fbpx Press "Enter" to skip to content

अब कोरोना से बचाव के लिए अनुशासन भी जरूरी है

रांचीः अब कोरोना से बचाव के लिए थोड़ी गंभीरता और अनुशासन जरूरी है। यूं तो हम

भारतीयों की यह आदत ही है कि गंभीर से गंभीर चुनौती को हम हंसते खेलते टाल जाते हैं।

लेकिन चूंकि यह कोरोना सिर्फ इंसान नहीं बल्कि अर्थनीति को भी बीमार कर सकता है।

इसलिए अनुशासन जरूरी है। यह आम उत्तर भारत के आचरण की कमी है कि हम बिना

भय के खुद को अनुशासित ही नहीं रख पाते हैं। इस स्थिति को हम किसी भी टिकट की

खिड़की अथवा लाइन लगाने वाली जगह पर देख सकते हैं। डंडा पड़ने का खतरा न हो तो

हम अनुशासित रहकर यह काम कर भी नहीं सकते। लेकिन चूंकि चुनौती गंभीर है तो ऐसे

अवसरों पर गंभीरता का परिचय देना भी जरूरी है। इस बात को समझने के लिए सबसे

पहले हमें कोरोना वायरस के वैश्विक परिदृश्य को समझ लेना चाहिए। जॉन हॉपकिंग्स

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर वर्तमान परिदृश्य को

संकलित किया है। इससे समझा जा सकता है कि चंद नियमों के पालन से इसे और फैलने

से निश्चित तौर पर रोका जा सकता है। वैसे यह पिछले नौ मार्च के आंकड़े हैं। जिसके बाद

दुनिया में कोरोना से प्रसार और मौत के आंकड़े और बदल चुके हैं। (देखें चित्र)

इस बात को समझने के लिए हमें अपने से ज्यादा विकसित देशों की स्थिति पर गौर कर लेना चाहिए।

यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह जान लेना उचित होगा कि इन देशों में चिकित्सा सुविधा भारतवर्ष से ज्यादा बेहतर है।

वहां संसाधन भी अधिक है। दूसरी तरफ अधिक और घनी आबादी वाले इलाकों की वजह से भारत में

इसका प्रसार अपेक्षाकृत तेजी से हो सकता है।

अब कोरोना से बचाव के पहले आंकड़े भी समझ लें

देश- शहर प्रथम चरण द्वितीय चरण तृतीय चरण चतुर्थ चरण पांचवा चरण
इटली 3 152 1036 6362 21157
ईरान 2 43 245 4747 12729
फ्रांस 12 191 653 4499  
स्पेन 8 674 6043    
न्यूयार्क 2 105 613    
भारत 3 24 105    

पिछले सप्ताह के इन आंकड़ों से यह अच्छी तरह समझा जा सकता है कि अब कोरोना से

बचाव के लिए अगले दो सप्ताह भारत के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होंगे। इस चुनौती से

निपटने के सबसे आसान तरीका है कि हम नियमों का अनुशासन पूर्वक पालन करें ताकि

हम खुद को अब कोरोना से बचाव के लिए तैयार करें। साथ ही अपने अपने दायरे में

लोगों को इसके प्रभाव से बचा सकें और दूसरों तक वायरस फैलने से भी रोक सकें। मौत

के आंकड़े बताते हैं कि मौत का खतरा सबसे अधिक अधिक उम्र के लोगों को है। देश अभी

कोरोना वायरस के प्रसार के तीसरे चरण में पहुंचा है। यहां से उसका प्रसार निश्चित तौर

पर अधिक सामाजिक गतिविधियों और भीड़ भाड़ की वजह से होना तय है। यह मानकर

चलिए कि जहां तक इसका प्रसार हो चुका है, उनके परिणाम इस सप्ताह देखने को

मिलेंगे। लेकिन यह और आगे बढ़ने से रुक जाए इसके लिए हम सभी को अपनी अपनी

जिम्मेदारी निभानी है। दूसरों को देखकर सबस सीखना बुद्धिमानी है। हम इटली की

स्थिति को देख रहे हैं जहां प्रारंभिक चेतावनियों को नजरअंदाज किये जाने का क्या कुछ

परिणाम हुआ है। चूंकि भारतवर्ष अधिक आबादी वाला देश है इसलिए यह तय मानिये से

अनुशासन से बाहर जाने की स्थिति में भारत में इससे पीड़ित होने वालों की संख्या हजारों

में नहीं फिर लाखों तक पहुंच जाएगा। इसलिए सावधानी और अनुशासन जरूरी है।

सरकार के भरोसे इसे छोड़ना मुर्खता नहीं राष्ट्रद्रोह भी

सरकार के स्तर पर बचाव के हर संभव प्रयास किये गये हैं। इसके बाद की जिम्मेदारी

सिर्फ नागरिकों को बनती है। जो अपने प्रयास से इसे और फैलने से रोक सकते हैं। उत्सव,

पार्टी और सामाजिक आयोजन बाद में भी हो सकते हैं। एक समारोह के नाम पर फिर से

अन्य लोग इसकी चपेट में आ जाए, यह बुद्धिमानी नहीं है। जैसे कि वैज्ञानिकों ने पहले ही

बताया है तो हमें तापमान के और ऊपर जाने तक की प्रतीक्षा धैर्य और अनुशासन के साथ

कर लेना चाहिए। यही असली राष्ट्रभक्ति है। हमलोगों की जरा सी चूक उन तमाम लोगों

के प्रयास और परिश्रम पर पानी फेर सकता है जो दिन रात एक कर कोरोना वायरस को

फैलने से रोकने के लिए काम कर रहे है । साथ ही ऐसी राष्ट्रीय आपदा जैसी स्थिति के

वक्त भी मुनाफा लूटने की सोच रखने वालों को कठोर दंड दिये जाने की जरूरत है।

जिन्होंने इस चुनौती के दौरान आवश्यक सामानों के दाम बढ़ाकर मौत का सौदागर बनने

का काम किया है। झारखंड के देवघर में ऐसे एक सौदागर पर कार्रवाई हुई है। यह अपने

आप में राष्ट्रद्रोह जैसा कृत्य है। जिसे सामाजिक तौर पर भी स्वीकार नहीं किया जाना

चाहिए।

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from देशMore posts in देश »

Be First to Comment

Leave a Reply

Open chat
Powered by