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पाकिस्तान के बाद अफगानिस्तान भी एचआइवी की चपेट में

  • वहां के सात हजार से अधिक लोग इस वायरस से पीड़ित
  • पाकिस्तान से भी आया है यहां संक्रमण
  • पाकिस्तान में इंजेक्शन से फैली है बीमारी
  • देश में आधिकारिक तौर पर 2883 मरीज
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः पाकिस्तान के बाद अब अफगानिस्तान भी जानलेवा बीमारी एचआइवी

वायरस की चपेट में आ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का

खुलासा किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान में हाल ही में हुई जांच के

दौरान 72 सौ ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें यह बीमारी है।

इस बीमारी के वहां पैर पसारने के बाद अब युद्ध स्तर पर वहां जनजागरण का अभियान

चलाया जा रहा है। इसका मकसद लोगों को इस बीमारी से बचाव के लिए दिमागी तौर पर

जागरूक बनाना है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पाकिस्तान में भी इस बीमारी के पैर

पसाने की जानकारी सामने आयी है।

वहां भी लोगों में इस बीमारी के बारे में कम जानकारी होने की वजह से लोगों के अलावा

बच्चों तक में इसका संक्रमण फैल गया है। दरअसल कुछ मामलों में पाकिस्तान के बच्चों

में यह बीमारी सिर्फ संक्रमण वाले इंजेक्शन के बार बार इस्तेमाल  की वजह से हुआ है।

विश्व एड्स दिवस के मौके पर डब्ल्यूएचओ ने अफगानिस्तान में इस बीमारी को और

अधिक फैलने से रोकने  के लिए लोगों को इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी देने

की बात कही है।

अफगानिस्तान की एक स्थानीय मीडिया में इस बात का खुलासा किया गया है।

इसके तहत अधिकांश मरीजों को अपने संक्रमित होने का पता भी नहीं है।

उनमें एचआइवी वायरस होने के पता चलने के बाद उसके कारणों की तलाश की जा

रही है। प्रारंभिक शोध का निष्कर्ष है कि कई मामलों में लोग पाकिस्तान से अपने साथ

यह संक्रमण लेकर आये हैं। अब वहां से यह बीमारी ईलाज की वजह से आयी है अथवा

उसके कोई और भी कारण हैं, इसकी भी जांच की जा रही है। लेकिन इन्हीं संक्रमित लोगों

की वजह से अफगानिस्तान में इस बीमारी से पैर पसारा है।

पाकिस्तान के बाद अफगानिस्तान में भी वही गलती दोहरायी गयी

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में वर्तमान में अफगान

स्वास्थ्य मंत्रालय के पास 2883 के पंजीकृत मरीज हैं। लेकिन जांच के दौरान अधिक

लोगों में यह संक्रमण पाये जाने की वजह से यह बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अफगानिस्तान की स्वास्थ्य उप मंत्री फिदा मोहम्मद

पैकन ने कहा है कि डब्ल्यू एच ओ की रिपोर्ट एक आकलन भर है। लेकिन सरकार के पास

आधिकारिक तौर पर एडस के रोगियों का आंकड़ा है। पिछले साल इस संबंध में 183 नये

मामले दर्ज किये गये थे। लेकिन इस बार यह आंकड़ा घटकर 150 रह गया है। इससे

स्थिति में सुधार होने का निष्कर्ष निकाला जा सकता है। वैसे रिपोर्ट आने के  बाद सरकार

ने भी अपनी तरफ से इस विषय पर ध्यान देने की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है।

सरकारी स्तर पर भी नये सिरे से पूरी स्थिति की समीक्षा की जा रही है ताकि यह पता

लगाया जा सके कि इस किस्म की जानलेवा बीमारी की चपेट में आये मरीज अगर

सरकारी आंकड़ों से बाहर हैं, तो उन्हें इसमें पंजीकृत किया जा सके। लेकिन सरकार भी

यह मानती है कि इस काम को बहुत सावधानी के साथ किया जाना है। क्योंकि इस किस्म

की बीमारी से पीड़ित रोगी की पहचान होने की स्थिति में ऐसे लोगों को सामाजिक उपेक्षा

और तिरस्कार का दंश झेलना पड़ता है।

एडस पीड़ित मरीजों को सामाजिक तिरस्कार की भी परेशानी

इस बीमारी से पीड़ित कई मरीजों ने इस सामाजिक उपेक्षा की शिकायत की है। एडस से

पीड़ित एक रोगी मोहम्मद इदरीस ने कहा कि एक संक्रमण वाले इंजेक्शन की वजह से

उसे यह बीमारी लगी है। लेकिन जब कभी किसी मरीज को एडस होने का खुलासा हो

जाता है तो पूरा समाज उसे तिरस्कार की दृष्टि से देखने लगता है। एक अन्य मरीज उमर

ने कहा कि हम किसी अस्पताल में जाकर अगर सच्चाई बताते हैं तो अस्पताल वाले

भी ईलाज से इंकार कर देते हैं। इससे और अधिक परेशानी होती है। उल्लेखनीय है कि

पाकिस्तान के लरकाना इलाके में इसी किस्म से इंजेक्शन के संक्रमण की वजह से अनेक

बच्चे नाहक ही इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ गये हैं। जिसके बारे में चल रही जांच

से इस बात के संकेत मिले हैं कि इन बच्चों और अन्य मरीजों को यह बीमारी किसी

सरकारी अस्पताल में सूई के संक्रमण की वजह से हुई है। इस काम को किसी जानकार

डाक्टर अथवा स्वास्थ्य कर्मी ने ही अंजाम दिया है।

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