नोटबंदी से लगातार तीसरे महीने गिरी वाहनों की बिक्री

  • 5.48 प्रतिशत घटी थी नवंबर में बिक्री
  • 18.66 प्रतिशत बिक्री घटी थी दिसंबर में

नयी दिल्ली : वाहन उद्योग पर नोटबंदी का असर जनवरी में भी जारी रहा और घरेलू बाजार में कुल बिक्री 4.71 प्रतिशत घटकर 15,20,045 इकाई रह गयी। पिछले साल जनवरी में यह आंकड़ा 17,00,141 रहा था। यह लगातार तीसरा महीना है जब वाहनों की बिक्री में गिरावट देखी गयी है। नवंबर में बिक्री 5.48 प्रतिशत घटी थी जबकि दिसंबर में इसमें 16 साल की सबसे तेज गिरावट रही थी और यह 18.66 प्रतिशत घटकर 12,21,929 इकाई रह गयी थी।

वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने आज यहां जनवरी के आंकड़े जारी करते हुये कहा कि गिरावट मुख्य रूप से दुपहिया वाहनों की ब्रिकी घटने के कारण आयी है। यात्री वाहनों, जिनमें कार, उपयोगी वाहन और वैन शामिल हैं, की बिक्री 14.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ वापस पटरी पर आ गयी है जिससे पता चलता है कि ग्राहकों की धारणा सुधर रही है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का असर अस्थायी था जो अब घटता हुआ दिख रहा है। यदि फरवरी और मार्च में बिक्री सही रही तो पूरे वित्त वर्ष के दौरान यात्री वाहनों की बिक्री में दहाई अंक की वृद्धि दर देखी जा सकती है।

वित्त वर्ष के पहले 10 महीने में अप्रैल 2016 से जनवरी 2017 तक यह दर 9.17 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में कारों की बिक्री 10.83 प्रतिशत बढ़कर 1,86,523 पर पहुंच गयी। उपयोगी वाहनों की बिक्री 24.47 प्रतिशत बढ़कर 62,264 इकाई तथा वैनों की 21.65 फीसदी बढ़कर 16,533 इकाई हो गयी। ग्रामीण इलाकों में नकदी की किल्लत ज्यादा होने के कारण दुपहिया वाहनों की बिक्री 7.39 प्रतिशत घटकर 12,62,141 रह गयी। इसमें स्कूटर की बिक्री 14.50 प्रतिशत तथा मोटरसाइकिलों की 6.07 प्रतिशत गिरकर क्रमश: 3,73,382 इकाई तथा 8,19,386 इकाई रही। श्री माथुर ने कहा कि दुपहिया वाहनों की बिक्री जनवरी में कमजोर जरूर रही, लेकिन दिसंबर की तुलना में इसमें भी सुधार देखा गया है। दिसंबर में इसमें 22.04 प्रतिशत की गिरावट आयी थी।

वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री बढ़ी

जनवरी में मध्यम तथा भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 0.61 प्रतिशत बढ़कर 28,704 इकाई रही। श्री माथुर ने कहा कि इस श्रेणी में सुधार दिखा है तथा अगले दो महीने में इसका भी प्रदर्शन अच्छा रहने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले आम तौर पर इनकी बिक्री बढ़ जाती है। बस निर्माता कंपनियों की कुछ स्थानीय निकायों तथा राज्य परिवहन निगमों से बातचीत चल रही है, जो फरवरी-मार्च में बिक्री में बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि हल्के वाणिज्यिक वाहन तथा तिपहिया वाहनों की श्रेणी चिंता का विषय बने हुये हैं। जनवरी में इनकी बिक्री क्रमश: 1.86 प्रतिशत घटकर 32,535 इकाई तथा 28.21 फीसदी गिरकर 31,345 इकाई रह गयी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता मांग के कमजोर बने रहने तथा इन वाहनों की बिक्री के लिए वित्त पोषण की दर काफी ऊंची रहने से इनकी बिक्री रफ्तार नहीं पकड़ पा रही।

दुपहिया वाहनों का निर्यात हुआ कम

दुपहिया वाहनों का निर्यात भी कमजोर बना हुआ है जिससे वाहनों का कुल निर्यात 7.67 प्रतिशत घटकर 2,55,301 इकाई रह गया। मोटरसाइकिलों का निर्यात 11.29 फीसदी की गिरावट के साथ 1,54,998 पर तथा स्कूटी का 5.13 प्रतिशत घटकर 20,885 इकाई पर आ गया। दुपहिया वाहनों का कुल निर्यात 9.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,78,395 इकाई रहा। वहीं, यात्री वाहनों का निर्यात 15.45 प्रतिशत बढ़कर 45,588 पर तथा मध्यम एवं भारी वाणिज्यिक वाहनों का 37.48 प्रतिशत बढ़कर 4,310 पर पहुँच गया। हल्के वाणिज्यिक वाहनों के निर्यात में 13.54 फीसदी तथा तिपहिया वाहनों में 24.79 फीसदी की गिरावट रही।

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