नागरिकता बिल के भारत कहना क्या चाहता हैः शेख हसीना

नागरिकता बिल के भारत कहना क्या चाहता हैः शेख हसीना
Spread the love
  • 3
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
    3
    Shares

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः नागरिकता बिल पर असम में जारी विवाद के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी इस प्रस्तावित नागरिकता बिल पर सवाल उठा दिये हैं।

उन्होंने साफ कहा है कि इस बिल को लाने का भारत का मकसद क्या है। उनके इस बयान की राजनीतिक प्रतिक्रिया यहां हुई है।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बिल को लाने का जो असली मकसद समझ में आता है, उसके मुताबिक अन्य पड़ोसी देशों में धार्मिक भेदभाव से पीड़ित लोगों को भारत शरण देना चाहता है।

भारत की सरकार शायद राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा प्रचार कर रही है और यह शुद्ध तौर पर वोट हासिल करने का खेल भर है।

शेख हसीना ने साफ किया कि जहां तक बांग्लादेश का सवाल है तो यहां ऐसी कोई स्थिति नहीं हैं, जिसमें लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हों।

थोड़ी बहुत हिंसा अगर होती भी है तो वह भारत के मुकाबले कम है और यहां की मुख्य धारा की राजनीति में सभी धर्मों के लोगों का बराबर का सम्मान है। सामाजिक तौर पर भी किसी को कोई दिक्कत नहीं है।

उन्होंने स्वीकार किया कि बांग्लादेश में कुछ ऐसी घटनाएं घटी जरूर थी लेकिन सरकार ने तुरंत ही कठोर कार्रवाई की है।

नागरिकता बिल पर भारत में भी अनेक लोग नाखुश हैं

वैसे उनके मुताबिक जहां तक उनक समझ है तो भारत के अंदर भी इस बिल को लेकर अनेक लोग खुश नहीं है।

इसलिए भारत सरकार को अपना कोई भी फैसला लागू करने से पहले फिर से सोच लेना चाहिए

क्योंकि कोई निर्णय यदि देश के अंदर तनाव पैदा करता है तो यह अच्छी बात नहीं होती।

आतंकवाद के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत अकेला इससे पीड़ित नहीं है।

खुद बांग्लादेश में भी आतंकवादी घटनाएं हुई हैं। यह अब एक वैश्विक समस्या बन चुकी है।

उन्होंने इस आरोप पर भी सफाई दी कि असम सहित पड़ोसी इलाकों में बम विस्फोट और आतंकवादी घटनाओं में बांग्लादेश के लोगों के शामिल होने की सूचना के बाद उनकी सरकार ने कड़े कदम उठाये हैं।

इसके बाद देश के अंदर इस किस्म की आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वाले संगठनों और लोगों पर शिकंजा भी कसा गया है।

अब कमसे कम कोई यह आरोप नहीं लगा सकता कि भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को बांग्लादेश में संरक्षण प्राप्त है।

इसलिए पुलवामा की घटना में मारे गये लोगों के परिवारों के प्रति पूरी सहानुभूति होने के बाद भी

भारत को अपने तनाव फैलाने वाले निर्णयों पर दोबारा विचार कर लेना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.