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पूर्वोत्तर भारत में हथियारो की तस्करी का झारखंडी कनेक्शन भी साबित

  • झारखंड के अनेक लोगों ने फर्जी हथियार लाईसेंस बनाये हैं

  • अलगाव वादी नेता आंगन संथानम का नाम आया

  • गृह मंत्रालय ने दिया है इसकी जांच का आदेश

  • बहुत बड़ा फर्जी आर्म्स रैकेट चला रहे हैं लोग

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : पूर्वोत्तर भारत में हथियारों की तस्करी लगातार हो रही है। राजस्व खुफिया

निदेशालय (डीआरआई) और असम राइफल्स के संयुक्त अभियान में पूर्वोत्तर क्षेत्र में

हथियारों की तस्करी करने वाले एक बड़े रैकिट के बारे में जानकारी मिली है।राजस्व

खुफिया निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में अपराधी प्रवृत्ति के लोग नगालैंड से

हथियार का फर्जी लाइसेंस बनवाकर हथियार की खरीद कर रहे हैं। राज्य पुलिस

मुख्यालय ने नगालैंड से हथियार खरीदने वाले गिरोह की सक्रियता व उसके इस्तेमाल को

लेकर सभी जिलों को विशेष तौर पर अलर्ट भी किया है। राज्य पुलिस मुख्यालय को इस

संबंध में केंद्रीय गृहमंत्रालय ने पत्र भेजा था।केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र के बाद मुख्यालय

ने नगालैंड से आर्म्स लाइसेंस लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। राज्य में

पूर्व में भी नगालैंड से हथियार की तस्करी कराने वाले गिरोह का खुलासा हो चुका है।

एनआईए की जांच में अलगाववादी नेता की पहचान हुई

एनआईए की जांच में भी यह बात सामने आ चुकी थी कि नगालैंड का अलगाववादी नेता

आंगन संथानम के लोगों के द्वारा उग्रवादी संगठन को हथियार उपलब्ध कराने के साथ

साथ फर्जी तरीके से आर्म्स लाइसेंस रैकेट भी चलाया जाता है।नगालैंड व जम्मू-कश्मीर से

फर्जी तरीके से हथियार के नेशनल परमिट संबंधी लाइसेंस बनवाए जाते हैं। इसके बाद

कोलकाता से महंगे हथियार की खरीद उसी लाइसेंस के आधार पर कर ली जाती है। रांची

समेत कई जिलों में आपराधिक व दबंग किस्म के लोग इसी लाइसेंस के जरिए हथियार

की खरीद कर रहे हैं। राज्य पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि राज्य में कहीं भी कोई

व्यक्ति नगालैंड के आर्म्स लाइसेंस का इस्तेमाल कर हथियार की खरीद करता है तो

उसकी जांच करायी जाए। नगालैंड से हथियार लाइसेंस की रिपोर्ट लेकर इस संबंध में

कार्रवाई की जाए।

पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा फर्जी लाईसेंस नगालैंड के

नगालैंड से जारी लाइसेंस फर्जी निकलता है तो इस मामले में आर्म्स एक्ट के तहत

मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है। मिजोरम सीमा पर म्यांमार से एके-47

राइफलों की तस्करी कर उन्हें बांग्लादेश के विद्रोही संगठनों तक पहुंचाने की खुफिया

जानकारी मिलने पर डीआरआई और असम राइफल्स ने पूरे उत्तर पूर्व भारत के

अंतर्राष्ट्रीय सीमा सीमांत क्षेत्रों में अभियान चला रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय केंद्रीय गृह

मंत्रालय के रिपोर्ट के अनुसार एके-47 और 56 राइफल की सप्लाई उत्तर पुत्र के राजा

नगालैंड और मिजोरम से हो रही है ।नगालैंड में बर्मा और बांग्लादेश के रास्ते विदेशी

हथियार भारत तक पहुंच रही है । वहां हथियार तस्करी के कई गिरीहै है।गृह मंत्रालय से

मिले हुए रिपोर्ट के बाद राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और असम राइफल्स ने

पूरे उत्तर पूर्व भारत के अंतर्राष्ट्रीय सीमा सीमांत क्षेत्रों में अभियान चला रहा है। दूसरी

ओर, राजस्व खुफिया निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार पूर्वोत्तर के हथियारों की तस्करी

के मार्ग अब सुनहरे हो गए हैं ।

इसकी पूरी रिपोर्ट दिल्ली भेज दी गयी है

राजस्व खुफिया निदेशालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में सोने की नौका के

लिए हथियारों की तस्करी के मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है और पूर्वोत्तर क्षेत्र ने

मार्च तक 2020-21 में पीली धातु की सबसे अधिक जब्ती दर्ज की है ।

डीआरआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 के बाद विद्रोह में गिरावट के साथ

हथियारों की तस्करी ने बाजी मार ली । “लेकिन के रूप में मार्गों और वाहकों के नेटवर्क

पहले से ही जगह में थे, एक स्विच हथियारों से सोने के लिए बनाया गया था । डीआरआई

के मुताबिक, पश्चिम एशियाई देशों से हवाई मार्गों के जरिए सोने की तस्करी एक जोखिम

भरा प्रस्ताव बन गया है, जिसके कारण तस्करी नेटवर्क जमीन या समुद्री मार्गों को

तरजीह देते हैं । “हाल ही में जब तक सोने की तस्करी के पसंदीदा मार्गों मध्य पूर्व से हवाई

मार्गों थे, जहां से सोने के सबसे अवैध रूप से भारत में धकेल दिया जा रहा था। अंतर्राष्ट्रीय

हवाई अड्डों पर सीमा शुल्क और डीआरआई की बढ़ती निगरानी के कारण, सोने की

तस्करी एक जोखिम भरा प्रस्ताव बन गया है, जिसके कारण तस्करी नेटवर्क भूमि या

समुद्री मार्गों को पसंद करते हैं । “हाल ही में जब तक सोने की तस्करी के पसंदीदा मार्ग

मध्य पूर्व से हवाई मार्ग थे, जहां से ज्यादातर सोने को अवैध रूप से पूर्वोत्तर भारत के

रास्ते भारत में भेजा जा रहा था। 

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