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न्यूजीलैंड भी भारत की राह पर एक महीने का लॉकडाउन

वेलिंगटनः न्यूजीलैंड भी भारत की तरह लॉकडाउन के फैसले के साथ कोरोना को रोकने

की कोशिशों में जुटा है। वहां प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डन ने एक महीने का लॉकडाउन

करने का एलान कर दिया है। वहां भी कोरोना पीड़ितों की संख्या बढ़ने की वजह से

आनन फानन में भात की राह पर कड़ा फैसला लिया गया है। न्यूजीलैंड के लोगों में

हड़कंप की स्थिति पैदा हो गयी है। न्यूजीलैंड में लगभग 20 दिन पहले करीब पांच लोगों

के कोरोना वायरस से संक्रमण की सूचना मिली थी लेकिन अब देशभर में यह आंकड़ा

बढ़कर 283 के पास पहुंच गया है और दो दिन पहले घोषित हुये लेवल-4 अलर्ट के बाद

से यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहां प्रधानमंत्री ने विदेशों से आने वाले

लोगों के लिये सेल्फ आईसोलेशन या खुद को ही घर में बंद करने का नियम रखा था

वहीं इसके मामलों को बढ़ता देख देश की सीमाओं को सील कर दिया गया है और

गुरुवार से लॉकडाऊन की घोषणा कर दी गयी है। सरकार की घोषणा के बाद स्थिति

काफी असमान्य सी हो गयी है और जहां लोग घरों में रहने को मजबूर हैं वहीं लोगों ने

असाधारण रूप से खाने पीने और दवाईयों की खरीददारी शुरू कर दी है जिससे यहां के

बड़े स्टोरों के बाहर लंबी कतारे लग गयी हैं। अधिकतर स्टोरों और मॉलों में अब लोगों

को खाने पीने और खासकर टी-शू पेपरों की खरीददारी को लेकर संख्या तक तय करनी

पड़ी है, जिससे कोई एक व्यक्ति दो से अधिक टीशू पेपरों के पैकेट नहीं खरीद सकता है।

न्यूजीलैंड भी भारत की तरह लोगों को दूर रखने की कोशिश में

इन स्टोरों में सुबह से ही लोग खरीददारी करने जुट रहे हैं और अब ये देर रात तक इसी

तरह भरे रहते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते अब स्टोरों में ग्राहरों से कई मीटर की दूरी

रखने और अधिक लोगों को यहां आने से रोकने के लिये निजी सुरक्षाकर्मी तक रखने

पड़े हैं। स्कूल, कॉलेज, लाइब्रेरियां, रेस्त्रां, पब और ऑफिसों को बंद कर दिया गया है।

हालांकि इन सबके बीच बड़ी संख्या में काम करने वाले लोगों पर जीवनयापन का डर

मंडराने लगा है। रेस्त्रां में काम करने वाले भारतीय मूल के पॉल डिसूजा ने बताया कि

उनके पास अब अगले चार सप्ताह तक कोई काम नहीं होने से परेशानी बढ़ गयी है।

हालांकि यहां सरकार की ओर से वेज सब्सिडी के रूप में हर सप्ताह के हिसाब से ऐसे

कामगारों के लिये करीब 500 न्यूजीलैंड डॉलर के भुगतान का प्रावधान किया गया है।

हालाँकि प्राइवेट टैक्सी सेवा उबर चलाने वाले ही भारतीय मूल के मुकेश बरतवाल को

इस स्थिति में सरकार से कोई मदद नहीं मिलेगी जिससे उनपर हर सप्ताह के किराये

और राशन इत्यादि की भारी परेशानी खड़ी हो गयी है।

अनेक इलाकों में भोजन का संकट तेजी से फैला

न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं जबकि बड़ी संख्या में छात्र-

छात्राएं यहां के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं जिनके लिये भी इस

लॉकडाउन से परेशानी पैदा हो गयी है। न्यूजीलैंड में ही रहने वाले छात्र जहां अपने घर

लौट गये हैं वहीं सीमाएं सील हो जाने के बाद यहां रहने वाले कई भारतीय छात्र अपने

होस्टलों में ही रहने के लिये मजबूर हैं। हालांकि इन परेशानियों के बीच लगभग सभी

लोग सख्ती से लॉकडाऊन का पालन कर रहे हैं और सड़कें पूरी तरह से सुनी पड़ी हैं,

लेकिन लॉकडाऊन के पहले ही दिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना वायरस के 78

नये मामले सामने आने के बाद यहां संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका है

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