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पाकिस्तान में नौ सौ बच्चों को एचइवी संक्रमण

  • इसके लिए जिम्मेदार डाक्टर की पहचान हुई

नईदिल्लीः पाकिस्तान में नौ सौ बेगुनाह बच्चे एचआइवी से संक्रमित हो गये थे।

जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। दरअसल सूई लगाने के लिए सीरिंज का दोबारा

इस्तेमाल करने की वजह से यह संक्रमण बच्चों में फैला है, इस बात की भी

पुष्टि हो चुकी है। पाकिस्तान के राताडेरो इलाके में यह गड़बड़ी हुई है। इस इलाके

में पिछले अप्रैल माह से ही एचआइवी संक्रमण के लगातार बढ़ने की शिकायत

मिलने की वजह से दुनिया का ध्यान इसकी तरफ आकृष्ट हुआ था। पिछले

पांच महीनों के दौरान इस किस्म के एक हजार से अधिक मामले सिर्फ एक

शहर के आने की वजह से स्वास्थ्य वैज्ञानिक चौकन्ने हो गये थे।

पिछले पांच महीने से इसके कारणों की तलाश की जा रही थी। इसी किस्म का

हादसा उत्तर प्रदेश में भी वर्ष 2018 में हुआ था जब एक नीम हकीम की वजह

से 46 लोग एचआइवी की चपेट में आ गये थे। वर्ष 2012 और 2017 में भारत

के महाराष्ट्र में भी करीब 500 लोग इस किस्म की गलतियों की वजह से

जानलेवा बीमारी की चपेट में आ चुके थे।

पाकिस्तान में इस शहर की कुल आबादी दो लाख

पाकिस्तान के इस राताडेरो इलाके में कुल आबादी करीब दो लाख की है। इनमें

से चौथाई की जांच अब तक हो पायी है। इस वजह से ऐसी आशंका है कि सभी

लोगों की जांच होने के बाद शायद एचआइवी पीड़ितों की संख्या में और

बढ़ोत्तरी हो सकती है। अब तक जिन 900 बच्चों की पहचान हो चुकी है,

वे सभी 12 साल से कम आयु के बच्चे हैं।

इस क्षेत्र के निजी डाक्टरों पर प्रतिबंध लगाने और नीम हकीमों और ब्लड

बैंकों पर नजर रखने के बाद इस किस्म की गड़बड़ी होने के बाद अब संदेह

किया जा रहा है कि यह कारनाम किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत

शिशु रोग विशेषज्ञ डाक्टर का ही है। जिसकी वजह से इतने सारे बच्चे

बीमारी की चपेट में आये हैं। जांच का दायरा आगे बढ़ने पर यह भी पता

चला है कि वहां के अनेक डेंटिस्ट और नाई भी एचआइवी से बचाव के

नियमों का पालन नहीं करते। अब इस मामले में जिस सरकारी डाक्टर

पर शक की सूई है, उसके बारे में पीड़ितों के परिजनों ने शिकायत की है कि

दोबारा सीरिंज इस्तेमाल करने के खतरों से वे वाकिफ थे। बच्चे के परिजनों

ने डाक्टर से इसकी शिकायत भी की थी। लेकिन उन्हें गरीब बताकर डाक्टर

ने एक ही सीरिंज से कई बच्चों को सूई दी। अब खतरा काफी बढ़ जाने के

बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इसके प्रति सतर्क हुआ है।

डब्ल्यू एच ओ की तरफ से वहां एडस की जांच के किट भेजे जा रहे हैं।

पाकिस्तान में वर्ष 2018 तक पहले से ही करीब एक लाख साठ हजार एडस के

मरीज हैं। वर्ष 2003 के बाद से वहां आठ बार इस किस्म के मामले सामने आ

चुके हैं। इस बार चर्चा में आये राताडेरो इलाके में वर्ष 2016 में भी ऐसा हादसा

हो चुका है।

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