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अगला लक्ष्य वर्ष 2024 का चुनाव है, टीएमसी की बैठक में स्पष्ट हुआ




राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः अगला लक्ष्य वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा का चुनाव है, यह तृणमूल कांग्रेस की कार्यसमिति की बैठक में साफ कर दिया गया है। इसके तहत ही विवादों से बचने के लिए फिर से कार्यसमिति ने ममता बनर्जी के निर्णय को ही सर्वमान्य बताने का प्रस्ताव अलग से पारित कर दिया है।




वैसे इस बैठक में कहा गया है कि पार्टी का दायरा बढ़ने की वजह से कार्यसमिति के ढांचे में बदलाव के साथ साथ अन्य नेताओँ को भी इसमें स्थान दिया जाएगा। इसी क्रम में पार्टी के संविधान में भी बदलाव की आवश्यकता महसूस की गयी है। संविधान में बदलाव के बाद भी कार्यसमिति की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी की दिशा और दशा पहले जैसी ही रहेगी।

सिर्फ अगला लक्ष्य देखते हुए जरूरी बदलाव किये जायेंगे। तृणमूल कांग्रेस कार्यसमिति की यह बैठक ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई थी। इस बैठक में साफ साफ कहा गया है कि अब आगामी लोकसभा चुनाव को भी अपना अगला लक्ष्य समझते हुए काम प्रारंभ कर दिया गया है। इसके तहत अब संगठन का कई राज्यों में विस्तार हो चुका है।

लिहाजा इस बदलाव को देखते हुए कार्यसमिति में भी परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की गयी है। अगला लक्ष्य स्पष्ट तौर पर भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को एक मजबूत विकल्प के तौर पर सामने रखने की है। कार्यसमिति की बैठक समाप्त होने के बाद पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पत्रकारों को इस बात की जानकारी दी।




उन्होंने यह भी पताया कि पार्टी के कार्यसमिति की अगली बैठक दिल्ली में होगी। उन्होंने कहा कि अभी पार्टी की कार्यसमिति में 21 सदस्य हैं। अब बदलाव के तहत पश्चिम बंगाल के बाहर के कई नेताओं को इस कमेटी में स्थान दिया जाएगा।

अगला लक्ष्य देखकर ही नये नेता कमेटी में आयेंगे

इस बारे में संविधान में बदलाव की आवश्यकता होगी, जिस पर अंतिम फैसला ममता बनर्जी ही लेंगी। कोलकाता की इस बैठक में कार्यसमिति के सभी 21 सदस्यों के अलावा मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल सांगमा, पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा, हरियाणा के नेता अशोक तंवर, जदयू से पार्टी में आये पवन शर्मा तथा पूर्व टेनिस खिलाड़ी लियेंजर पेज भी शामिल हुए थे।

इस मौके पर जदयू से पार्टी में आये पवन शर्मा ने कहा कि यह बैठक कई कारणों से ऐतिहासिक है क्योंकि अब से पार्टी अगला लक्ष्य पाने के लिए खुद को राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने के लिए हर संभव कदम उठायेगी। अभी देश के जो हालात हैं उसमें भाजपा के खिलाफ खड़ा होने के लिए किसी को तो आगे आना ही पड़ेगा। इस लिहाज से ममता बनर्जी का नेतृत्व वाकई बदलाव की पहली कोशिश है।



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