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नया खनिज खोजा गया रुस की ज्वालामुखी से निकले लावा में

  • ज्वालामुखी के लावा पर शोध के दौरान पता चला

  • रुस के सुदूर पूर्व की ज्वालामुखी से मिला है पदार्थ

  • इसकी बनावट हल्के नीले और हरे रंग की है

  • अंदर से छिद्रदार संरचना है इसकी अजीब सी

राष्ट्रीय खबर

रांचीः नया खनिज खोजा गया है। इसे रुस के एक ज्वालामुखी के लावा से हासिल किया

गया है। यानी उसके अंदर से निकलते खौलते लावा में यह खनिज मिला है। इससे नई

जानकारी यह भी मिली है कि ज्वालामुखी की पूरी प्रक्रिया ही अपने अंदर कई अनजानी

बातों को छिपाये हुए हैं। आम तौर पर खुली आंखों से देखने पर सिर्फ यह पता चलता है कि

ज्वालामुखी सिर्फ बर्बादी ही लाती है। इस बार यह पता चला है कि यह नई चीजों की रचना

भी करती है और नया खनिज का मिलना उसके जीता जागता प्रमाण है। नीले और हरे रंग

के स्फटिक जैसे इस पदार्थ को शोध दल ने पेट्रोविट नाम दिया है। यह रुस के सुदूर पूर्व के

टोलबाचिक ज्वालामुखी के शीर्ष पर पाया गया है। यह ज्वालामुखी कामचाटका

पेनिनसूला के पास स्थित है। इस ज्वालामुखी के जीवित होने का इतिहास काफी पुराना

है। कई हजार वर्षों से इसके अंदर विस्फोट होने के ऐतिहासिक प्रमाण हैं। लेकिन वर्ष

1975-76 और 2012-13 में हुए विस्फोट के ही नमूने शोध दल को मिले हैं।

इसके नमूनों को एकत्रित करने का काम तो वर्ष 2000 से ही चल रहा था। उनमें 130

किस्म के पदार्थ मिले थे, जो पहले से ही जाने हुए थे। लेकिन पहली बार नीले और हरे रंग

के नया खनिज मिलना अपने आप में नई उपलब्धि है। दरअसल ऐसे किसी नये खनिज

की जानकारी इसके पहले भौतिक विज्ञान में नहीं हुई थी। इस पेट्रोविट नामक खनिज को

सल्फर आधारित माना गया है। इसकी संरचना का वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है। इस

शोध से जुड़े सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय के स्टेनिस्लाव फिलाटोव कहते हैं कि इस नया

खनिज का आणविक ढांचा बिल्कुल भिन्न है। इसमें तांबा की मात्रा अजीब है और उसमें

ऑक्सीजन के भी सात अणु पाये गये हैं।

नया खनिज ज्वालामुखी विस्फोट से ही तैयार हुआ है

नया खनिज पृथ्वी के गर्भ से निकला इस पर सवाल उठे थे लेकिन अब वैज्ञानिक इस

नतीजे पर पहुंचे हैं कि ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान होने वाली रासायनिक प्रक्रिया की

वजह से ही इसकी रचना हुई है। इस ज्वालामुखी से निकलते गैसों के संपर्क में आकर यह

स्फटिक जैसा नया खनिज बना है। लिहाजा यह माना जा सकता है कि इस नया खनिज

के पैदा होने की प्रक्रिया ज्वालामुखी के विस्फोट के दौरान ही वहां से निकलने वाले

पाइरकोक्लास्टिक पदार्थ के तौर पर हुई है। इसके पहले ज्वालामुखी विस्फोट से तैयार

होने वाले सारानचिनाइट से इसकी संरचना काफी मिलती जुलती है। इसमें ऑक्सीजन,

सोडियम सल्फर और तांबा के गुण मौजूद हैं। इसकी विशेषता यह है कि इसकी आंतरिक

संरचना कुछ ऐसी है कि इसमें मौजूद सोडियम के अणु इस आणविक ढांचे में स्थान

परिवर्तन कर सकते हैं। इसका पता चलने के बाद वैज्ञानिक यह मानते हैं कि इस पूरी

रासायनिक प्रक्रिया को प्रयोगशाला में भी दोहराया जा सकता है। इसकी मदद से नई पीढ़ी

की बैटरियों और अन्य विद्युतीय उपकरणों का निर्माण भी किया जा सकता है। सिर्फ

इसकी अंदर मौजूद तांबे की संरचना को समझना फिलहाल थोड़ा कठिन है। सेंट पीटर्सबर्ग

विश्वविद्यालय के अलावा भी रुस के अन्य शैक्षणिक संस्थान इस पर काम कर रहे हैं।

शोध की वजह से इस ज्वालामुखी के इलाके के नयी रासायनिक संरचना को जन्म देने का

अद्भूत स्थान माना जाता है।

इस नया खनिज के ऊपर जारी शोध के बारे में प्रोफसर ओलेग साइड्रा कहते हैं कि यह

अपने आप में अजीब आणविक संरचना है। जिसमें ऑक्सीजन के सात अणुओँ का

तालमेल है।

ऑक्सीजन के सात अणुओँ का तालमेल है इसमें

ऐसा तालमेल बहुत कम पदार्थों में देखने को मिलता है। लेकिन इसकी संरचना ही कुछ

ऐसी है कि यह पदार्थ छिद्रदार है। यह सारे आपस में उस सोडियम की वजह से एक ढांचे में

जुड़े हुए हैं जो छिद्रदार इलाके में एक दूसरे तक पहुंच रहा है। आम तौर पर सोडियन ऑयन

पद्धति पर तैयार होने वाली बैटरियों में यह नया गुण काम आ सकता है। इसके लिए इस

नया खनिज का उपयोग बैटरी के कैथोड में इसकी रासायनिक संरचना का इस्तेमाल

किया जा सकता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि वर्ष 2008 से वर्ष 2017 तक इस खास इलाके में

नया खनिज मिलने के अलावा भी इजरायल के नेगेव मरुभूमि, ग्रीस, तंजानिया, दक्षिण

अफ्रीका, जॉर्डन के अलावा भी कई स्थानों पर अलग संरचना के भौतिक पदार्थ पाये गये

हैं। इसलिए पृथ्वी के अंदर मौजूद और विभिन्न कारणों से अपने आप ही तैयार होने वाले

खनिजों पर शोध का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इस पर अभी आगे भी शोध जारी रहने

की पूरी उम्मीद है।


 

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