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कोरोना के बहाने पत्रकारों की छंटनी के खिलाफ याचिका पर केंद्र को नोटिस

नयी दिल्ली : कोरोना के बहाने अपनी नौकरियों से हटाये गये पत्रकारों के मुद्दे पर उच्चतम

न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं अन्य को नोटिस जारी किये। न्यायमूर्ति एन वी रमन,

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की खंडपीठ ने नेशनल

एलायंस ऑफ जर्नलिस्ट्स, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स तथा बृहन् मुंबई यूनियन

ऑफ जर्नलिस्ट्स की याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, इंडियन न्यूजपेपर्स

एसोसिएशन और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में

जवाब देने को कहा है। सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ

अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने अपनी दलीलें रखीं, जिस पर न्यायमूर्ति कौल ने कहा

कि इस मामले में नोटिस जारी किया जा सकता है। लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार

मेहता ने न्यायालय से नोटिस जारी न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मुझे याचिका

की प्रति दी जाये। हम अपना जवाब देंगे। न्यायालय ने कहा, हर तरह की यूनियन लोगों

को नौकरी से हटाये जाने, बगैर वेतन छुट्टी पर भेजने, वेतन में कटौती जैसे मुद्दे उठा रही

है। व्यापार लगभग बंद है। इस मामले में पर सुनवाई जरूरी है। इसलिए नोटिस जारी

किया जाता है, जिस पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देना होगा। उच्चतम न्यायालय ने

राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बहाने पत्रकारों को जबरन छुट्टी पर भेजने, वेतन भत्तों में कटौती

और नौकरी से निकाले जाने की कथित घटनाओं के खिलाफ याचिका पर केंद्र सरकार एवं

अन्य को सोमवार को नोटिस जारी किये। न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति संजय

किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, इंडियन न्यूजपेपर्स

एसोसिएशन और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में

जवाब देने को कहा है।

कोरोना के बहाने छंटनी प्रधानमंत्री की अपील का उल्लंघन

सुनवाई की शुरुआत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस

ने अपनी दलीलें रखीं, जिस पर न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि इस मामले में नोटिस जारी

किया जा सकता है। लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय से नोटिस जारी

न करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, मुझे याचिका की प्रति दी जाये। हम अपना जवाब

देंगे। न्यायालय ने कहा, कोरोना के बहाने हर तरह की यूनियन लोगों को नौकरी से हटाये

जाने, बगैर वेतन छुट्टी पर भेजने, वेतन में कटौती जैसे मुद्दे उठा रही है।

व्यापार लगभग बंद है। इस मामले में पर सुनवाई जरूरी है।

इसलिए नोटिस जारी किया जाता है, जिस पर दो सप्ताह के

भीतर जवाब देना होगा। गौरतलब है कि नेशनल एलायंस ऑफ जर्नलिस्ट्स, दिल्ली

यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स तथा बृहन्मुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स ने शीर्ष अदालत में

जनहित याचिका दायर करके इस मामले में हस्तक्षेप करने का उससे अनुरोध किया है।

संयुक्त रूप से दायर इस रिट याचिका में मीडिया संगठनों ने कहा है कि राष्ट्रव्यापी

लॉकडाउन के बहाने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडियाकर्मियों को जबरन छुट्टी पर भेजने

वेतन भत्तों में कटौती करने तथा नौकरी से निकाले जाने का मीडिया संगठनों का

एकतरफा निर्णय अनुचित और गैरकानूनी है। याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार, इंडियन

न्यूजपेपर्स सोसायटी और न्यूज बोर्डकास्टर्स एसोसिएशन को प्रतिवादी बनाया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्राइवेट मीडिया संगठनों ने पत्रकारों को हटाने और वेतन

भत्तों में कटौती करने का फैसला लेकर मानवता को ही नहीं शर्मसार किया है बल्कि

किसी को भी नौकरी से ना निकालने या वेतन में कटौती ना करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र

मोदी की अपील का भी उल्लंघन किया है।


 

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