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एनपीआर पुराने प्रारूप के अनुसार ही होगा, एनआरसी अनावश्यक : नीतीश

पटनाः एनपीआर के मुद्दे पर नीतीश कुमार ने साफ कर दिया है कि बिहार में यह पुराने

स्वरुप में ही होगा। श्री कुमार ने आज विधानसभा में राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी)

को अनावश्यक बताया और कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) के वर्तमान

प्रारूप से भविष्य में एनआरसी के लागू होने पर कुछ लोगों को खतरा उत्पन्न होगा, इसे

देखते हुए उनकी सरकार ने एनपीआर 2010 के पुराने प्रारूप के आधार पर ही कराने के

लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। श्री कुमार ने विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी

प्रसाद यादव के नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), एनआरसी और एनपीआर पर सदन

में विशेष विमर्श के लिए दिए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव के मंजूर होने के बाद करीब एक घंटे

तक हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सात अक्टूबर 2019 को भारत सरकार के

रजिस्ट्रार सह जनगणना आयुक्त की ओर से बिहार सरकार को एनपीआर के संबंध में

एक पत्र भेजा गया था। इससे पहले 15 मई 2010 से 15 जून 2010 के बीच एनपीआर

कराया गया था और इसके बाद वर्ष 2015 में भी इस पर कुछ काम हुआ था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार 2020 में जो एनपीआर कराने के लिए पत्र भेजा गया है

उसके प्रारूप में कुछ अन्य सूचनाओं को एकत्र करने की बात है। वर्ष 2010 के एनपीआर में

थर्ड जेंडर को शामिल नहीं था लेकिन इस बार इसमें थर्ड जेंडर को जोड़ा गया है। इसके

अलावा माता-पिता का नाम, उनकी जन्मतिथि, उनका जन्म और मृत्यु का स्थान आदि

की भी जानकारी मांगी गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी हर किसी को नहीं

है। वह भी अपने माता-पिता के संबंध में ऐसी जानकारी से अनजान है।

एनपीआर पुराने प्रारूप से भविष्य के खतरे टल जाएंगे

श्री कुमार ने कहा कि एनपीआर 2020 में माता-पिता के संबंध में पूछी गई जानकारी

उपलब्ध नहीं होने पर उसके आगे इनवर्टेड कॉमा के अंदर छोटी लकीर खींच कर छोड़ देना

है। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में एनआरसी के लागू होने पर खतरा उत्पन्न होगा

इसलिए उनकी सरकार ने भारत सरकार के रजिस्ट्रार सह जनगणना आयुक्त को 15

फरवरी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि एनपीआर में थर्ड जेंडर को जोड़ने के अलावा

अन्य नए प्रश्नों को शामिल नहीं किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नये प्रारूप वाले एनपीआर 2020 के संबंध में अभी तक केन्द्र की ओर

से औपचारिक अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 07 अक्टूबर 2019

को केंद्र सरकार के रजिस्ट्रार सह जनगणना आयुक्त की ओर से बिहार सरकार को

एनपीआर के संबंध में जो पत्र भेजा गया था उसके आलोक में राज्य में 15 मई से 15 जून

2020 तक एनपीआर के कार्य के लिए अधिसूचना उनकी सरकार की ओर से जारी की गयी

है लेकिन इसमें कहीं यह नहीं है कि इसे नये प्रारूप के आधार पर कराया जायेगा। श्री

कुमार ने कहा कि उनकी सरकार ने केन्द्र को पत्र लिखकर 2010 के पुराने प्रारूप के

अनुसार ही एनपीआर कराने का आग्रह किया है। वह चाहते हैं कि सदन से इस संबंध में

एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केन्द्र को भेजा जाये। उन्होंने कहा कि दोनों सदनों से

18 फरवरी 2019 को 2021 में जातीय आधार पर जनगणना कराने का सर्वसम्मत प्रस्ताव

पारित कराया गया था।

नीतीश चाहते हैं कि फिर से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजें

वह चाहते हैं कि इस संबंध में भी एक बार फिर से प्रस्ताव पारित कराकर केन्द्र सरकार को

भेजा जाये। मुख्यमंत्री ने एनआरसी की चर्चा करते हुए कहा कि इसकी कोई आवश्यकता

नहीं है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 दिसम्बर 2019 को स्पष्ट करते हुए कहा था,

‘‘उनकी सरकार बनने के बाद से आज तक एनआरसी पर कभी कोई चर्चा तक नहीं हुई है।

इसे सिर्फ उच्चतम न्यायालय के कहने पर असम के लिए करना पड़ा। एनआरसी जो अभी

कहीं है ही नहीं, कोई मसौदा नहीं बना, मंत्रिमंडल में आया नहीं, जिसके लिए अभी तक

नियम-कायदे भी नहीं बने, उसे लेकर हौवा बनाया जा रहा है। यह सिर्फ असम के लिए है

और इसको लेकर बेवजह का हौवा खड़ा किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि नागरिकता

संशोधन कानून 2003 में ही एनआरसी की बात थी।

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