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अगले 21 दिनों के लॉक डाउन में अपने आस पास बेहतर कीजिए

  • डंडा खाने से बेहतर है घर पर रहना 

  • वायरस हमले के खिलाफ शक्ति बढ़ाइये

  • आम भारतीय भोजन में बहुत कुछ फायदा

  • फुर्सत में हैं तो खुद से खुद को मजबूत कीजिए

संवाददाता

रांचीः अगले 21 दिनों के लॉक डाउन में बाहर निकलकर पुलिस का डंडा खाने से तो

बेहतर है कि कोरोना नहीं किसी अन्य वायरस का हमला आप पर नहीं हो, इसकी

तैयारी करें। इसके लिए आपको किसी खास विज्ञान की जानकारी अथवा डाक्टरी ज्ञान

की आवश्यकता नहीं है। आप सिर्फ अपनी प्रतिरोधक क्षमता इन दिनों में खुद ही बढ़ा

सकते हैं। घर में बैठे अनेक लोगों की यह शिकायत है कि उनके पास कोई काम नहीं

होने की वजह से वह बोर हो रहे हैं। तो बोर होने से बेहतर है कि आप अपने शरीर पर

ज्यादा ध्यान दीजिए। स्पष्ट है कि कोरोना वायरस स्वस्थ शरीर पर हमला करने के

बाद भी कोई जानलेवा असर नहीं छोड़ पाता है। इसलिए शरीर के अंदर की प्रतिरोधक

क्षमता का विकास भी इस राष्ट्रीय चुनौती से लड़ने में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

अगले 21 दिनों में फुर्सत में हैं तो यह तय कीजिए कि आप इस खाली समय में सांस

लेने की क्षमता के विकास के साथ साथ शरीर के रक्त कणों को अधिक करें, जो किसी

भी वायरस के हमले से आपको बचाते हैं। इसके लिए आपको अपनी भोजन पद्धति में

सबसे पहले सुधार करना है। वर्तमान स्थिति में कार्बोहाइड्रेड खाद्य से ज्यादा बेहतर है

कि आप प्रोटिन से परिपूर्ण भोजन अधिक लें। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को

बढ़ाता है। प्रोटिन बढ़ाने का यह अर्थ नहीं है कि आप सिर्फ चिकन और अंडा ही खायें।

कई किस्म की दालों को मिलाकर बनायी गयी खिचड़ी भी जबर्दस्त प्रोटिन का भंडार है।

मुंग औऱ मंसूर की दाल मिलाकर भी प्रोटिन की बेहतर मात्रा हासिल की जा सकती है।

लेकिन जिन्हें इससे तकलीफ है, वे बेहतर विकल्प खोज सकते हैं।

अगले 21 दिनों में खुद के बचाव का ढेर सारा काम है

कोरोना के बारे में अब तो बच्चा बच्चा जानता है कि इसकी शुरुआत सर्दी खांसी से होती

है। इसलिए सर्दी जैसी नौबत नहीं आये, इसके लिए विटामिन सी से भरे फलों का प्रयोग

बेहतर है। सभी पहले जानते हैं कि विटामिन सी और जिंक शरीर की प्रतिरोधक क्षमता

को बढ़ाते हैं। डब्ल्यूबीसी काउंट को बढ़ाकर हम इस मोर्चाबंदी को और मजबूत कर

सकते हैं। बदलते मौसम में वैसे भी लोग गले में खरास जैसा अक्सर महसूस करते हैं।

तो चाय के जैसा हल्का गर्म पानी पीते रहें, इससे यह परेशानी भी समाप्त हो जाएगी।

हां यह याद रहे कि अगले 21 दिनों में फुर्सत में हैं तो समय को बेकार मत जाया कीजिए

और समय निकालकर पसीना निकालिये यानी कसरत कीजिए। इस पसीना निकालने

का अर्थ व्यायाम करना है। इससे शरीर के अंदर जो विकास पैदा हुए होंगे, वे भी पसीना

बनकर बाहर निकल आयेंगे। साथ ही अगर आप सर्दी जैसा महसूस करते हैं तो खुद को

लगातार कमरे के भीतर कैद मत रखिये। सुबह या शाम को खुली हवा में कुछ देर पैदल

चलिये। हां याद रखिये के इसका अर्थ मोरहाबादी में मॉर्निंग वाक नहीं है। आप अपने

घर की छत अथवा खुली बॉलकानी अथवा दालान में भी यह काम कर सकते हैं।

फुर्सत में हैं तो इन सभी कार्यों को खुद कर और दूसरों को ऐसा करने की प्रेरणा देकर भी

आप कोरोना जैसे अदृश्य शत्रु के संभावित हमले को विफल करने हेतु बढ़िया इंतजाम

कर सकते हैं।  फालतू के उत्साह में पुलिस के हाथों पिट जाने से बेहतर हैं कि माहौल में

मौजूद तमाम वायरसों से लड़ने की क्षमता का विकास करें।

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