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दुनिया की कोई ताकत अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग नहीं कर सकती

  • इलाके में बढ़ेगी भारतीय सेना असम रेजिमेंट की ताकत

  •  वायुसेना के साथ चार्टर ऑफ एफिलिएशन पर हस्ताक्षर

  •  सीमा पार से होने वाली गतिविधि पर नजर बनी रहेगी

  •  दोनों इकाई अनेक युद्धों में मेडल जीतने वाली सेना है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी:  दुनिया की कोई भी ताकत अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग नहीं कर

सकती। भारत के रक्षा मंत्रालय ने आज चीन सरकार को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कर दिया

है । रक्षा मंत्रालय के एक विज्ञप्ति में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजिआन के

बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि चीन ने कभी अरुणाचल को

मान्यता नहीं दी है और वह दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। भारत के रक्षा मंत्रालय ने कहा

कि चीन के साथ बातचीत का कोई सवाल ही नहीं था और भारत को अपने रुख पर अडिग

रहना चाहिए था। जहां तक अरुणाचल का सवाल है तो चीन ऐसी बातें पहले भी करता रहा

है। इसमें कुछ नया नहीं है। विश्व समुदाय ने अरुणाचल प्रदेश को भारत के अभिन्न अंग

के तौर पर मान्यता दी है। यह आश्चर्यजनक है कि क्यों चीन बार बार वास्तविकता को

नकार रहा है। दूसरी ओर,रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत चीन

सीमांत क्षेत्रों में भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए तेजपुर (असम) में एक औपचारिक

समारोह में 106 एयर फोर्सस्क्वाड्रन के साथ भारतीय सेना की असम रेजिमेंट और

अरुणाचल स्काउट्स कीऐतिहासिक संबद्धता पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए ।

समारोह की शुरुआत असम रेजीमेंट और अरुणाचल स्काउट्स के कर्नल मेजर जनरल

पीएस बहल द्वारागार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करने के साथ हुई । इसके बाद मेजर

जनरल पी एस बहल और ग्रुप कैप्टन वरुण स्लारिया, कमांडिंग ऑफिसर, 106 स्क्वाड्रन

द्वारा ‘चार्टर ऑफ एफिलिएशन’ पर हस्ताक्षर किए गए ।

दुनिया की कोई ताकत से इशारा सीधे चीन की तरफ

पूर्वी वायुसेना कमान की सुखोई-30 स्क्वाड्रन की असम रेजिमेंट के साथ संबद्धता

समकालीन संघर्ष के वातावरण में सैन्य रणनीतिक सिद्धांतों एवं अवधारणाओं के माध्यम

से संयुक्त प्रकृति की साझा समझ, क्षमता, सीमाओं एवं अन्य सेवाओं की मुख्य दक्षताओं

के विकास में सहायता प्रदान करेगी । असम रेजिमेंट की स्थापना दिनांक 15 जून 1941

को हुई थी एवं इसने दूसरे विश्वयुद्ध में छह युद्ध सम्मान जीत कर हार को जीत में बदल

दिया । बर्मा अभियान के दौरान एवं 1971 के भारत-पाक युद्ध में युद्ध की तस्वीर बदलने में

रेजिमेंट का योगदान इतिहास में अच्छी तरह से उल्लिखित है। पूर्वोत्तर भारतके सात

सिस्टर राज्यों से सैनिकों को लेते हुए रेजिमेंट को एक अशोक चक्र, नौ परम विशिष्ट सेवा

पदक, दो परम विशिष्ट सेवा पदक, दो महावीर चक्र, आठकीर्ति चक्र, चार पद्मश्री, चार

उत्तम युद्ध सेवा मेडल, चार अति विशिष्टसेवा मेडल, पांच वीर चक्र, 20 शौर्य चक्र, 13 युद्ध

सेवा मेडल, 180 सेनामेडल, 35 विश्वस्त सेवा मेडल्स, 66 मेंशन-इन-डिस्पैच और कई

प्रशस्ति पत्रों से अलंकृत किया गया है ।

दोनों अंगों के पास हैं वीरता के अनेक मेडल

भारतीय वायु सेना की 106 स्क्वाड्रन दिनांक 11 दिसंबर 1959 को स्थापित की गई थी

और फिलहाल यहवायुसेना का प्रमुख सुखोई 30 एमकेआई संचालित करती है । यह

भारतीय वायुसेना की सबसे अलंकृत स्क्वाड्रन है जिसको तीन महावीर चक्र और सात वीर

चक्र मिले हैं । स्क्वाड्रन को प्रतिष्ठित प्रेसिडेंट स्टैण्डर्ड से सम्मानित किया गया है । 1971

के युद्ध में वायुसेना स्क्वाड्रन और असम रेजिमेंट का योगदान और बर्मा अभियान में इस

रेजिमेंट और पूर्वी वायुसेना कमान का संयुक्त प्रयास उनके युद्धक उत्साह, दृढ़ता और

साहस के बारे में बहुत कुछ प्रगट करते हैं । इस दौरान उपस्थित लोगों को मेजर जनरल

पीएस बहल ने संबोधित किया। उन्होंने आज के समय में संबद्धता के महत्व तथा इसके

दूरगामी प्रभाव के बारे में बताया । जनरल ऑफिसर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि

संबद्धता के पीछे काउद्देश्य एक-दूसरे के सामरिक लोकाचार, सौहार्द और दल भावना के

निर्माण के बारे में अधिक से अधिक समझ बढ़ाना था । एक दूसरे की ताकत और बढ़ाया

हुआ यह तालमेल और समझ हमारे सशस्त्र बलों के भीतर शक्ति बढ़ाने के रूप में कार्य

करेगा ।

बाद में मेजर जनरल पी एस बहल ने सुखोई 30 एमकेआई की क्षमताओं से परिचित होने

के लिए एक अभिज्ञता उड़ान भरी ।समारोह में शानदार सुखोई 30 एमकेआई द्वारा

एयरोबेटिक्स डिस्प्ले का प्रदर्शन भी किया गया । मेजर जनरल बहल ने वर्तमान समय में

संबद्धता या जुड़ाव के महत्व और इसके दूरगामी प्रभाव के बारे में बात की। उन्होंने इस

बात पर जोर डाला कि संबद्धता के पीछे का मकसद एक-दूसरे के सामरिक लोकाचार,

सौहार्द और टीम भावना के निर्माण के बारे में ज्यादा से ज्यादा समझ बढ़ाना है, जो एक-

दूसरे के साथ तालमेल और समझ हमारे सशस्त्र बलों के अंदर शक्ति बढ़ाने के रूप में

काम करेगा।

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