लोकतंत्र में भरोसा रखने वाले 50 साल का बयान नहीं दे सकते-गुलाम नबी आजाद

लोकतंत्र पर भरोसा रखने वाले ऐसा बयान नहीं देते-गुलाम नबी आजाद
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रायपुर: लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले 50 साल सत्ता में रहने जैसा बयान नहीं दे सकते।



राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नवी आजाद ने

50 वर्षों तक सत्ता में बने रहने के भाजपा के बयान को तानाशाही की ताजा मिसाल

बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विश्वास करने वाले दल एवं नेता ऐसे बयान नही दे सकते।

श्री आजाद ने आज यहां राफेल विमानों को लेकर आहूत प्रेस कान्फ्रेंस में

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के 50 वर्ष तक सत्ता में रहने के बयान के बारे में

पूछे जाने पर यह टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है

और सत्ता में रहने वाले राजनीतिक दल हर पांच वर्ष बाद अपनी सरकार के कामकाज पर

उसके पास जनादेश मांगने जाते है

पर जिनका इसकी बजाय ईवीएम और अन्य उपायों पर विश्वास होता है

वह इस तरह की बाते करते है।

उन्होने इसे मौजूदा सरकार की तानाशाही रवैये की ताजा मिसाल बताते हुए

उस पर विपक्ष को दबाने, मीडिया पर दबाव बनाने और इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया पर

विपक्षी दलों की खबरों को रूकवाने का आरोप लगाते हुए कहा कि

आज हम जिस राजनीतिक वातावरण में जी रहे है,

उससे साफ है कि अघोषित आपातकाल लागू है।

जितने प्रावधान आपातकाल में लागू होते है,वह सभी गैर कानूनी रूप से लागू है।

लोकतंत्र के अलावा राफेल डील पर भी उठाये सवाल

श्री आजाद ने राफेल डील में 41 हजार करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोपो को

दोहराते हुए कहा कि पहली बार रक्षा खरीद में सारे नियम कायदों को

दरकिनार कर सीधे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही यह डील की

और यूपीए सरकार की डील को रद्द किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलें की समिति से भी इसकी पहले मंजूरी नही ली गई

बाद में पिछली तारीखों में हस्ताक्षर लेकर इसकी खानापूर्ति कर ली गई।

उन्होने कहा कि पिछली तारीख में हस्ताक्षर लेना सीधे सीधे आपराधिक मामला बनता है।

उन्होने कहा कि यूपीए सरकार ने जिस राफेल विमान की खरीद का सौदा

526 करोड़ में किया था उसे मोदी जी ने 1617 करोड़ रुपए में किया।

इसके साथ ही 126 विमान की बजाय केवल 36 विमान की खरीद का निर्णय लिया।

वह भी 41 हजार करोड़ रुपए ज्यादा देकर।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस कथित भ्रष्टाचार में प्रधानमंत्री को सीधा शामिल मानते है

तो उन्होने कहा कि वह यह नही कह रहे है लेकिन जब डील उन्होने सीधे की है

तो इस पर उठ रहे सवालो का जवाब देने की भी जिम्मेदारी उनकी है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में इस मामले में कुछ बोलते नहीं

और बाहर एवं विदेशों में बोलने पर रूकते नहीं।

उन्होंने रक्षा मंत्री की सफाई, मंत्रिमंडलीय सुरक्षा कमेटी के द्वारा बाद में हस्ताक्षर करने

एवं वायु सेनाध्यक्ष के बयान को तरजीह नही देते हुए कहा कि पद पर बने रहने के लिए

यह सब कुछ करना उनकी मजबूरी है।

सब कुछ सही है तो जांच से भागना क्यों

उन्होने मोदी सरकार पर अपने ऊपर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से पीछे भागने का आरोप लगाते हुए कहा कि

यह पहली सरकार है जिसने अपने ऊपर लगने वाले एक भी आरोप की जांच नही करवाई।

उन्होने कहा कि टूजी मामला हो या फिर कोल ब्लाक आवंटन मामला

इसे लेकर संयुक्त संसदीय समिति की विपक्ष में रहते मांग करने वाली भाजपा

अब राफेल मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की अपनी बारी आने पर

भाग रही है।

उन्होंने पूछा कि अगर सब कुछ नियम कायदे से हुआ है और कहीं कोई गड़बड़ी नही हुई तो जांच से भागना क्यों।

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