पार्टी के राष्ट्रीय

अध्यक्ष नीतीश कुमार से मिले और अपने पद से इस्तीफे की पेशकश

भी कर दी। हालांकि श्री कुमार ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया।

मुख्यमंत्री से मिलने के बाद श्री किशोर ने कहा था कि वह अपने स्टैंड

पर कायम हैं। नागरिकता संशोधन कानून पर उनका रुख अभी भी

वही है। इस बारे में वह पहले ही सार्वजनिक रूप से अपनी बात कह

चुके हैं। यह सिर्फ श्री नीतीश कुमार के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए

है। उन्होंने कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के पक्ष

में नहीं हैं। नागरिकता संशोधन कानून के साथ किसी को कोई समस्या

नहीं है लेकिन यह एनआरसी के साथ मिलने पर भेदभावपूर्ण हो जाता

है।’’

नोटबंदी का क्या परिणाम था, यह सभी जानते हैं

इससे पूर्व श्री किशोर ने लोकसभा में सीएबी के जदयू के समर्थन पर

ट्वीट कर कहा था, ‘‘नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन करने

से पहले जदयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में एक बार जरूर सोचना

चाहिए जिन्होंने वर्ष 2015 में उन पर विश्वास और भरोसा जताया था।

हमें नहीं भूलना चाहिए कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत के

लिए जदयू और इसके प्रबंधकों के पास बहुत रास्ते नहीं बचे थे।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इस विधेयक का समर्थन निराशाजनक है, जो

धर्म के आधार पर भेदभाव करता है। यह जदयू के संविधान से मेल

नहीं खाता, जिसके पहले पन्ने पर ही तीन बार धर्मनिरपेक्ष लिखा है।

हम गांधी की विचारधारा पर चलने वाले लोग हैं।’’ श्री किशोर ने

राज्यसभा में भी इस विधेयक को समर्थन दिये जाने पर ट्वीट कर

कहा था, ‘‘संसद में बहुमत कायम रहा। अब न्यायपालिका से परे,

भारत की आत्मा को बचाने की जिम्मेदारी 16 राज्यों के गैर भाजपा

मुख्यमंत्रियों की है क्योंकि ये ऐसे राज्य हैं जहां इस बिल को लागू

करना है। तीन मुख्यमंत्रियों (पंजाब, केरल और पश्चिम) ने सीएबी

और एनआरसी को नकार दिया। अब समय आ गया है कि दूसरे गैर-

भाजपा राज्य के मुख्यमंत्री अपना रुख स्पष्ट करें।’’ वहीं, पार्टी के

सांसद आरसीपी सिंह ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ

ट्वीट करने के कारण श्री किशोर पर तीखा प्रहार करते हुए कहा था कि

सीएबी पर पार्टी का स्टैंड स्पष्ट है और वह मजबूती से उस पर कायम

है। जिन को यह स्वीकार नहीं है वह अपना रास्ता चुनने के लिए

स्वतंत्र हैं। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा था, ‘‘कौन हैं प्रशांत किशोर।

अभी वह किसके लिए काम कर रहे हैं। सभी जानते हैं कि वह

अनुकम्पा पर जदयू में आये हैं। हमारे नेता ने उन्हें इतना बड़ा

सम्मान दिया लेकिन वह क्या कर रहे हैं देखिए।’’

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