रोहिंग्या पर काम करने वाले एनजीओ संगठन का होटल बिल 150 करोड़

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  • विदेशी मदद का 25 फीसद भी शरणार्थियों पर खर्च नहीं

रफीकुल इस्लाम

ढाकाः रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए आने वाले पैसों की बंदरवांट हो रही है।

पहली बार इस बात का खुलासा हुआ है कि इन शरणार्थियों के लिए काम करने वाले

एनजीओ संगठनों के लोगों ने पिछले छह महीने में अपने होटलों का खर्च 150 करोड़ रुपया बना दिया है।

दूसरी तरफ यह भी पता चला है कि दरअसल इन शरणार्थियों की मदद के लिए विदेशों से

जो धनराशि आ रही है, उसका 25 प्रतिशत भी वास्तव में शरणार्थियों पर खर्च नहीं हो रहा है।

पिछले सितंबर से फरवरी तक के आंकड़े यही सच्चाई बयां कर रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक इस काम के लिए मकान किराये पर लेकर काम करने के मद में भी

एनजीओ संगठनों ने आठ करोड़ रुपये बतौर किराया खर्च किया है।

इससे स्पष्ट हो जाता है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की दशा सुधारने के लिए जो पैसा विदेशों से आ रहा है,

उसका अधिकांश हिस्सा एनजीओ के लोग अपने ऊपर ही खर्च कर रहे हैं।

बांग्लादेश के कानून विषयक मंत्रिमंडलीय कमेटी के अध्यक्ष ए मोजम्मल हक ने यह जानकारी दी है।

गृह मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि हाल ही में

गुप्तचर विभाग की एक रिपोर्ट में इस बात की भी जानकारी दी गयी है कि

कुछ एनजीओ दूसरे मकसद से भी यहां काम कर रहे हैं।

रोहिंग्या शरणार्थियों के नाम पर कुछ संगठन दूसरे खेल में भी

इस सूचना के बाद संबंधित एजेंसियों को मामले की तह तक जाने के निर्देश भी दिये गये हैं।

उल्लेखनीय है कि म्यानमार में सेना के आक्रमण और दमन के साथ साथ

वहां रोहिंग्या निवासियों पर लगातार हो रहे हमलों की वजह से 2017 में

सात लाख से अधिक रोहिंग्या भागकर बांग्लादेश आ गये थे।

इन शरणार्थियों को बांग्लादेश के कॉक्स बाजार इलाके में शरणार्थी शिविरों में स्थान दिया गया है।

शरणार्थियों की स्थिति से वाकिफ होने की वजह से दुनिया भर के संगठन उनकी मदद के लिए पैसे भेज रहे हैं।

अब बांग्लादेश की सरकार के साथ साथ कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी इस पर काम कर रहे हैं।

इसी बीच एनजीओ संगठनों की इस फिजूलखर्ची का मामला सामने आया है।

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