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अब मिडिल क्लास भी गरीब हो चुके हैं सरकार मदद करे

  • छह महीने की तंगी ने सब कुछ बदल कर रख दिया

  • बिहार सरकार और केंद्र सरकार त्वरित काम करे

  • कोरोना के मुकाबले अब भूखमरी अधिक बड़ी चुनौती

दीपक नौरंगी

भागलपुरः अब मिडिल क्लास का परिवार भी वास्तव में गरीबों की श्रेणी में आ गया है।

बकरीद के मौके पर अपनी राय देने वाले लोगों ने कमोबेशी यही विचार व्यक्त किया।

वीडियो में देखिये लोगों ने क्या कहा आखिर

इनलोगों ने कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच बिहार सरकार से बार बार यह

अनुरोध ही किया कि सरकार गरीबों पर कमसे कम इतना ध्यान दे कि अब भूखमरी की

नौबत नहीं आये। रोजगार और कारोबार बंद होने की वजह से आर्थिक संकट गहराया हुआ

है। ऐसे में लगातार कोरोना संक्रमण भी फैलता ही जा रहा है। ऐसे में राज्य और केंद्र

सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करे।

अब मिडिल क्लास भी जूझ रहा है गरीबी से

इस मौके पर भागलपुर के परिचित समाजसेवी सलाउद्दीन जी ने साफ तौर पर कहा कि हर

घर के अंदर अब एक जैसा ही संकट है। सभी के आर्थिक संसाधन तेजी से घट चुके हैं। वैसे

भी बिहार कई अन्य राज्यों की तुलना में पहले से ही गरीब राज्य हैं और यहां के अधिक

लोग औसतन अधिक गरीब हैं।  यहां तक कि जो मध्यमवर्गीय परिवार था वह भी लॉक

डाउन की वजह से अब गरीबी रेखा से नीचे आ चुका है। ऐसे में हर घर में अब दो वक्त की

रोटी का सवाल सबसे अहम मुद्दा है। उन्होंने कहा कि लोगों के पास न तो रोजगार है और

न ही कारोबार बचा है। ऐसे में तो सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों को

राहत पहुचांने की दिशा में त्वरित कार्रवाई करे। पूरे समाज की स्थिति दरअसल क्या है,

यह अब किसी से छिपी हुई बात नहीं है। इसलिए अगर राशन कार्ड भी लोगों का बनना है

तो उसमें भी जल्दबाजी हो। इसका मकसद यही हो कि जिनलोगों के समक्ष भोजन का

भीषण संकट है, उस संकट को दूर किया जाए। वरना कोरोना के बदले अगर लोग भूख से

मर गये तो इससे बुरी बात कुछ और नहीं होगी।

वहां के ईमाम ने तीन दिवसीय पर्व की जानकारी दी

भागलपुर के ईमाम ने इस मौके पर कहा कि बकरीद के बाद तीन दिन के पर्व के दौरान भी

लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने भी यही बात कही कि अभी जो संकट

है, वह दो वक्त की रोटी का है। उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का

उपयोग तो हो रहा है। लेकिन लोगों को दो वक्त की रोटी का इंतजाम तो सरकार को ही

करना होगा। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि आम लोगों की कमाई के सारे रास्ते ही बंद हो चुके

हैं। लिहाजा सरकार को सभी के लिए भोजन का इंतजाम तो करना ही चाहिए।


 

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