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प्रोटिन इंजीनियरिंग से तीन सौ गुणा एंटीबॉडी बन सकता है

  • कोरोना से बचाव पर वैज्ञानिकों की नई राय
  •  शरीर को प्रोटिन बनाने का निर्देश देना संभव

  •  उन्नत किस्म के प्रोटिन से एंटीबॉडी भी बनेगी

  •  अधिक आबादी वाले इलाकों में अधिक फायदेमंद

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः प्रोटिन इंजीनियरिंग यानी शरीर में अतिरिक्त किस्म के प्रोटिन के लिए रास्ता

सुगम करना भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई का एक बेहतर तरीका हो सकता है । समझा

जाता है कि जिस तरीके से जेनेटिक इंजीनियरिंग के सहारे शरीर की जेनेटिक संरचना में

तब्दीली की जा सकती है, ठीक पद्धति से शरीर में प्रोटिन भी उत्पन्न किये जा सकते हैं।

कोरोना संकट के बीच वैज्ञानिकों ने प्रोटिन के जरिए शरीर के अंदर प्रतिरोधक की क्षमता

को तीन सौ गुणा अधिक बढ़ा देने का दावा किया है। अभी भी कोरोना से बचाव के लिए

शरीर के अंदर प्रतिरोधक तैयार करने और उसे लगातार मजबूत बनाये रखने की विधियों

पर ही काम चल रहा है। दुनिया के अधिकांश देशों में कोरोना के मरीजों के उपचार में

प्लाज्मा ट्रिटमेंट भी इसी विधि का एक सफल हिस्सा है। कोरोना से जंग जीत चुके लोगों

के शरीर में जो प्रतिरोधक बन चुका है, उसे प्लाज्मा के जरिए ही अन्य मरीजों तक पहांने

का काम संक्रमित रोगी के शरीर में भी प्रतिरोधक बनने की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

प्रोटिन इंजीनियरिंग भी दरअसल जेनेटिक्स का हिस्सा है

इस प्रोटिन इंजीनियरिंग के बारे में एक शोध प्रबंध जर्नल एडवांस्ड्स मैटेरियल्स में

प्रकाशित किया गया है। जिसमें इस बारे में काफी कुछ जानकारी दी गयी है। दरअसल यह

भी मूल रुप से बॉयो इंजीनियरिंग का ही एक हिस्सा है, जिसमें शरीर के अंदर की ताकत

को बढ़ाने के लिए बाहरी मदद ली जाती है। इस विधि के जरिए वैज्ञानिक किसी भी इंसान

के शरीर के अंदर की कोरोना से लड़ने की क्षमता को बदलने की बात कर रहे हैं। इस प्रोटिन

इंजीनियरिंग की विधि को भी इस महामारी के लिए तैयार की जा रही वैक्सिन में

आजमाने की बात भी कही गयी है। शोधकर्ता मानते हैं कि अधिक आबादी वाले इलाकों में

प्रोटिन इंजीनियरिंग का यह तरीका अधिक कारगर होगा और अधिकाधिक लोगों को

इससे तुरंत लाभ पहुंचाया जा सकेगा। जिन वैक्सिनों पर दुनिया भर में शोध और

क्लीनिकल ट्रायल का दौर चल रहा है, उनमें से मुख्य तौर पर एमआरएनए वैक्सिन के

प्रति ही खुद वैज्ञानिक अधिक आशान्वित हैं। यह इसलिए भी है क्योंकि इस विधि से

वैक्सिन तैयार करने में कम समय लगता है ऑऔर उसके विकास का तरीका भी बेहतर

हैं। लोग मानते हैं कि इस विधि से तैयार वैक्सिन बहुत कम समय मे पूरी दुनिया में

उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके बीच प्रोटिन इंजीनियरिंग से प्रतिरोधक क्षमता को

तीन सौ गुणा बढ़ाने से कोरोना संक्रमण की वर्तमान स्थिति को बहुत तेजी से नियंत्रण में

लाया जा सकता है। इस प्रोटिन इंजीनियरिंग की विधि से शरीर के अंदर प्रोटिन के सहारे

प्रतिरोधक तैयार करने की गति तेज होगी और उसका असर भी अधिक दिनों तक कायम

रह पायेगा, ऐसा वैज्ञानिकों का अनुमान है।

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में काफी काम चार वर्षों में हुआ है

इस शोध के बारे में ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय के एसोसियेट प्रोफसर और शोध प्रबंध

के वरीय लेखकर विझाऊ डोंग ने कहा कि इस दिशा में उनका दल पिछले चार वर्षों से काम

करता आ रहा है। इस वजह से उन्हें इस कोरोना संकट में इस विधि के अधिक कारगर

साबित होने की उम्मीद है। इस शोध दल ने इसी साल के प्रारंभ में कुछ उल्लेखनीय प्रगति

भी की है। इस काम के और आगे बढ़ने के पहले ही कोरोना संकट की वजह से अनुसंधान

कार्य प्रभावित हुआ था। अब उस नये सिरे से आगे बढ़ाने की तैयारियां चल रही हैं। वे जिस

विधि से शरीर के अंदर सार्स कोव 2 के लिए एंटीबॉडी तैयार करने की बात कर रहे हैं, वह

विधि पहले से ही अमेरिकी फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा मान्यता प्राप्त है। डोंग ने

कहा कि वैक्सिन बनाने की दिशा में जो काम चल रहे हैं, उससे अगर दुनिया की इस

समस्या का निदान निकल पाया तो अच्छी बात है वरना इस प्रोटिन इंजीनियरिंग की

विधि के सहारे इस काम को और तेजी से करने की आवश्यकता पड़ेगी। इस दल ने उस

विधि को परिष्कृत करने में कामयाबी पायी है, जिसके तहत शरीर के अंदर बाहरी जेनेटिक

संकेतों के जरिए अधिक और उन्नत प्रोटिन तैयार करने के निर्देश प्रेषित किये जा सकते

हैं। इसी विधि से शरीर को अपने अंदर एंटीबॉडी और एंटीजेन भी बनाने का निर्देश भेजा जा

सकता है।


 

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