Press "Enter" to skip to content

भाजपा क्या सरकारी एजेंसियां भी अब पीछे हटती नजर आने लगी हैं




चुनावी चकल्लस

पीयूष जैन ने अदालत से अपना पैसा भी वापस मांग लिया
घटनाक्रम बताते हैं कि उल्टे व्यक्ति पर छापा पड़ा गया है
सपा के बदले भाजपा के पी जैन जाल में फंस गये
दुबई से लाया गया अवैध सोना क्या कहता है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भाजपा क्या अब तो सरकारी एजेंसियां भी इत्र कारोबारी के यहां हुई छापामारी से पीछा छुड़ाती हुई नजर आने लगी हैं। वैसे इन दिनों पीयूष जैन का नाम हर किसी की जुबान पर है। इस इत्र कारोबारी के कानपुर-कन्नौज के घर पर 194 करोड़ कैश, 64 किलो सोना, 600 लीटर चंदन के तेल जैसी तमाम चीजें बरामद हुई हैं।




तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच पीयूष जैन ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीयूष ने गुहार लगाई है कि डायरेक्टजरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) 52 करोड़ रुपए काटकर बाकी धन उसे वापस कर दे। मिली जानकारी के अनुसार पीयूष जैन ने अपने बयान में कबूल किया है उसने तीन कंपनियां बनाई थीं।

उन कंपनियों के जरिए चार साल में गुप्ता रूप से पान मसाला कम्पाेउंड बेचा था। टैक्स चोरी के मकसद से उनसे रकम जमा की। इस पर कुल 32 करोड़ रुपए का टैक्स बनता है। पैनल्टी मिलाकल 52 करोड़ रुपए की देनदारी बनती है।

196 करोड़ मिलने के बाद पीयूष जैन ने अपना मुंह नहीं खोला है कि असल में पैसा किसका है। डीजीजीआई रिपोर्ट के मुताबिक पीयूष ने बयान दिया है कि वह सबकुछ भूल गया है। उसने कहा, 196 करोड़ रुपये मेरे हैं, आपने मुझे गिरफ्तार कर लिया है।

लेकिन यह स्पष्ट होता जा रहा है कि यह पी जैन सपा वाला पी जैन नहीं होने की बात सामने आने के बाद से ही सरकारी एजेंसियां पीछे हट रही हैं। नतीजा है कि तस्करी के सोने की खेप पीयूष के घर में देखकर डीजीजीआई की टीम ने ये केस डीआरआई को ट्रांसफर कर दिया।

भाजपा क्या इस गलत छापामारी का शिकार हो गयी

अब डीआरआई गोल्ड स्मगलिंग के एंगल से इसकी जांच करेगी। डीआरआई की टीम ये भी पता लगाएगी कि क्या इसके पीछे कोई गोल्ड स्मगलिंग सिंडिकेट है? क्या इस सोने पर कस्टम ड्यूटी चुकाई गई? इस सोने को खरीदा कहां से जाता था। दूसरी तरफ भाजपा क्या अब सरकारी एजेंसियां भी इस मुद्दे पर आगे बढ़कर औपचारिक तौर पर कुछ कहने से भागती नजर आ रही हैं।

घटनाक्रम बताते हैं कि दरअसल यह तैयारी सपा के पुष्पराज जैन के यहां छापा मारने की थी। इसके लिए आयकर विभाग ने एक की बर्ड अंग्रेजी शब्द पी को ट्रेस किया। दरअसल पुष्पराज जैन और पीयूष जैन दोनों में यह अंग्रेजी का की बर्ड पी आता था।




शायद इसी वजह से अथवा किसी साजिश के तहत सपा के इत्र वाले पुष्पराज जैन के बदले इस छापा को पीयूष जैन की तरफ मोड़ दिया गया, जो भाजपा क्या सरकारी एजेंसियों के लिए भी गले की हड्डी बन चुका है। इनकम टैक्स की टीम पहले पी. जैन के यहां रेड डालने निकली थी, लेकिन पहुंच गई दूसरे पी. जैन के यहां।

टीम की इसी एक गलती ने देश के सबसे बड़ी रेड को उजागर कर दिया। कानपुर में पीयूष जैन के घर 23 दिसंबर को DGGI (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस) और इनकम टैक्स ने छापा मारा। यहां अकूत संपत्ति मिलने के बाद पीयूष जैन के कन्नौज स्थित घर पर भी छापेमारी हुई।

अंदरखाने से पी जैन के नाम से गड़बड़ी का अंदेशा

कई दिनों तक चली कार्रवाई में दोनों घरों से कुल 194 करोड़ रुपए कैश और 23 किलो सोना, 600 लीटर चंदन का तेल मिला। खबरें सामने आईं कि ये वही पी. जैन है, जिन्होंने सपा इत्र बनाया था। लेकिन बाद में बात गलत निकली कि ये पीयूष जैन है, जो सपा का नेता नहीं है।

इत्र बनाने वाले पी. जैन के पहले नाम का पहला अक्षर पी. और सरनेम जैन है। दोनों कन्नौज में एक ही गली में रहते हैं। लेकिन, जिस जैन के घर छापा पड़ा वो सपा इत्र बनाने वाले नहीं थे। इनका नाम पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी था। लेकिन, जिस पी. जैन के घर इनकम टैक्स का छापा पड़ा, वो पीयूष जैन हैं।

सपा का इत्र बनाने वाले से पीयूष जैन का कोई लेना देना नहीं है। छापामारी होने के तुरंत बाद खुद प्रधानमंत्री ने यूपी में भ्रष्टाचार के इत्र का उल्लेख कर दिया। यानी वह भी असली घटनाक्रमों से वाकिफ नहीं थे। पी. जैन के घर छापा पड़ने के बाद 28 दिसंबर को ही उन्नाव में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर पलटवार किया।

बोले कि भाजपा का असली निशाना पुष्पराज उर्फ पम्पी जैन थे। हमारे एमएलसी पुष्पराज जैन ने समाजवादी पार्टी नाम से इत्र बनाया था। भाजपा ने अपने पीयूष जैन के घर छापा डलवाया। अब इस छापामारी में असली मसला जो फंस गया है वह आबूधाबी के सोने के बिस्किट हैं। यह माल भारत के सरकारी एजेंसी के माध्यम से नहीं आता है। फिर यह माल पीयूष के पास कैसे पहुंचा, यह बड़ा सवाल बन गया है।



More from HomeMore posts in Home »
More from उत्तरप्रदेशMore posts in उत्तरप्रदेश »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

Be First to Comment

Leave a Reply

%d bloggers like this: