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विलय की चर्चा के बीच कोई औपचारिक बयान किसी तरफ से नहीं

  • गुलर के फूल हो गये हैं झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी
  • बहस के बीच खुद मरांडी गायब हैं
  • पार्टी के तीन विधायक इस बार जीते हैं
  • बंधु तिर्की ने साफ किया है वह महागठबंधन में
  • पार्टी के तीसरे नेता प्रदीप यादव ने इंकार किया है

संवाददाता
रांचीः विलय की चर्चा जोरों पर हैं लेकिन इसकी औपचारिक पुष्टि करने के लिए कोई उपलब्ध नहीं है।

अपनी पार्टी के भाजपा में विलय के इस चर्चा पर जो सबसे बेहतर तरीके से बात रख सकते हैं,

वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ही हैं।

लेकिन इन तमाम चर्चाओं के बीच खुद श्री मरांडी सीन से गायब हैं।

वैसे अपनी पार्टी की कुछ दिनों पूर्व हुई बैठक के ठीक पहले उन्होंने खुद इस किस्म की चर्चाओं को

अफवाह बताया था।

उसके भी पहले उन्होंने खुद अपनी तरफ से हेमंत सोरेन की सरकार को बिना शर्त समर्थन देने का भी एलान किया था।

इसके बाद भी यह चर्चा क्यों और कैसे चल रही है, इस बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं है।

बाजार में सिर्फ इस बात की चर्चा है कि श्री मरांडी ने ऐसा फैसला भाजपा हाईकमान से बात के बाद लिया है।

लेकिन दोनों पक्षों की तरफ से इस बारे में अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

बाजार में सिर्फ यह कहा जा रहा है कि श्री मरांडी अपनी पूरी पार्टी का ही भाजपा में विलय करने जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के चर्चा के केंद्र में आने के पहले उन्होंने स्पष्ट किया था कि हर बार भाजपा की तरफ से ऐसी अफवाह फैलायी जाती है।

जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि अब भाजपा में उनकी वापसी की कोई संभावना नहीं है।

उन्होंने भाजपा में जाने के सवाल पर यह स्पष्ट किया था कि जिनलोगों ने इस बारे में

सूचनाएं सार्वजनिक की थी, उन्हें कमसे कम तिथि और दिन के सवाल पर सच्चाई को जांच लेना चाहिए था।

जिस तिथि को उनके दिल्ली में होने की बात कही गयी थी, उस दिन वह दिल्ली नहीं रांची में ही थे

और पार्टी के कार्यकर्ताओं से लगातार मिलते रहे थे।

विलय की चर्चा के बीच सब कुछ फाइनल होने का भी दावा

भाजपी के खेमे से यह दावा किया जा रहा है कि भाजपा के कद्दावर आदिवासी चेहरा के तौर पर

ही श्री मरांडी को सम्मानजनक पद के साथ पार्टी में वापस लाया जा रहा है।

लेकिन ऐसी बात कहने वाले नेता औपचारिक तौर पर इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

दूसरी तरफ झाविमो के एक अन्य विधायक बंधु तिर्की ने स्पष्ट कर दिया है कि

वह हर कीमत पर महागठबंधन के साथ ही रहेंगे।

पार्टी के तीसरे विधायक प्रदीप यादव ने अपने पार्टी बदलने के सवाल को गलत बताया था। खुद श्री मरांडी के उपस्थित नहीं होने की वजह से इस चर्चा में हर रोज नये नये आयाम जुड़ रहे हैं।

लेकिन उनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हो पा रही है। सिर्फ प्रदीप यादव ने संकेत दिया है कि वह पार्टी के भाजपा में विलय के पक्ष में नहीं हैं।

यानी पार्टी के तीन में से दो विधायक संभावित विलय के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं।

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