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निर्भया के अपराधियों को हुई फांसी मां ने कहा न्याय मिला

  • कानूनी हथकंडों का सहारा लेते रहे अपराधी

  • काफी समय से टलती आ रही थी फांसी

  • रात भर जागता रहा तिहाड़ जेल प्रशासन

  • अंतिम समय में कहा मरना नहीं चाहते

नईदिल्लीः निर्भया के अपराधियों को आज प्रातःकाल से पहले ही निर्धारित समय पर

फांसी दे दी गयी। इन चारों यानी पवन गुप्ता (25 वर्ष), विनय शर्मा (26 वर्ष), अक्षय

कुमार (31 वर्ष) और मुकेश कुमार (32 वर्ष) की यह सजा भी न्यायिक प्रक्रिया के लिए

एक मिशाल बनी। इन चारों ने विभिन्न विधि सम्मत तरीकों से ही अपनी सजा को

टालने और फांसी से बचने के हर संभव कानूनी प्रावधानों का लगातार इस्तेमाल किया।

हाईकोर्ट में उनकी याचिका रद्द किये जाने के बाद उनके वकील सुप्रीम कोर्ट भी गये थे।

अपडेट फांसी पर लगाई सुप्रीम कोर्ट ने लगायी अंतिम मोहर

उच्चतम न्यायालय ने आधी रात को हुई सुनवाई में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्याकांड के गुनाहगारों की फांसी पर अपनी अंतिम मोहर लगा दी।

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण एवं न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने मध्य रात्रि के बाद न्याय के सर्वोच्च मंदिर का दरवाजा खोलकर करीब एक घंटे तक गुनाहगार पवन गुप्ता की याचिका पर सुनवाई की।

न्यायालय ने पवन की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि दया याचिका पर राष्ट्रपति के निर्णय की न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत ही सीमित है और मृत्युदंड पर रोक को लेकर कोई नया तथ्य याचिका में मौजूद भी नहीं है।

न्यायमूर्ति भानुमति ने खंडपीठ की ओर से फैसला लिखवाते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के निर्णय को चुनौती देते हुए दायर की गई याचिका में याचिकाकर्ता ने कोई ठोस कानूनी आधार नहीं पेश किया है।

याचिकाकर्ता ने दोषी पवन के नाबालिग होने संबंधी उन तथ्यों को रखा, जिन्हें पूर्व में ही अदालत सुनवाई करके नकार चुकी है। इसलिए उक्त याचिका खारिज की जाती है।’’

कोरोना वायरस की वजह से वहां जारी प्रतिबंधों की वजह से उन्हें अंदर जाने की

अनुमति नहीं मिली। इसके विरोध में वह धरने पर भी बैठे। दूसरी तरफ अभियुक्तों

द्वारा अंतर्राष्ट्रीय अदालत में मामला दायर किये जाने का भी कोई फायदा अंततः नहीं

मिला। तिहाड़ जेल प्रशासन ने डेथ वारंट का निष्पादन कर दिया।

रात भर जागते रहे चारों और जेल प्रशासन

तिहाड़ जेल प्रशासन को भी फांसी की इस सजा को क्रियान्वित करने के लिए रात भर

जागना पड़ा। जेल सूत्रों की मानें तो इस दौरान अभियुक्त भी लगातार जागते और

मानसिक परेशानी के दौर में ही रहे। आज सुबह फांसी दिये जाने के बाद डाक्टर ने इस

शवों की परीक्षण करने के बाद उन्हें मृत घोषित किया। डाक्टर द्वारा पुष्टि किये जाने

के बाद तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने चारों की मौत की सूचना पत्रकारों

की दी। इस दौरान इन चारों को फांसी की सजा दिये जाने की मांग का समर्थन करने

वाले अनेक संगठन के लोगों ने मौत की औपचारिक सूचना मिलने के बाद ही इस पर

प्रसन्नता जाहिर करते हुए न्याय होने जैसे बैनर भी प्रदर्शित किये। जेल के डीजी ने कहा

कि चारों के शव पोस्टमार्चम के बाद उनके घरवालों को सौंप दिये जाएंगे।सुबह आठ बजे

से इनका पोस्टमार्टम डॉ बीएन मिश्रा के नेतृत्व में पांच डाक्टरों की टीम द्वारा किया जा

रहा है। इस काम के पूरा होने के बाद शवों को उनके घरवालों को सौंप दिया जाएगा। वैसे

मरने के पहले मौत से बचने के लिए गिड़गिड़ाने के अलावा इन चारों ने अपनी तरफ से

कोई अंतिम इच्छा व्यक्त नहीं की थी।

निर्भया के अपराधियों को फांसी पर प्रदर्शन भी

निर्भया की मां और पिता दोनों ने अंततः इस फैसले पर प्रसन्नता जाहिर की है। दिसंबर

2012 की इस दरिंदगी भरी घटना सामने आने के बाद पूरा देश स्तब्ध रह गया था।

इसके विरोध में बड़े जनांदोलन की वजह से ही कांग्रेस की राज्य सरकार के पतन की

नींव रखी गयी थी। पुलिस की सक्रियता से बहुत जल्दी ही चारों अपराधी पकड़े गये थे।

उसके बाद से चारों अलग अलग तरीके से कानूनी प्रावधानों का सहारा लेकर फांसी से

बचने की कोशिश करते रहे।

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