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नया चिकित्सीय संकट नजर आया कोरोना वायरस के साथ साथ

  • मरने वालों में सबसे अधिक मधुमेह के पेशेंट

  • क्या कोई नये किस्म का डायबिटीज है जांच जारी

  • एसीई 2 के जरिए वायरस पहुंच रहा है पैनक्रियाज तक

  • स्वस्थ्य लोगों को मधुमेह की बीमारी दे रही है महामारी

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः नया चिकित्सीय संकट कोरोना के साथ साथ दिखाई पड़ा है। शोधकर्ताओं की

नजर इस बात पर पड़ी है कि कोरोना का हमला होने के बाद अनेक स्वस्थ्य लोग भी

मधुमेह यानी डायबिटीज के शिकार हो गये हैं। शरीर की इंस्युलिन की गतिविधियों में यह

कैसे रुकावट डाल रहा है, इसका खुलास अभी तक नहीं हो पाया है। फिर भी वैज्ञानिक यह

मानते हैं कि शरीर के अंदर होने वाली इस प्रतिक्रिया से डायबिटीज के मरीजों की परेशानी

और बढ़ रही है।

किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने माना है कि अल्प समय के लिए भी कोरोना

संक्रमण के दायरे में आने वालों के इंस्यूलिन की प्रक्रिया बाधित होती नजर आयी है। इस

कॉलेज क प्रोफसर फ्रांसिस्को रुबिनो का मानना है कि पहले से ही दुनिया डायबिटीज की

परेशानियां झेल रही थी। अब उसपर कोरोना का संकट अतिरिक्त बोझ बन गया है। वैसे

इस बात की पुष्टि होने के बाद वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे है कि मधुमेह की

यह बीमारी पहले से ज्ञात टाइप वन और टाइप टू है अथवा यह कोई नये किस्म का

डायबिटीज है। इस पर अभी और शोध किये जाने की आवश्यकता महसूस की गयी है।

इस नये तथ्य की जानकारी मिल जाने के बाद इस संबंध में एक वैश्विक जांच का

प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। कोवि डायब नाम की इस अंतर्राष्ट्रीय शोध प्रयास में हरेक

को अपने पास मौजूद आंकड़ों के माध्यम से मदद करने की अपील भी की गयी है। न्यू

इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसीन में इस शोध प्रबंध का प्रकाशन किया गया है। इसमें 17

विशेषज्ञों की अलग अलग राय के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है।

नया चिकित्सीय संकट पर शोध 17 विशेषज्ञों के द्वारा

दरअसल इस नई परेशानी का पता चलने के बाद उससे बचाव के तौर तरीकों की तलाश में

हर स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत कोरोना से पीड़ित अथवा ठीक हो चुके

मरीजों के शरीर में ग्लूकोज की मात्रा पर ध्यान देने की बात कही गयी है। इस जांच में

दायरे में पहले से मधुमेह से पीड़ित रोगियों के साथ साथ वैसे मरीजों को भी शामिल करने

को कहा गया है, जो पहले से इस बीमारी से पीड़ित नहीं है। ऐसा इसलिए किया गया

क्योंकि कोरोना से ठीक होने वाले कई मरीजों में डायबिटीज के लक्षण दिखाई पड़े हैं। इस

बीच चिकित्सा वैज्ञानिक यह भी मान चुके हैं कि डायबिटीज के रोगियों पर कोरोना का

हमला ज्यादा होता है। इस दौरान कोरोना के मृत्युदरों के विश्लेषण में भी यह दिखा है कि

मरने वालों में मधुमेह से पीड़ित रोगियों की संख्या अधिक है । आंकड़ों की बात करें

कोरोना से मरने वाले तो बीस से तीस प्रतिशत रोगी मधुमेह के पीड़ित थे।

सार्स कोव 2 की वजह से डायबिटीज की परेशानी क्यों खड़ी हो रही है, यह अब तक स्पष्ट

नहीं है। पहले जो कुछ शोध हुए थे उनमें यह पाया गया था कि सार्स कोव 2 को शरीर में

बांधने और वंशवृद्धि करने का मौका प्रदान करने वाले एसीई-2 प्रोटिन ही इस वायरस को

शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंचने का रास्ता प्रदान करता है। यह प्रोटिन शरीर के अनेक

आंतरिक अंगों में सक्रिय होता है। इसके माध्यम से शरीर के अंदर प्रवेश करना वाला

वायरस इसी प्रोटिन की मदद से अन्य हिस्सों तक फैलता चला जाता है। शायद

पैनक्रियाज में मौजूद इस प्रोटिन की वजह से ही कोरोना के मरीजों को डायबिटीज की

परेशानी हो रही है क्योंकि वहां मौजूद एसीई-2 प्रोटिन के दरवाजे से कोरोना वहां पहुंचकर

कुछ न कुछ प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

इस मधुमेह की भी पहचान की कोशिश जारी है

नया चिकित्सीय संकट नजर आया कोरोना वायरस के साथ साथ

दूसरी तरफ यह भी देखा जा रहा है कि अब कोरोना का वायरस पहले के मुकाबले काफी

अधिक बदल चुका है। वैज्ञानिक निष्कर्ष है कि अमेरिका और इटली के अलावा ब्रिटेन में

भी इस वायरस का संक्रमण और प्रतिकूल प्रभाव इसी वजह से अधिक हुआ है क्योंकि वहां

पाये गये वायरस चीन के वुहान शहर में पाये गये वायरसों की प्रजाति से काफी भिन्न थे।

उनकी संरचना में नजर आने वाला बदलाव ही उन्हें पहले के मुकाबले अधिक घातक बना

रहा है।


 

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