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निजी विमानों के उपयोग पर अब प्रतिबंध लगाने की मांग तेज होने लगी

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  • अपनी रईसी के लिए दुनिया को खतरे में डालने का विरोध

  • समान पर अत्यधिक प्रदूषण फैलाता है विमान

  • दुनिया के दूसरे लोगों का जीवन खतरे में पड़ा है

  • प्राकृतिक संसाधन पर पैसे से अधिकार नहीं होगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः निजी विमानों के उपयोग पर अब प्रतिबंध लगाने की मांग तेज होने लगी है।




दरअसल जिस तरीके से पूरी दुनिया में मौसम का बदलाव देखने को मिल रहा है, उसके

बाद लोग इसे नियम को कड़ाई से लागू करने की बात करने लगे हैं। जानकार लोगों की

दलील है कि सिर्फ अपने फायदे के लिए पूरी दुनिया के पर्यावरण को और अधिक नुकसान

पहुंचाने की छूट अब किसी को नहीं दी जा सकती है। इन विमानों के उड़ने से भी उससे

निकलने वाले धुआं से पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। इसलिए अगर निजी विमानों

और खासकर जेट विमानों के उड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया तो यह इस नुकसान को

काफी हद तक कम कर सकता है। पर्यावरण संरक्षण पर वैश्विक नेताओं की जारी बैठकों

के बीच ही यह मांग अचानक से तेजी से उभरी है। इसमें दलील दी जा रही है कि दुनिया के

पर्यावरण पर हर किसी का बराबर का हक है। इसलिए जिसके पास अधिक पैसा है, उसे

अपने शौक को पूरा करने के लिए दूसरे को नुकसान पहुंचाने की इजाजत अब नहीं दी जा

सकती। निजी विमानों का इस्तेमाल रोककर ऐसे प्रमुख लोगों को अब सार्वजनिक विमान

सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे दुनिया पर जो खतरा मंडरा रहा है, वह काफी हद

तक कम होगा क्योंकि इन विमानों से उड़ने के दौरान जो धुआं आसमान पर निकलता है,

वह भी ग्रीन हाउस गैसों की स्थिति को तेजी से बिगाड़ रहा है। यह बवंडर तब उठ खड़ा

हुआ है जब ग्लासगो में होने वाले सम्मेलन में कमसे कम दो निजी एयरपोर्टों पर निजी

विमान उतारने का इंतजाम किये जाने की सूचना है।

निजी विमानों की उड़ान रोकने से प्रदूषण काफी कम होगा

ग्लोबल जस्टिज से प्रमुख नेता डेनियल विलिस ने इस किस्म के सम्मेलन में भी निजी

विमान से आने को महज एक धोखा बताया है। उनके तथा अन्य पर्यावरण संरक्षणवादियों

के मुताबिक ऐसी बैठकों का कोई फायदा ही नहीं है जहां लोग जानते हुए भी अपने लाभ या

रईसी के लिए दूसरों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। वैसे इस संबंध में अमेरिकी

राष्ट्रपति जो बाइडन ने पहले ही निजी विमानों पर प्रतिबंध लगाने के लिए इसे एक सही

अवसर बताया है। दुनिया के अनेक धनकुबेर अब निजी विमानों से ही यात्रा करते हैं।

लेकिन इन निजी विमानों से आसमान पर उड़ने से जो प्रदूषण फैलता है, उस बारे में उनका




कोई आकलन नहीं है। वर्ष 2020 में इस पर एक सर्वेक्षण भी किया गया था। जिसमें पाया

गया था कि दुनिया में वर्ष 2016 में जो कॉर्बन प्रदूषण फैला था, उसमें 34 मिलियन का

योगदान इन निजी विमानों का ही था। निजी विमानों का यह प्रदूषण कई छोटे देशों के

प्रदूषण से अधिक है। वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक मात्र चार घंटे के निजी विमान के

उड़ान में जो ग्रीनहाउस गैस निकलता है वह यूरोप के हर नागरिक के साल भर के कार्बन से

ज्यादा है। पर्यावरण संरक्षणवादियों का तर्क है कि इतना अधिक प्रदूषण चंद लोग ही फैला

रहे हैं जबकि इसका कहर पूरी दुनिया को झेलना पड़ रहा है। इसलिए अब उन चंद लोगों

को निजी विमानों में सफर करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए। चूंकि हवाई सफर में कम

समय लगता है इसलिए ऐसे लोग अब सार्वजनिक विमान सेवाओं का इस्तेमाल करें और

दुनिया को बिना गलती की सजा भुगताने से मुक्त करें।

अन्य लोग इस गलती की सजा क्यों भुगतें

अनेक इलाकों में बेमौसम बारिश, अति वर्षा तथा ग्रीनलैंड सहित बर्फ वाले इलाकों से तेजी

से बर्फ का पिघलना पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। साथ में दलील यह

भी दी जा रही है कि अपनी आर्थिक हैसियत का लाभ ऐसे धनकुबेर दूसरे तरीके से लें

जिसमें दुनिया की अन्य आबादी, जिसमें इंसान सहित अन्य जीव भी शामिल हैं, को कोई

नुकसान नहीं हो। अपने पैसे के बल पर प्राकृतिक संसाधनों को बिगाड़ने का अधिकार पैसे

वालों के पास नहीं है। जरूरी काम के लिए वे सार्वजनिक विमान सेवा का उपयोग कर ही

सकते हैं। इस संबंध में बताया गया है कि दुनिया के निजी विमानों में से 69 प्रतिशत तो

उत्तरी अमेरिका के इलाके में है। इसलिए अगर निजी विमानों के नियमित उड़ान पर

प्रतिबंध लगा तो दुनिया में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आयेगी। जिससे बिगड़ते

मौसम और पर्यावरण को सुधारने में उल्लेखनीय मदद मिल सकती है। यह दलील दी गयी

है कि अवकाश मनाने के लिए निजी विमानो का उपयोग दुनिया के दूसरे लोगों पर कितना

संकट ला चुका है, इस बात को समझते हुए अब कड़ाई करने का वक्त आ चुका है।

 



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