fbpx Press "Enter" to skip to content

बड़ा तालाब की सफाई के लिए आगे नहीं आ रहा कोई ठेकेदार

  • हाईकोर्ट ने कहा टेंडर नहीं हुआ तो निगम खुद करे सफाई

संवाददाता

रांची : बड़ा तालाब की बिगड़ती स्थिति को लेकर झारखंड हाइकोर्ट ने रांची नगर निगम

को फटकार लगायी है। लगातार गिरते सीवेज के पानी से तालाब दूषित हो रहा है।

तालाब में जलकुंभी लगातार बढ़ती जा रही है। इसे लेकर वकील खुशबू कटारुका द्वारा

एक जनहित याचिका हाइकोर्ट में दायर की गयी थी। शुक्रवार को इसे मामले पर

सुनवाई हुई। याद रहे कि कोरोना लॉक डाउन के दौरान इस बड़ा तालाब की सफाई पूरी

तरह बंद होने की वजह से पूरे तालाब में जलकुंभी भर चुकी है। इसकी आड़ में किस

छोर से कहां के गंदे नाला का प्रवाह इस तालाब में हो रहा है, उसका पता भी नहीं चल पा

रहा है। लॉक डाउन की छूट के बाद वहां चारों तरफ पेवर लगाने का काम प्रारंभ हुआ है।

मजेदार हालत यह है कि जहां एक दिन पहले ऐसे पेवर लगाये जा रहे हैं, वे अगले दिन

ही टूटे अथवा उखड़े हुए पाये जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर पेवर लगाने के बाद वहां की

जमीन भी धंसी हुई नजर आ रही है। देखकर ही यह समझा जा सकता है कि किसी

भारी वाहन के वहां आने की वजह से नीचे की जमीन धंस गयी है।

 हाईकोर्ट ने निगम से पूछा है कि आखिर तालाब की स्थिति ऐसी क्यों है। कोर्ट ने अगले

चार सप्ताह में निगम को जवाब देने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अगर तालाब

की सफाई के काम के लिए जारी टेंडर में कोई भी वेंडर नहीं आ रहा है, तो निगम को ही

खुद इसे साफ करना चाहिए। कोर्ट ने कहा है कि झील को लगातार हो रहे नुकसान को

देख कर भी निगम यह बहाना नहीं बना सकता है कि तालाब की सफाई के लिए जारी

टेंडर में कोई शामिल नहीं हो रहा है।

बड़ा तालाब में लगातार आ रहा है गंदे नाली का पानी

जनहित याचिका में यह मुद्दा जोरों से उठाया गया है कि तालाब में सीवेज का पानी

लगातार गिराया जा रहा है। इससे यहां के पारिस्थितिकी तंत्र पर काफी बुरा असर पड़ा

है। मुख्य न्यायाधीश रवि रंजन और न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने इस पर

सुनवाई की। उन्होंने आरएमसी को निर्देश दिया कि बड़ा तालाब को बचाने के लिए

अपनी योजनाओं का एक विस्तृत जवाब दाखिल कोर्ट में दाखिल करें। रिपोर्ट में इसकी

भी जानकारी दी जाये कि तालाब में बहनेवाले सीवेज के पानी को रोकने के लिए उनकी

क्या योजना है।मामले की सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से भी तालाब को

लेकर सवाल पूछा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या राज्य के जल स्रोतों को बचाने के लिए

सरकार के पास कोई नीति है। अगर है, तो उसकी जानकारी कोर्ट में दाखिल करें। कोर्ट

ने यह भी कहा कि राज्य के सभी जल स्रोतों का संरक्षण करना सरकार का दायित्व है।

कोर्ट ने निगम को कहा कि सबसे पहले उसे इस स्थिति को देखना चाहिए कि आज पूरे

तालाब को जलकुंभी ने ढंका है, जो कि सीवरेज का परिणाम है।


 

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from अदालतMore posts in अदालत »
More from झारखंडMore posts in झारखंड »
More from रांचीMore posts in रांची »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!