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अगले चरण की सैन्य वापसी की राहत शायद उतनी आसान नहीं

  • सोलह घंटे की बैठक में नहीं निकला नतीजा

  • दिन के दस बजे से रात दो बजे तक चली बैठक

  • देपसांग के सतही इलाकों पर अटके हैं दोनों पक्ष

  • सरकार से सहमति लेने के बाद अगली बैठक होगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अगले चरण की सैन्य वापसी पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पायी है।

राजनीतिक चर्चाओं से दूर भारत और चीन के सैन्य कमांडर अपने सैन्य अनुशासन के

तहत इस समस्या को सुलझाने में जुटे हुए हैं। इस बारे में कल दोनों देशों के सैन्य कमांडर

सोलह घंटे तक इसमें माथापच्ची करते रहे लेकिन इस बैठक का अभी कोई नतीजा नहीं

निकला है। फिर भी दोनों देशों की सीमा पर अब तनाव कम है क्योंकि पहले चरण का काम

शांतिपूर्वक पूरा हो चुका है। सबसे अधिक तनाव के क्षेत्र प्योगौंग झील से दोनों देशों की

सेना एक दूसरे से दूर हट चुकी हैं। इसके तहत युद्ध की तैयारियों के तहत वहां पहुंचे टैंक

और बख्तरबंद गाड़ियों को भी पीछे ले जाने का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। अब

दोनों देशों के सेनाधिकारी गोगरा, हॉट स्प्रिंग्स, डेमचोक और देपसांग के मैदानी इलाकों से

सेना हटाने पर बात चीत कर रहे हैं। भारतीय सैन्य विशेषज्ञ पहले से ही इस बात को मान

रहे हैं कि अगले चरण में खास तौर पर देपसांग के मैदानी इलाकों से सेना की वापसी का

काम इतना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि उसके ऊपर ही भारतीय वायुसेना

का बड़ा केंद्र दौलत बेग ओल्डी है, जो एक साथ चीन और पाकिस्तान की हरकतों पर

नियंत्रण कर सकता है। 

शनिवार के दिन के दस बजे से प्रारंभ हुई यह बैठक रविवार को मध्यरात्रि के बाद दो बजे

समाप्त हुई। इसमें सैन्य वापसी पर कोई सहमति तो नही बनी लेकिन इस बात पर दोनों

देशों के सैन्य कमांडर सहमत थे कि इस दौरान किसी भी पक्ष की तरफ से यथास्थिति

बनाये रखी जाएगी। साथ ही स्थिति पर नियंत्रण के लिए दोनों देशों के वरीय सैन्य

अधिकारी एक दूसरे से निरंतर संपर्क बनाये रखेंगे।

अगले चरण की बात चीत के पहले सरकार से सहमति लेंगे

वैसे अंदरखाने से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा के गश्ती

प्वाइंट 15 और 17 ए पर सतर्कता बरतने पर सहमति बनी है। इस इलाके में भी दोनों देशों

की सेना एक दूसरे के काफी करीब तैनात है। वैसे समझा जा रहा है कि चारडिंग निंगलुंग

नाला को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद है। लिहाजा इस विषय को सुलझाने में वक्त

लग सकता है।

देपसांग के मुद्दे पर भारतीय पक्ष ने अपनी सेना को गश्ती करने से रोके जाने का मुद्दा भी

इस बैठक में उठाया था। गलवान घाटी की घटना के बाद वहां के कई गश्ती चौकियों पर

भारतीय सेना को आने से चीनी सैनिक रोक रहे हैं। यह ऐसे इलाके हैं, जो भारतीय दावे के

मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा के पीछे भारतीय सीमा में है। वैसे इस क्षेत्र को लेकर वर्ष

2013 से ही दोनों देशों के बीच मतभेद हैं। इस इलाके की वर्तमान स्थिति कुछ ऐसी है कि

चीन की सेना कभी भी भारतीय सेना की गतिविधियों को बाधित कर सकती है।

सैन्य कमांडरों की इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके

मेनन और चीन की तरफ से दक्षिणी चीनी क्षेत्र के प्रमुख मेजर जनरल लिऊ लीन ने भाग

लिया। दोनों के साथ सैन्य अधिकारियों का दल भी था। बैठक में इस बात पर भी सहमति

बनी है कि सैन्य अधिकारियों के बीच जिन मुद्दों पर बात-चीत हुई है, उसके बारे में देश की

सरकार के शीर्ष पर बैठे लोगों से सहमति हासिल करने के बाद अगली बात चीत होगी।

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