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नये युद्ध की तैयारी में चीन, ब्रह्मपुत्र पर बांध से सबसे प्रभावी हथियार बनाया

  • पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक बड़ा खतरा है चीन

  • भारतीय दल अभी चुनावी बुखार से पीड़ित

  • उत्तर पूर्व में तबाही ला सकती है चीन की चाल

  • गलवान नदी को भी घेरने की योजना है चीन की

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: नये युद्ध की तैयारियों में जुटे चीन को अभी भारत से कूटनीतिक विरोध का भी

सामना नहीं करना पड़ रहा है। भारत में सरकार सहित सभी राजनीतिक दल पांच राज्यों

के चुनावों में लगे हुए हैं। वहीं, चीन सरकार ब्रह्मपुत्र पर भारत के खिलाफ दूसरे तरीके से

नये युद्ध की घोषणा कर रही है। भारतीय खुफिया ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार एलएसी पर

सीमा विवाद के बीच चीन लगातार भारत के खिलाफ अलग-अलग मोर्चे पर अपरंपरागत

तरीके से लड़ाई छेड़े हुए हैं। इनमें सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर

अटैक से लेकर सीमावर्ती विवादित क्षेत्र में गांव बसाना तक शामिल है।भारतीय खुफिया

ब्यूरो की रिपोर्ट में कहा है कि गैरपारंपरिक तरीकों के तहत चीन अब वाटर वॉर की तैयारी

में हैं। तिब्बत के ऊंचाई पर होने की वजह से चीन को इस संबंध में भारत पर बढ़त हासिल

है। तिब्बत प्राकृतिक संसाधनों के मामले में काफी समृद्ध है। चीन को यह बात अच्छे

तरीके से पता है कि आमने-सामने की लड़ाई में उसके सैनिक भारत के सामने नहीं टिक

पाएंगे। गलवान घाटी में हुई सैनिकों की झड़प में इस बात का उसके अंदाजा हो चुका है।

ऐसे में वह भारत पर अंकुश लगाने के लिए उसकी कमजोर नस दबाना चाहता है।चीन ने

हाल ही में ब्रह्मपुत्र मेगा-प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस परियोजना से चीन थ्री गोर्ज डैम से

तीन गुना अधिक बिजली पैदा करेगा। थ्री गोर्ज डैम चीन में यांग्जी नदी पर बनी दुनिया

की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना है। मेगा प्रोजेक्ट में पानी 3000 मीटर की ऊंचाई से

ब्रह्मपुत्र नदी में गिरेगा। यह नदीं के भारत में प्रवेश से ठीक पहले हिमालय की तरफ यू

टर्न लेकर दुनिया का सबसे लंबा और गहरा कैनयन बनाएगा।

नये युद्ध का कारगर हथियार साबित होगा ब्रह्मपुत्र पर यह बांध

इस तरह ब्रह्मपुत्र पर बांध बनाकर चीन पानी को भारत के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार

के रूप में प्रयोग करना चाहता है। साल 2000 में भी ब्रह्मपुत्र नदी में चीन द्वारा बिना

सूचना के पानी छोड़े जाने की वजह से अरुणाचल और पूर्वोत्तर राज्यों में काफी तबाही हुई

थी। साल 2018 में तिब्बत के मिलिन काउंटी में एक गांव में भूस्खलन से ब्रह्मपुत्र नदी का

मुख्य प्रवाह बाधित हो गया था। 2016 में चीन ने अपनी बांध परियोजनाओं को पूरा करने

के लिए ब्रह्मपुत्र की सहायक नदीं का बहाव रोक दिया था। इसके बाद चीन ने कृत्रिम झील

बनने की जानकारी दी थी। यही कृ्त्रिम झील ओवरफ्लो होकर अरुणाचल में बाढ़ का

कारण बनती हैं। चीन ने एकतरफा ब्रह्मपुत्र नदी से संबंधित पनबिजली के आंकड़े शेयर

करने से मना कर दिया था। इस आंकड़ों के आधार पर ही ब्रह्मपुत्र में पानी छोड़े जानकारी

और पानी के बहाव की जानकारी समय से पहले मिल जाती है। चीन ने यह कदम

डोकलाम में गतिरोध के बाद उठाया था। हालांकि, 2018 में वह फिर से डेटा शेयर करने पर

सहमत हो गया था। भारत को चीन के प्रति अपनी बंटी हुई सोच को छोड़कर चीन को उसी

की भाषा में जवाब देना होगा। भारत को दूरदर्शी सामरिक नीति और प्लानिंग के जरिये

चीन की कमजोर नस खोजकर उसे दबाने की तैयारी करनी होगी। दो अमेरिकी रिपोर्ट में

चीन की चुनौतियों का जिक्र किया गया है। भारत को तिब्बत समेत चीन की आंतरिक

चुनौतियों को लेकर रणनीति बनानी होगी।

चीन दूसरी तरफ गलवान नदी को भी घेरना चाहता है

भारत में ऐसा करने की पूरी क्षमता है बस जरूरत है तो विजन की। सैटेलाइट चित्रों से पता

चला है कि गलवान घाटी में कई सैन्य संरचनाओं का निर्माण करने के अलावा, चीन ने

गलवान नदी को भी घेरने का प्रयास किया है ताकि वह 255 किलोमीटर लंबे दरबूक-

श्योक-दौलत पर विलुप्त होने वाले पुलों को पकड़ सके और उनमें पानी छोड़ सके। चीन

भीषण सूखे की स्थिति में पानी को रोक सकता है, जब नदी का जल स्तर पहले से ही कम

है, साथ ही अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का पानी बड़ी मात्रा में

पहुंचता है। ब्रह्मपुत्र बेसिन में 625 मिलियन लोग रहते हैं, जिनमें से 80% किसान हैं

जिन्हें अपनी फसलों और जानवरों के लिए नदी से पानी की आवश्यकता होती है।

बांग्लादेश को ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों से 94% पानी मिलता है, कुल 2.9

बिलियन मीट्रिक टन। जल स्रोतों का उच्च उपयोग कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं में

परिलक्षित होता है जो नदी के पास आते हैं और इसका पानी कितना महत्वपूर्ण है। चीनी

सरकार ने भारत के खिलाफ नये युद्ध की घोषणा करके ब्रह्मपुत्र नदी का दुरुपयोग करना

शुरू कर दिया है। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा

कर सकते हैं।

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