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उत्तर पूर्वांचल के आतंकवादियों को उकसाता जा रहा है चीन

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दो दिवसीय उत्तर पूर्व यात्रा

  • शांति वार्ता में अब भी कई राजनीतिक पेंच फंसे हुए हैं

  • पड़ोसी राज्यों के आपसी संबंधों का सुधरना भी जरूरी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: उत्तर पूर्वांचल के आतंकवादी समूहों को चीन उकसाता जा रहा है। इन उग्रवादी

संगठनों को चीन की तरफ से हथियार भी उपलब्ध कराये जा रहे हैं। इस वजह से नागा

शांति समझौता और पेचिदा होता चला जा रहा है। देश के सबसे बड़े उग्रवादी संगठन

एनएससीएन (आई-एम) और केंद्र सरकार ने ठीक 23 साल पहले वर्ष 1997 में युद्धविराम

समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट

यानी समझौते के प्रारूप पर हस्ताक्षर करने के बाद शांति प्रक्रिया के मंजिल तक पहुंचने

की कुछ उम्मीद जरूर पैदा हुई थी। बावजूद उसके इस प्रक्रिया में अकसर गतिरोध पैदा

होते रहे हैं। एनएससीएन (आई-एम) ने राज्यपाल और शांति प्रक्रिया में मध्यस्थ आरएन

रवि की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए उन पर इस प्रक्रिया को पटरी से उतारने का

प्रयास करने का आरोप लगाया है और केंद्र से उनकी जगह कोई दूसरा मध्यस्थ नियुक्त

करने की मांग की है। दरअसल, संगठन की नाराजगी इस साल बीते अक्टूबर में रवि की

टिप्पणियों से उपजी है। तब रवि ने राज्य सरकार को पत्र भेज कर संगठन पर अवैध

गतिविधियों और वसूली में शामिल होने का आरोप लगाया था। इसके बाद, चीन सभी

उत्तर पूर्वांचल में आतंकवादियों द्वारा एक बुरी स्थिति पैदा कर रहा है, स्थिति दिन-

प्रतिदिन खराब होती जा रही है। इस दौरान,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस महीने के

तीसरे सप्ताह में उत्तर पूर्व मुख्य रूप से असम, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रांत

का दौरा कर सकते हैं ताकि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नागा मुद्दे पर चर्चा की जा सके।

उत्तर पूर्वांचल के तमाम घटनाक्रमों पर गृह मंत्रालय की नजर

गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने आज यह जानकारी दी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि

नागालैंड के राज्यपाल आरएन रवि के साथ भारत-नागा राजनीतिक समझौते को फिर से

अंतिम रूप देने के लिए, तीसरे लोगों को दायित्व दिया जा सकता है। भारत सरकार द्वारा

नियुक्त किए जाने वाले तीसरे लोगों में असम के वरिष्ठ मंत्री, नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक

अलायंस के संयोजक हिमंत बिस्वा सरमा भी हो सकते हैं। हालांकि, असम के मंत्री हिमंत

बिस्वा सरमा ने पिछले हफ्ते में नागालैंड के मुख्यमंत्री नीफियू रियो के साथ सरकारी पर

एक-‘क्लोज-डोर’ बैठक की थी। उत्तर पूर्वांचल की इसी मीटिंग के बारे में कई तरह के

कयास लगाए जा रहे हैं। वैसे तो बताया जा रहा है कि मीटिंग में उग्रवाद प्रभावित नगालैंड

के इलाकों के बारे में बात हुई है। हिमंत बिस्वा सरमा ने ‘बंद दरवाजे की बैठक’ को एक

शिष्टाचार मुलाकात बताया और दावा किया कि बैठक में कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई थी।

विस्वा सरमा की पहल पर जारी है अटकलबाजी का दौर

वैसे नागालैंड में मुख्यमंत्री कार्यालय में अधिकारियों ने ‘बंद दरवाजे की बैठक’ के बारे में

पुष्टि की है, इस बैठक का एजेंडा चर्चा को सार्वजनिक नहीं किया गया है। वैसे एक सवाल

सभी के मन में है कि क्या हिमंत बिस्वा सरमा नई दिल्ली द्वारा नागा राजनीतिक मुद्दे को

सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभाने में लगे हुए हैं? जैसे की हम जानते हैं कि हिमंत बिस्वा

सरमा को उत्तर पूर्वांचल में उनके समस्या निवारण कौशल के लिए जाने जाते है,

नागालैंड के राजनीतिक डोमेन में लोगों ने उनके नागा शांति प्रक्रिया में शामिल होने की

संभावना के बारे में अनुमान लगाना शुरू कर दिया है। नागालैंड के मुख्यमंत्री नीफिउ रियो

के नेतृत्व वाली सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि शाह की मणिपुर यात्रा की भूमिका के

तौर पर असम के वित्त और स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिसवा सरमा ने दो दिन पहले कोहिमा

का दौरा किया और मुख्यमंत्री के साथ एक मैराथन बैठक की


 

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