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फिर से एनआरसी जिन्न बाहर निकला असम में चुनाव से पहले

  • दस हजार और अपात्र लोगों को हटाया जाएगा

  •  राज्य समन्वयक ने अधिकारियों को लिखा पत्र

  •  भाजपा ने पुन: इसके सत्यापन के मांग की

  •  पिछले एनआरसी का विवाद अब तक जारी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: फिर से एनआरसी का जिन्न ठीक चुनाव से पहले असम में बोतल से बाहर

निकल आया है। असम के दशकों पुराने घाव के दर्द के नौ महीने बाद और असम में

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स की अंतिम सूची के साथ खून फिर से खुल गया। जो

लगभग 19 लाख लोगों को छोड़ दिया गया था। यह अब तक प्रमाणित नहीं हो पाया है।

भारत सरकार भी शायद अपनी ही बात को भूला चुकी थी। 19.07 लाख लोग अपने

भविष्य को लेकर चिंतित, लटके और अनिश्चित रहे हैं।इस बीच, भारत राष्ट्रव्यापी

नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के साथ गहरी बेचैनी

और अब, उन सभी कोरोनरी वायरस महामारी का सबसे बड़ा खतरा है।इसको लेकर

जिन्होंने असम के आघात को फिर से जीवित किया था, सर्वोच्च न्यायालय, राजनीतिक

दल, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन – आगे बढ़ चुके हैं। एनआरसी अंतिम सूची पिछले वर्ष

के अगस्त 2019 में प्रचारित की गई थी। प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से 19

लाख से अधिक लोग बाहर गया था ।. इन लोगों की नागरिकता अब सवालों में है.

अनुमानों के मुताबिक़ नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी से बाहर रखे गए लोगों में

हिंदुओं और मुसलमानों की तादाद लगभग बराबर था और इनमें अधिकतर बांग्लादेशी

मूल के थे। प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक के क़ानून बनने पर हिंदू अवैध

प्रवासियों को तो भारतीय नागरिकता मिलने का रास्ता खुल जाएगा लेकिन मुसलमान

इसके दायरे से बाहर रहेंगे। मानवाधिकार कार्यकर्ता सवाल करते हैं कि इससे मुसलमानों

की एक बड़ी आबादी स्टेटलेस हो जाएगी। इस समय असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

एनआरसी की अंतिम सूची से 10 हजार अपात्र लोगों और उनके वंशजों के नाम हटाए

जाएंगे। एनआरसी के राज्य समन्वयक हितेश देव सरमा ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं।

फिर से एनआरसी का विवाद क्योंकि नाम हटाने की चर्चा

सरमा ने इन लोगों के नाम हटाने के लिए सभी उप आयुक्तों और जिला नागरिक

पंजीकरण पंजीयक को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है, आप लोगों की तरफ से मिली रिपोर्ट

के मुताबिक डीएफ (घोषित विदेशी)/डीवी (घोषित मतदाता)/पीएफटी (विदेशी अधिकरण

में लंबित) श्रेणी के अपात्र लोगों और उनके वंशजों के नाम एनआरसी में पाए गए हैं।

उन्होंने इन सभी अधिकारियों से इन लोगों की पहचान करने और उनके नाम एनआरसी

से हटाने के लिए आदेश जारी करने को कहा है।सरमा ने इससे संबंधित नियमों और खंडों

का स्पष्ट करते हुए कहा है कि अंतिम एनआरसी के प्रकाशन से पहले संबंधित प्राधिकारी

किसी भी व्यक्ति के नाम को हटा और शामिल कर सकता है। असम के लिए अंतिम

एनआरसी को पिछले साल अगस्त में सार्वजनिक किया गया था। लेकिन भारत के

महापंजीयक की तरफ से अभी इसे अधिसूचित नहीं किया गया है और इसकी वजह से

इसकी कोई आधिकारिक वैधता नहीं है। सरमा ने नाम हटाने के उचित कारणों को भी

स्पष्ट करने को कहा है। इसके लिए ऐसे सभी लोगों की सही पहचान करने के लिए

अनिवार्य रूप से सत्यापन कराने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद

नहीं पैदा हो। हालांकि, सरमा ने अपने पत्र में यह नहीं कहा है कि कितने लोगों के नाम

हटाए जाएंगे। लेकिन इस मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि करीब 10 हजार लोगों की

पहचान की गई है, जिनके नाम गलत तरीके से अंतिम एनआरसी में शामिल किए गए थे।

इसके पहले भी एनआरसी के मुद्दे पर हो चुका है घपला

वहीं सूत्रों ने बताया कि इसमें सभी समुदाय के लोग शामिल हैं। दूसरी ओर, असम में

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर राजनीति

करने और भ्रम पैदा करने में लगी हुई है। असम भाजपा के अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने

आज कहा कि अगर (एनआरसी) में पुन: सत्यापन अभ्यास में विसंगतियां पाई जाती हैं,

तो असम सरकार को नए एनआरसी लाने के लिए जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।असम

सरकार ने असम की सीमावर्ती बांग्लादेश के जिलों में अंतिम एनआरसी में शामिल नामों

का 20% नमूना पुनः सत्यापन की मांग की थी।


 

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