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उन्नत श्रेणी का सौर ऊर्जा सेल बिजली पैदा करेगा, देखें वीडियो




आकार में छोटे होने के बाद भी कार्यकुशल हैं

आकार में बहुत छोटा और लागत भी कम

पारंपरिक सिलिकन सेल से ज्यादा कारगर

गुणवत्ता और बड़े आकार पर काम जारी है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः उन्नत श्रेणी का सौर ऊर्जा सेल सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करने की




संभावनाओं में बड़ा सुधार कर सकता है। दरअसल इस उन्नत किस्म के सौर ऊर्जा सेलों

की बिजली उत्पादन की क्षमता अधिक होने के साथ साथ वे पारंपरिक सौर ऊर्जा सेलों के

मुकाबले आकार में छोटे हैं। शोध से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में ऐसे सेल ही

किसी भवन के बाहर लगकर पूरी बिल्डिंग को सूर्य की रोशनी से उत्पन्न बिजली से रोशन

कर देंगे। इस दिशा में अब तक जो काम हुआ है वह छोटे आकार के सेल हैं जो बैटरी और

पावर लाइट को बिजली देने में सक्षम है। वर्तमान में जिस किस्म के सेलों का इस्तेमाल

होता है, वे सिलिका से बने होने की वजह से उन्हें सुरक्षित रखने के लिए जो बाहरी आवरण

बनते हैं, उससे उनकी लागत भी काफी अधिक हो जाती है। इसी लागत की वजह से सौर

ऊर्जा तकनीक उतनी तेजी से लोकप्रिय नहीं हो पा रहा है। भारत में उसे प्रोत्साहित करने

के लिए केंद्र और राज्य सरकारों लगातार नये नये प्रयास कर रही हैं। दूरस्थ इलाकों में

स्ट्रीट लाइट, सोलर लालटेन के अलावा अब इसी तकनीक से चलने वाले पानी के पंप भी

धीरे धीरे इस्तेमाल में लाये जाने लगे हैं। लेकिन बिना अनुदान के किसी निजी व्यक्ति के

लिए उसे लगाना संभव नहीं है क्योंकि उनकी कीमत बहुत अधिक होती है। नया शोध इस

कीमत संबंधी परेशानियों को भी दूर करने में सक्षम होगा, ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है।

उन्नत श्रेणी के सौर ऊर्जा सेल को परोवस्काइट सेल कहा जाता है जो भविष्य मे कारगर

होने वाला है। इसकी खास वजह इसका आकार में बहुत छोटा होना और व्यापक उत्पादन

की स्थिति में लागत भी काम होना माना जा रहा है।

उन्नत श्रेणी का यह सौर सेल भविष्य में लोकप्रिय होगा

इसे तैयार करने के लिए एक धातुयी हैलाइड परोवस्काइट का इस्तेमाल किया गया है।

किसी भी ऐसे उन्नत श्रेणी के सेल के केंद्र में जब यह रखा जाता है तो यह रोशनी को

बिजली में बदलने की क्षमता प्राप्त करता है। उसकी लागत भी सिलिकन के सेल के

मुकाबले बहुत कम होती है। दूसरी तरफ से वजन में भी काफी हल्के और लचीले होते हैं।

इस वजह से उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना अपेक्षाकृत आसान होता है। इस




तकनीक को ओकिनवा इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोध दल ने तैयार

किया है। प्रोफसर याबिंग क्वी के नेतृत्व में इस दल ने ऐसे सेल बनाने में सफलता पाने के

बाद उसका विधिवत परीक्षण भी किया है, जिसमें उसकी गुणवत्ता प्रमाणित हो जाती है।

देखें इस प्रयोग का वीडियो

इनलोगों ने सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए इसी विधि से एक लिथियम बैटरी को चार्ज करने

का वीडियो भी जारी किया है। जिससे पता चलता है कि पारंपरिक सिलिकन सेल के

मुकाबले यह कितना कारगर है और आकार में कितना छोटा है। जिस विधि से यह काम

किया गया है, उस परोवस्काइट सेल को एफएपीबी13 कहा गया है। यह एक पाउडर जैसा

है जो किसी भी पर्त पर बिजली उत्पादन करने की स्थिति पैदा कर सकती है। इस पाउडर

को तैयार करने में भी शोध दल के कई किस्म की परेशानियों से गुजरना पड़ा है। कई

रासायनिक विधि से गुजारते हुए बिजली उत्पादन के लिए आने वाली अड़चनों को दूर

किया गया है। इसे बनाने के लिए उसे गर्म कर उसकी अशुद्धियों को अलग करने का भी

काम करने के बाद तैयार घोल से यह पाउडर तैयार हुआ है जो उन्नत श्रेणी के सेल का

मुख्य भाग है। शोधदल ने पाया है कि यह विधि विभिन्न तापमान पर भी सही तरीके से

काम कर सकती है। यहां तक की उच्च तापमान में भी उसकी गुणवत्ता बरकरार रही है।

तापमान के दबाव को भी झेल सकती है इसकी संरचना

सामान्य कमरे के तापमान में यह सेल भूरे रंग से पीले रंग का हो जाता है, जिससे पता

चल जाता है कि यह रोशनी नहीं सोख रही है। लेकिन प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने कमरे

के अंदर ही उससे बैटरी चार्ज करने का प्रयोग किया है, उसके लिए तेज लाइट का प्रयोग

किया गया था। प्रोफसर क्वी कहते हैं कि आकार में बहुत छोटा और सब माहौल में काम

करने लायक होने की वजह से यह बेहतर उपयोगिता की वस्तु है। लेकिन व्यापक

इस्तेमाल के लिए इसके बहुत बड़े आकार के मॉड्यूल बनाने की जरूरत है। इसमें अब तक

25 प्रतिशत कार्यकुशलता हासिल की गयी है। लेकिन कुछ हजार घंटों के इस्तेमाल के बाद

उसकी गुणवत्ता कम होने लगती है। इसे सुधारने की कोशिश जारी है।



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