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सिद्धू का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना किसी को हजम नहीं




सिद्धू का प्रदेश  कांग्रेस का संकट पंजाब से गहराता हुआ दिख रहा है। दरअसल कैप्टन अमरिंदर




सिंह को लेकर अफवाह फैलने के तुरंत बाद नवजोत सिंह सिद्धू का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से

इस्तीफा देना किसी को हजम नहीं हो रहा है। मंगलवार का दिन कांग्रेस पार्टी के लिए कई घटनाक्रम

एक साथ लेकर आया और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के गृह मंत्री अमित शाह से मिलने

से लगभग 30 मिनट पहले ही नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे

दिया। सिद्धू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे अपने पत्र में कहा कि उनका यह कदम

समझौते से मिली सबक का नतीजा है। इससे संकेत मिलते हैं कि सिद्धू की पसंद को मानने के

नजरिये से देखा जाए तो पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी अधिक स्वतंत्र सोच वाले हो

सकते हैं। दूसरी तरफ वामपंथी नेता और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी राहुल

गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में औपचारिक तौर पर शामिल हो गये। वहां मौजूद गुजरात के युवा

नेता जिग्नेश मेवानी ने कहा कि वह अब तक औपचारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल नहीं हुए हैं

लेकिन भाजपा को पराजित करने के ले सभी का एक मंच पर आना समय की मांग है। 

सिद्धू का प्रदेश कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहा 

 संकट सिद्धू के इस्तीफे के पहले से ही था  सिद्धू के इस्तीफे के बाद प्रदेश कांग्रेस के

कोषाध्यक्ष गुलजार इंदर चहल ने भी इस्तीफा दे दिया। कुछ ही घंटे बाद रजिया सुल्ताना ने राज्य




सरकार का कैबिनेट मंत्री पद छोड़ दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री को भेजे त्यागपत्र में सुल्ताना ने कहा

कि वह नवजोत सिंह सिद्धू के साथ एकजुटता दिखाते हुए इस्तीफा दे रही हैं। सुल्ताना को सिद्धू की

करीबी माना जाता है। कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि सिद्धू ने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि चन्नी ने

सभी बातों को मानने वाली भूमिका में रहने से इनकार कर दिया जिसकी उन्हें उम्मीद थी। इसके

अलावा कांग्रेस नेतृत्व में इस वजह से भी घबराहट थी कि अमरिंदर सिंह भारतीय जनता पार्टी

(भाजपा) में शामिल हो सकते हैं। अमरिंदर सिंह ने बताया कि वह गृह मंत्री से मिल रहे थे लेकिन

सिद्धू के इस्तीफे के बाद, उनकी तरफ से यह स्पष्ट किया गया कि उनकी मुलाकात एक शिष्टाचार

भेंट थी ताकि किसी को इस बैठक को लेकर कोई संदेह न रहे। अमरिंदर सिंह के करीबी सूत्रों ने कहा

कि गृह मंत्री के साथ बैठक में, कृषि कानूनों पर भाजपा सरकार द्वारा यू टर्न लिए जाने पर कुछ

चर्चा होनी थी। भाजपा ने इसे समझा और कृषि कानूनों से समझौता का श्रेय उन्हें दिया होता।

हालांकि अभी तक इस बात का कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका है कि क्या अकेले सिद्धू का

इस्तीफा ही अमरिंदर सिंह को भविष्य में भाजपा में शामिल होने से रोकने के लिए पर्याप्त होगा।

वह पार्टी के लिए एक अहम जाट सिख चेहरा बन जाएंगे और पूरे पंजाब के नेता के रूप में



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