सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक ने कहा हिंदुत्ववादी ताकतें विवि को बर्बाद करने में लगी हैं

सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक
Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

नयी दिल्ली: सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक ने कहा है कि

नयी आर्थिक नीति के बाद उच्च शिक्षा को निजीकरण और व्यापारीकरण के हवाले कर दिया गया है

जिसके कारण उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई

और अब हिंदुत्ववादी ताकतों ने सरकारी विश्वविद्यालयों को लगातार बर्बाद करने की कोशिश की है

जिसका शिकार आज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) हो रहा है।

श्री पटनायक ने आज यहाँ प्रेस क्लब में जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय शिक्षक संघ द्वारा

उच्च शिक्षा के संकट पर आयोजित एक सेमिनार में यह बात कही।

सेमिनार में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जयती घोष, जाने माने समाज शास्त्री अभिजित पाठक, मशहूर पत्रकार पी साईनाथ,

नीरा चन्दोक, निवेदिता मेनन, अतुल सूद, समेत कई शिक्षाशास्त्री और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया।

सरकार संसाधनों में कमी का गलत बहाना बना रही है

जेएनयू के विजिटिंग प्रोफेसर श्री पटनायक ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि

सरकार संसाधनों की कमी का बहाना बना कर देश में उच्च शिक्षा का निजीकरण कर रही है

जबकि हकीकत यह है कि शिक्षा पर लगने वाले उप कर का खर्च भी वह नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत करों के जरिये सबसे कम राजस्व प्राप्त करता है,

इसलिए फंड की कमी का बहाना बेकार तर्क है।

उन्होंने कहा कि अमरीका के कई विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय चंदे और ट्रस्ट के रूप में चलते हैं

लेकिन भारत में निजी विश्वविद्यालयों को मुनाफा कमाने की छुट है।

हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में छात्रों की फीस और व्यक्ति की आय से पांच गुणा का अंतर है जबकि भारत में व्यक्ति की आय की तुलना में इतनी ऊंची फीस है कि यह अंतर तीस गुणा है।

श्री पटनायक ने कहा कि हिंदुत्व वादी ताकतों ने देश के विश्वविद्यालयों में विचार तर्क और असहमति को खत्म करने का सुनियोजित अभियान शुरू कर दिया है

और विश्वद्यालयों में वित्तीय पूंजीवाद तथा बाज़ार के अनुरूप ऐसे छात्रों को पैदा किया जा रहा है

जो भारतीय प्रबंधन संस्थाओं से पास होकर एक करोड़ रुपये की नौकरी पा रही हैं

जिनमें सामाजिक जिम्मेदारी की कोई भावना नही रह गयी हैं।

जवाहरलाल नेहरु विश्वद्यालय में समाज शास्त्र के प्रोफेसर अभिजीत पाठक ने कहा कि

उच्च शिक्षा के निजीकरण के कारण छात्रों को केवल बाज़ार के अनुरूप शिक्षा दी जा रही है

तथा समाज विज्ञानं एवं कला और मानविकी की उपेक्षा की जा रही है

जिसके कारण विश्वविद्यालयों से अराजनीतिक छात्र निकल रहे है

जो अपने समाज और देश के लिए संवेदनशील नही है।

सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री के अलावा भी कई विद्वानों ने अपनी बात रखी

विश्वविद्यालयों को शौपिंग माल की तरह बनाया जा रहा है और असहमति एवं तर्क को ध्वस्त कर

भय और अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है।

अर्थशास्त्र की प्रोफेसर जयती घोष ने कहा कि विश्वविद्यालय का काम देश में एक ऐसा नागरिक बनाना है

विवेकवान और तार्किक हो लेकिन अब तो विश्वद्यालयों में प्रश्न पूछने और बहस करने की इज़ाज़त नहीं दी जा रही

और एक अधिनायकवादी माहौल बनाया जा रहा है।

विधि एवं सुशां विभाग की प्रोफेसर नीरजा गोपाल ज्याल ने कहा कि

उच्च शिक्षा के 78 प्रतिशत छात्र सरकारी विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में हैं

और सत्तर प्रतिशत पीएचडी हो रही है लेकिन निजी विश्वविद्यालय में केवल 19 प्रतिशत पीएचडी हो रही है

तो सरकार निजी विश्वविद्यालयों को क्यों बढ़ावा दी रही है। उ

न्होंने कहा कि जब तक विश्वविद्यालयों में अकेडमिक आज़ादी नही होगी छात्रों को कोई ज्ञान प्राप्त नही होगा।

प्रसिद्ध राजनीति शास्त्री एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में की अवकाश प्राप्त प्रोफेसर नीरा चन्दोक ने

व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि आज कल कुलपति से अधिक योग्य शिक्षक है और चुनाव अधिकारी से अधिक योग्य

छात्र नेता, इसी से अनुमान लगाया जा सकता कि देश में उच्च शिक्षा का भविष्य कैसा है?

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.