नैनोबोट यानी जेनेटिक रोबोट से ईलाज की तैयारी जेनेटिक चिकित्सा में प्रगति

नैनोबोट यानी जेनेटिक रोबोट से ईलाज की तैयारी जेनेटिक चिकित्सा में प्रगति
  • जेनेटिक रोबोट शरीर के अंदर करेंगे ईलाज

  • शरीर में प्रवेश के बाद अलग अलग काम करेंगे

  • बदल जाएगी पूरी दुनिया की चिकित्सा पद्धति

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नैनोबोट आपके शरीर के अंदर की बीमारियों का खुद ही ईलाज करेंगे।

चिकित्सा विज्ञान में यह तकनीक शीघ्र ही लागू होने वाला है।

परीक्षण में प्रारंभिक सफलता मिलने के बाद इसे और अधिक विकसित और सुरक्षित करने पर निरंतर काम चल रहा है।

जेनेटिक वैज्ञानिकों ने इन्हें सर्जिकल नैनोबोट का नाम दिया है।

इसका नाम सर्जरी दिये जाने के बाद भी दरअसल इस सर्जरी में डाक्टर मरीज के शरीर पर कोई चीर-फाड़ नहीं करते।

एक खास विधि से तैयार जीनों के एक समूह को एकसाथ शरीर के अंदर प्रवेश करा दिया जाता है।

यह जीन समूह ही नैनोबोट कहलाते हैं।

इन समूहों को पहले से ही इस बात का निर्देश होता है कि शरीर के अंदर प्रवेश करने के बाद

उन्हें शरीर के किस हिस्से में पहुंचना है और क्या क्या काम करना है।

शरीर के अंदर पहुंचने के बाद यह जीन समूह जरूरत के हिसाब से अलग अलग छोटे समूहों में बंट जाता है

और अपने अपने गंतव्य की तरफ बढ़ जाता है।

नैनोबोट खास हिस्से तक पहुंचकर अपना काम प्रारंभ करेगा

इस जीन को जिस काम का निर्देश दिया होता है, वह शरीर के उस खास अंग तक पहुंचने के बाद अपना काम प्रारंभ करता है।

इसी जीन थेरैपी के माध्यम से आंतरिक बीमारियों को ठीक करने में प्रारंभिक सफलता मिल चुकी है।

वर्ष 2015 में फ्लाइजर पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ इडो बैचलेट ने इसपर लगातार शोध और अनुसंधान किया है।

देखे इस  बारे में उनका वीडियो

उन्होंने इस किस्म के ईलाज की एक जीन श्रृंखला तैयार करने में भी सफलता पायी है।

उन्होंने शरीर में मौजूद डीएनए अणुओं को खास तौर पर निर्देशित कर खास काम के लिए

उन्हें तैयार करने का परीक्षण किया है, जो सफल रहा है।

अब इन्हीं जीन समूहों के माध्यम से वह शरीर के अंदर इन जीनों की सक्रियता के माध्यम से

अलग अलग बीमारियों का ईलाज एक बार करने की दिशा में परीक्षण कर रहे हैं।

इस परीक्षण को पशुओं और खासकर चूहों पर सफलतापूर्वक आजमाया जा चुका है।

समझा जा रहा है कि इस विधि के और सफल और सुरक्षित प्रमाणित होने के बाद

शरीर की अनेक असाध्य बीमारियों को भी ठीक किया जा सकेगा।

इसके साथ ही पूरी दुनिया में चिकित्सा की पद्धति में भी बदलाव आ जाएगा।

सुरक्षा संबंधी प्रावधानों की जांच करने के बाद अगले वर्ष से इनका इंसानों पर भी परीक्षण प्रारंभ होगा, जो वर्ष 2022 तक चलेगा।

सब ठीक अगर ठीक रहा तो वर्ष 2025 तक यह चिकित्सा पद्धति पूरी दुनिया में लागू कर दी जाएगी।

उसके बाद शायद इसी पद्धति से शरीर के खराब पड़ चुके अंगों को भी दोबारा से बनाने का काम प्रारंभ होगा।

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