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नई सरकार में अपराधी बेलगाम, अपराध चरम पर

  • सड़को पर उतरा आलाधिकारियों का काफिला

  • चौबीस घंटे चेकिंग पर नहीं मान रहे अपराधी

  • पुलिस के लिए अपराध व अपराधी चुनौती

आशीष कुमार

पटना : नई सरकार यानी बिहार में सुशासन की नयी सरकार गठन के बाद आपराधिक

घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। बढते आपराधिक घटनाओं से विपक्ष लगातार हमलावर

है। मजबूत विपक्ष के कारण नई सरकार के मुखिया नीतीश कुमार हालिया दिनों में क्राइम

कंट्रोल को लेकर तीन बार मैराथन बैठक भी की,उच्चाधिकारियों को रात में सड़कों पर

उतरने का आदेश भी दिया लेकिन वहीं ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।

नई सरकार के 16 नवंबर से लेकर 29 नवंबर तक महज 14 दिनों में ही ताबड़तोड़ 30 बड़े

आपराधिक वारदातों को अपराधियों ने अंजाम दिया। ये वारदातें सरकार और उसके

पुलिसिया व्यवस्था की पोल साफ तौर पर खोल रही है। नीतीश कुमार की जंगल राज

वर्सेज मंगल राज वाली राजनीतिक चालाकी बहुत दिनों तक चल नहीं पायी। यहाँ सत्ता-

सुख भोग रहे चेहरे तमतमा उठे हैं। राज्य में अन्य जगहों की कौन कहे, राजधानी पटना में

भी आपराधिक घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। कार्रवाई के नाम पर

सिर्फ पुलिस कर्मियों के तबादले कर दिये जाते हैं।

नई सरकार के गठन के बाद अपराध के आंकड़े इस प्रकार हैं

16 नवंबर, नवगछिया में गैंगवार के तहत एक अपराधी की हत्या। 17 नवंबर,गया में

स्टेज प्ले के दौरान गोली मारकर एक की हत्या।  छपरा में धारदार हथियार से युवक की

हत्या नालंदा में किडनैपिंग के बाद 5 साल के बच्चे की हत्या।  बक्सर में पुरानी रंजिश के

तहत युवक को गोली मारी गई थी। 18 नवंबर-गोपालगंज में कारोबारी को किडनैप कर

मौत के घाट अपराधियों ने उतार दिया था। 20 नवंबर-सीवान में लूटपाट के दौरान

अपराधियों ने कारोबारी को मारी थी चाकू। सीवान में महिला की हत्या कर लाश को

ठिकाने लगा दिया गया था। छपरा के मांझी में छठ घाट पर जेल से छूटकर आए अपराधी

ने तीन लोगों को मारी थी गोली। 21 नवंबर-छपरा में चाकू मारकर युवती की हत्या।

सीवान में युवक की गला रेतकर हत्या। पटना के अथमलगोला में महिला की गोली

मारकर हत्या। कैमूर में गला रेतकर युवक की हत्या। छपरा में दो बच्चियों को जिंदा

जलाया, एक की मौत। 22 नवंबर-पटना के घोसवरी में 65 साल के वृद्ध की गोली मारकर

हत्या। नालंदा के पावापुरी में पूर्व एमएलसी के भतीजे की गोली मारकर हत्या।

अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर ही जा रहा है

23 नवंबर-छपरा में शादी समारोह के दौरान चाचा-भतीजे की गोली मारकर हत्या।

औरंगाबाद में शराब पीने से मना करने पर युवक को मार दी थी गोली। पटना के रूपसपुर

में सिक्योरिटी गार्ड की कर दी गई थी हत्या। 24 नवंबर-खगड़िया में पूर्व वार्ड पार्षद को

अपराधियों ने मारी थी गोली। 25 नवंबर-बक्सर में अपराधियों ने तीन लोगों को मारी

गोली। 26 नवंबर-गोपालगंज में 5 लाख की रंगदारी नहीं देने पर होमगार्ड जवान को मारी

गई थी गोली। बक्सर में अपराधियों ने दो युवकों को मारी थी गोली। पटना सिटी के

मारूफगंज में घी कारोबारी को मारी गई थी गोली। गोपालगंज में अपराधियों ने घर में

घुसकर सो रहे पति-पत्नी को मारी थी गोली। 27 नवंबर-रोहतास में 21 साल के युवक की

गोली मारकर हत्या। 28 नवंबर-नवगछिया में युवक की हत्या कर हाई स्कूल के पीछे टांग

दी गई थी लाश। गोपालगंज के गोरियाकोठी में जदयू विधायक पप्पू पांडेय के तीन

करीबियों पर हमला, दो की मौत। 29 नवंबर-पटना के चिरैयाटांड़ पुल पर लूट के दौरान

महिला की गोली मारकर हत्या। दानापुर में 40 साल के शख्स की गोली मारकर 

अपराधियों ने हत्या कर दी।

यह आंकड़े काफी हैं सुशासन की स्थिति दर्शाने के लिए

यह उदाहरण यह बताने के लिए है कि बिहार में अपराध के बारे में 2005 से पहले और

इसके बाद के काल को कैसे बताया-समझाया जाता है। अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को

लगता है कि अपराधियों में कानून का भय और रात्रि गश्ती बढ़ाने की ज़रूरत है तो यह

सोलहवें साल में पहुंचे उनके शासन काल पर एक गंभीर सवाल है क्योंकि अपराध पर

नियंत्रण को एक तरह से उनकी यूएसपी की तरह प्रचारित किया जाता है।

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