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पूर्व सीएम जीतन राम मांझी मंत्री मुकेश साहनी के पक्ष में आए




  • कहा सामंतों के पेट में हो रहा है दर्द

  • सीएम जता चुके हैं अपनी नाराजगी

  • मांझी भी अपने दामाद को बना चुके हैं पीए

  • निषाद के बेटा को मंत्री बनने पर हो रही परेशानी

राष्ट्रीय खबर

पटना : पूर्व सीएम जीतन राम मांझी अब खुलकर मंत्री मुकेश साहनी के पक्ष में खड़े हो




गए हैं। यहां तक कि उनके द्वारा किए गए नाजायज कार्यों का भी समर्थन करने लगे हैं।

मांझी को इस बात का जरा भी एतराज नहीं है कि मुकेश साहनी अवैध रूप से अपने भाई

को मंत्री बनाकर राजनीति सरकारी कार्यक्रमों में भेज रहे हैं। बल्कि मांझी ट्वीट करके

उनके इस कदम को सही ठहराने में लगे हैं । इससे मुख्यमंत्री के समक्ष दोहरी परेशानी

खड़ी हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में करारी हार झेल चुके और नीतीश

कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद विधान पार्षद बने मुकेश सहनी ने भाई को

अपनी जगह मंत्री बनाकर भेजना शुरू कर दिया। मुकेश सहनी पटना में मंत्री बन बैठे थे

और हमशक्ल भाई को फिल्ड में मंत्री बनाकर भेज रहे थे। मामला सामने आने के बाद

मुकेश सहनी के साथ-साथ सीएम नीतीश की भारी किरकिरी हो रही है। मंत्री सहनी ने

सीधे मुख्यमंत्री की भद्द पिटवा दी है। विपक्ष मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री के इस्तीफे की

मांग कर रहा है। मुकेश सहनी की करनी का सत्ता पक्ष भी खुल कर बचाव नहीं कर पा

रहा। खुद मुख्यमंत्री ने कह दिया कि किसी मंत्री को यह अधिकार नहीं कि वो सरकारी

कार्यक्रम में अपनी जगह परिवार या पार्टी के किसी नेता को भेजे। लेकिन पूर्व सीएम और

एनडीए के सहयोगी जीतनराम मांझी को इसमें गलत नहीं दिखता। आखिर उन्हें गलत

दिखे भी तो कैसे? मुख्यमंत्री रहते उन्होंने भी तो ऐसा ही काम किया था।

पूर्व सीएम ने खुद भी अपने दामाद को पीए रख लिया था

खुलासे के बाद मांझी ने कहा था कि हमने नहीं बल्कि कैबिनेट सेक्रेटारियट की गलती से

हमारा दामाद मुख्यमंत्री का पीए बन गया। 2014 लोकसभा चुनाव में जेडीयू को मिली

करारी हार के बाद नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

मुख्यमंत्री कैबिनेट के सहयोगी जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी बना मुख्यमंत्री

की कुर्सी पर बिठा दिया था। मांझी 20 मई 2014 को बिहार के 23 वें मुख्यमंत्री बन गए।




इसके बाद जीतनराम मांझी ने अपने दामाद देवेन्द्र मांझी को अपना यानी मुख्यमंत्री का

पीए बना लिया। कुछ दिनों तक तो मामले का खुलासा नहीं हुआ। लेकिन नवंबर 2014 के

पहले हफ्ते में ही मांझी का भांडा फूट गया और हकीकत सामने आ गई। इस तरह से

तत्कालीन सीएम मांझी की पोल-पट्टी खुल गई। मांझी की हुई भारी बेइज्जती तब जाकर

दामाद को हटाया था। सरकार का स्पष्ट आदेश है कि कोई भी मंत्री या खुद मुख्यमंत्री भी

अपने खास रिश्तेदार को पीए नहीं बना सकते। वर्ष 2000 में ही राबड़ी देवी के शासनकाल

में यह नियम बना था। यही नियम 2014 में मांझी के गले की फांस बन गई और इसमें

बिहार के मुख्यमंत्री ही फंस गये। मामले का खुलासा होने के बाद बिहार में राजनीतिक

बवाल बढ़ गया। विवाद बढ़ता देख तत्कालीन सीएम मांझी को मजबूर होकर मुख्यमंत्री के

पर्सनल असिस्टेंट पद से दामाद देवेन्द्र मांझी को हटाना पड़ा था। दामाद प्रेम की वजह से

तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की भारी बेइज्जती हुई थी।

इस बार सत्ताधारी गठबंधन बैकफुट पर है

इस बार सत्ताधारी जेडीयू-बीजेपी बैकफुट पर है। वहीं एनडीए की सहयोगी हम के राष्ट्रीय

अध्यक्ष व पूर्व सीएम जिन्होंने मुख्यमंत्री रहते अपने दामाद को पीए बना लिया था वे

खुलकर सहनी के समर्थन में उतर गये हैं। उन्होंने कहा कि हद हो गई राजनीति की, कोई

मछली बेचने वाले निषाद परिवार का बच्चा अपने मेहनत से मंत्री बन गया तो सूबे के

तथाकथित राज परिवार के लोगों के पेट में दर्द होने लगा है। मंत्री होकर भी अपनी गलती

के लिए माफ़ी माँगने वाले मुकेश सहनी तारीफ के काबिल हैं। पूरा बिहार सन आफ

मल्लाह के साथ है। कहां कि मुकेश साहनी के मंत्री बनने से सामंतों के पेट में दर्द हो रहा

है। मांझी के इस बयान की भी काफी आलोचना हो रही है। देखना है अब मुख्यमंत्री उनके

इस बयान के बाद क्या स्टैंड लेते हैं।



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