सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक कार्यकुशलता के लिए नई तकनीक का विकास

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  • अब स्वनिर्मित सुक्ष्मपदार्थ करेंगे ज्यादा बिजली उत्पादन

  • सौर ऊर्जा की गुणवत्ता सुधरेगी

  • वर्तमान पद्धति में प्रदूषण ज्यादा

  • अन्य गतिविधियों में भी होगा फायदा

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः सौर ऊर्जा के उत्पादन मं नैनो पार्टिकल अब बहुत मददगार साबित होने जा रहे हैं।

अब खुद को बनाने और जोड़ने की क्षमता रखने वाले सुक्ष्म पदार्थ (नैनो पार्टिकल) सौर ऊर्जा उत्पादन में

बेहतर स्थिति पैदा कर सकेंगे।

इनकी मदद से ज्यादा सौर ऊर्जा का उत्पादन संभव होगा।

सबसे प्रमुख उपलब्धि यह है कि ये नैनो पार्टिकल खुद ही खुद को

आपस में जोड़कर वह काम कर लेंगे, जिसकी आवश्यकता होगी।

इससे काम में इस्तेमाल होने वाला मानव संसाधन भी नहीं लगेगा।

साथ ही इससे ऊर्जा उत्पादन की गुणवत्ता और आयतन में भी तेजी से बढ़ोत्तरी होगी।

वर्तमान में इस पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा सहित अन्य गैर पारंपरिक ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

इसकी खास वजह ताप और परमाणु विद्युत उत्पादन केंद्रों से उत्पन्न होने वाला प्रदूषण है, जिसकी वजह से पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है।

इस बारे में प्रकाशित शोध प्रबंध में यह भी बताया गया है कि

अमेरिका में वर्ष 2008 से सौर ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है।

यह बढ़ोत्तरी करीब 17 गुणा अधिक है।

जिसकी वजह से अमेरिका के 57 लाख घर अब सौर ऊर्जा से रौशन हो रहे हैं।

यह अपने आप में प्रदूषण कम करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

प्रचलित सौर ऊर्जा संयंत्रों की गुणवत्ता जरूरत के हिसाब से काफी कम होने की वजह से बेहतर किस्म के सौर ऊर्जा उत्पादन संयंत्रों की आवश्यकता पहले से महसूस की जा रही थी।

सौर ऊर्जा उत्पादन में सारे पार्टिकल एक साथ जुड़ते चले जाते हैं

जिस विधि पर ये नैनो पार्टकिल काम करते हैं, उससे सौर ऊर्जा उत्पादन में कमसे कम दस प्रतिशत की बढ़त का अनुमान व्यक्त किया गया है।

वर्तमान के संयंत्र अधिकतम 33 फीसद सौर ऊर्जा को बिजली में बदल पाते हैं।

इनमें भी अगर दस प्रतिशत का ईजाफा हो गया तो यह अकेले अमेरिका के लिए बहुत बड़ी बात होगी।

वैज्ञानिक इसी तकनीक से पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा उत्पादन को प्रारंभिक चरण में ही दस प्रतिशत बढ़ा देना चाहते हैं ताकि पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता को कम किया जा सके।

न्यूयार्क सिटी विश्वविद्यालय के एडवांस्ड साइंस रिसर् सेंटर ने इस दिशा में नैनो पार्टिकल तैयार करने में सफलता पायी है।

इस विधि के बारे में प्रकाशित शोध प्रबंध में बताया गया है कि सूरज की रोशनी सोखने के बाद इसका एक सेल खुद सक्रिय हो जाता है।

नैनो पार्टकिल में यह खासियत है कि यह खुद ही दूसरे पार्टकिल से खुद को जोड़ लेती है।

इसी तरह एक क्रम से यह काम आगे बढ़ता चला जाता है।

इससे सारे सोलर सेल अपने आप ही तेजी से बिजली पैदा करने लगते हैं।

वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि सैद्धांतिक तौर पर इस विधि की कल्पना काफी पहले वर्ष 1965 में की गयी थी।

लगातार अनुसंधान के बाद अब इसमें सफलता मिली है।

इस क्रम में यह भी बताया गया है कि इस नैनो पार्टिकल को तैयार करने में डीपीपी डाई और रायलीन का प्रयोग किया गया है।

इसका इस्तेमाल आम औद्योगिक गतिविधियों में पहले से ही होता आया है।

उन्हें खास विधि से ऐसा बनाया गया है कि वे खुद ही अपनी गुणवत्ता बढ़ा लेते हैं।

इस विधि के प्रारंभक चरण के सफल होने की वजह से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि

इससे ऊर्जा सहित अन्य औद्योगिक गतिविधियों में कई नये आयाम खुल जाएंगे।

खासकर मानव संसाधन का काम यह नैनो पार्टिकल जब खुद कर लेगा

तो किसी भी उत्पादन की लागत भी उल्लेखनीय तरीके से कम हो जाएगी।

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